गुजरात चुनाव 2017 Vs 2012 : 5 अंचलों का गणित और जीत का मार्जिन!

गुजरात में 2017 के चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहमियत रखते थे. चुनाव से पहले जहां भाजपा 150 सीटों पर आने का दावा कर रही थी, वहीं कांग्रेस ने भी दलित, पिछड़ा और आदिवासी तिगड़ी जिग्नेश, हार्दिक, कल्पेश के साथ मिलकर अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

गुजरात चुनाव 2017 Vs 2012 : 5 अंचलों का गणित और जीत का मार्जिन!

भारतीय जनता पार्टी छठवीं बार गुजरात में सरकार बनाने जा रही है. एक ही राज्य में लगातार सरकार बनाने के मामले में अब वह पश्चिम बंगाल की वाम सरकार के बाद है जिसने लगातार 34 साल तक पश्चिम बंगाल पर राज किया था. गुजरात में 2017 के चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहमियत रखते थे. चुनाव से पहले जहां भाजपा 150 सीटों पर आने का दावा कर रही थी, वहीं कांग्रेस ने भी दलित, पिछड़ा और आदिवासी तिगड़ी जिग्नेश, हार्दिक, कल्पेश के साथ मिलकर अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

मतगणना के शुरुआती दौर में जिस तरह से कांग्रेस के पक्ष में हवा बनी उसके बाद लग रहा था कि इस बार विरोधी लहर काम कर गई है. लेकिन वक्त बीतते-बीतते स्थिति साफ होती गई. हालांकि इस बार के चुनाव पिछली बार से थोड़े अलग रहे. भाजपा 100 सीट पर सिमटती नजर आ रही है जिसके हिसाब से उन्हें 2012 की तुलना में 16 सीट का नुकसान होता दिख रहा है वहीं 80 पर बढ़त बनाते हुए कांग्रेस ने 19 सीटों का इजाफा किया है. ये वो अंतर है जो ये बताता है कि गुजरात ने भाजपा को एक जीत तो दी है लेकिन चेतावनी के साथ.

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क्या थे 2012 के नतीजे और जीत का मार्जिन
2012 के नतीजे दिखाते थे दूसरे चरण की 93 सीटों पर कांग्रेस की पकड़ पहले चरण में उसकी कुल सीटों पर जीत के मुकाबले ज्यादा मजबूत थी. यहां कांग्रेस ने 39 सीट पर जीत हासिल की थी वहीं भाजपा को 52 पर जीत मिली थी. लेकिन अगर पहले चरण की 82 सीट पर नजर डालें तो यहां भाजपा की 63 जीतों के सामने कांग्रेस को महज 22 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. यानि यहां भाजपा ने लगभग तीन गुना ज्यादा सीट पर विजय पाई थी.

गुजरात पांच अंचल दक्षिण गुजरात, उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में विभाजित है. इसमें मध्य गुजरात ही ऐसी जगह है जहां कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी और 40 सीट के इस क्षेत्र में भाजपा की 20 सीटों पर जीत के सामने 18 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके अलावा उत्तर गुजरात की 53 सीटों में से भाजपा को 32 पर और कांग्रेस को 21 पर जीत मिली थी. वहीं दक्षिणी गुजरात की 35 सीट में से भाजपा ने 28 सीट हथिया कर बढ़ी जीत हासिल की थी. इसके अलावा 48 सीट वाले सौराष्ट्र में भाजपा को 30 और कांग्रेस को 15 सीट मिली थी. कच्छ की अगर बात की जाए तो भौगोलिक रूप से फैले हुए इस क्षेत्र में केवल एक जिला है जिसमें 6 सीट हैं और उसमें से भाजपा के खाते में 5 सीट गई थी.

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लेकिन अगर हम जीत के अंतर की बात करें तो वो दूसरी कहानी कहता है. सबसे कड़ी टक्कर देने वाले मध्य गुजरात में जहां भाजपा का औसत जीत का अंतर 25,154 का था वहीं कांग्रेस का औसत महज़ 15,169 था. इसके अलावा दक्षिण गुजरात में भाजपा का औसत अंतर 31,354 तो कांग्रेस की औसत जीत का अंतर 16,662 था. उत्तर गुजरात में ये अंतर और बड़ा था भाजपा ने जहां 32,795 के औसत से जीत हासिल की थी वहीं कांग्रेस का औसत 15,684 ही था.

सौराष्ट्र में ये भाजपा का औसत था 17,801 और कांग्रेस के खाते में था 7,879 और महज छह सीट वाले कच्छ में भाजपा ने जहां औसत 10,547 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी वहीं कांग्रेस की जीत के अंतर का औसत 7,613 था. जहां भाजपा की जीत सुनिश्चित नजर आ रही है वहां देखने वाली बात अब यही होगी कि इस औसत अंतर पर क्या फर्क पड़ा है. कांग्रेस का औसत बड़ा है या भाजपा औसत गिरा है.

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)