संस्कृति और राष्ट्रवाद का नाम लेकर महिलाओं को गाली देने वाले इस देश को तबाह कर देंगे

सोशल मीडिया पर जिस तरह ट्रोल गुंडों की फौज खड़ी हो गई है, वह अपने आपमें बहुत खतरनाक है. ये कोई अकेले सिरफिरे लोग नहीं हैं, जो, जो मन में आए लिख देते हैं.

संस्कृति और राष्ट्रवाद का नाम लेकर महिलाओं को गाली देने वाले इस देश को तबाह कर देंगे

राजनैतिक कार्यकर्ता होने के नाते सोशल मीडिया पर गाली खाने की मैं लंबे समय से अभ्यस्त हो गई हूं, लेकिन मुझे यह अंदाजा कभी नहीं था कि कोई इस तरह से बलात्कार की धमकी देगा. सच कहूं, तो एकबारगी अपनी बेटी के लिए इस तरह की टिप्पणी देखकर मैं सकते में आ गई. लेकिन तुरंत संभल गई. क्योंकि मेरा डर ही तो उनकी जीत है, इसलिए मैं डरूंगी नहीं, लड़ूंगी, ताकि मुझे डराने वालों के हौसले न बढ़ें.

यह तो सिर्फ मेरी बात हुई. लेकिन सोशल मीडिया पर जिस तरह ट्रोल गुंडों की फौज खड़ी हो गई है, वह अपने आपमें बहुत खतरनाक है. ये कोई अकेले सिरफिरे लोग नहीं हैं, जो, जो मन में आए लिख देते हैं. किसी को भी बेइज्जत कर देते हैं. किसी को कुछ भी कह देते हैं. अगर ऐसा होता तो उन्हें भारत की उस पुरानी परंपरा का पालन कर आगे बढ़ा जा सकता था, जिसमें कहा जाता है कि ऐसे लोगों की उपेक्षा की जाय.

यहां मामला अलग है, इन लोगों की बाकायदा ट्रेनिंग होती है, उनके दिमागों में जहर भरा जाता है, जहर उगलने के लिए उन्हें पैसे दिए जाते हैं और इस बात की पूरी मॉनीटरिंग की जाती है कि वे जहर उगलने का काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं. इनके पीछे आधुनिक गोएबल्स खड़े हैं. पिछली सदी के पहले उत्तरार्ध में इन लोगों ने जर्मनी को तबाह किया था, अब ये भारत में भी वही करना चाहते हैं. सबसे पीड़ा की बात यह है कि ये उचक्के छाती ठोककर यह भी कहते हैं कि मुझे फलां साहब फॉलो करते हैं.

इन ट्रोल्स के प्रोफाइल जरा गौर से देखिए. कोई कह रहा है वह राष्ट्रवादी है, किसी का दावा है कि वह नया भारत बनाना चाहता है. कुछ लोग खुद को भारतीय संस्कृति और परंपराओं का पैरोकार बता रहे हैं. कितनी शर्म की बात है कि महान भारतीय संस्कृति का नाम लेकर ये लोग इस तरह के धतकरम कर रहे हैं.

मैं इनसे पूछना चाहती हूं कि इन्होंने जिस तरह की सेक्सुअल टिप्पणियां मुझ पर कीं और बाकी महिलाओं पर करते हैं, क्या उसी से “यत्र नार्यस्तु पूज्यते” वाला भारत बनेगा. मैं इन लोगों से पूछती हूं कि जो बातें उन्होंने ट्विटर पर मेरी बेटी के बारे में लिखी हैं, क्या उस तरह की बात वह अपनी बेटी से या मेरी बेटी से आमने-सामने आंख मिलाकर कर सकते हैं. ये वही लोग हैं जो संस्कारी भारत बनाने की बात करते हैं और खुद को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का पहरुआ समझते हैं.

मैं इस बात के लिए देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह की आभारी हूं कि उन्होंने इस मामले में मेरा साथ दिया और मुझे अपमानित करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन बात एक प्रियंका की नहीं है. बात भारत माता की करोड़ों बेटियों की है. अगर आप इस तरह की ट्रोल सेना के फन को नहीं कुचलेंगे तो वे जहर उगलते रहेंगे. मैं आपको याद दिलाऊंगी कि राजनीति हमेशा से सत्ता की लड़ाई रही है, लेकिन यह कभी इतनी नीचे नहीं गिरी थी कि निजी हमले और वह भी हद दर्जे के गिरे हुए हमले एक-दूसरे पर किए जाएं. पिछले कुछ वर्ष में भारतीय राजनीति इस नए पतन से गुजर रही है. हम सबको मिलकर इसे रोकना होगा.

हमें अपने समय में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की वह बात याद रखनी चाहिए जो उन्होंने गांधीजी की हत्या के बाद वर्धा में हुई कांग्रेसियों की पहली बैठक में कहीं थी. “गांधी इज गॉन हू विल गाइड अस नाउ”. किताब में दर्ज भाषण में पंडितजी कहते हैं, “मैंने सुना है कि बापू की हत्या पर कई जगहों पर मिठाई बांटी गई. मैं इस बात पर नहीं जाता कि ऐसा वाकई हुआ या नहीं, लेकिन वह कितना गिरा हुआ वक्त है, जिसमें ऐसी बातें सोची भी जा सकती हैं.” और यह भी एक गिरा हुआ वक्त है, जहां भारत माता का नाम लेकर भारत माता की बेटियों का अपमान किया जा रहा है. इन घटनाओं से भारत माता का सिर गर्व से उठेगा नहीं, उसकी आंखों में आंसू आ रहे होंगे. अभी भी वक्त है कि हम वक्त रहते वक्त बदल लें...

(लेखक कांग्रेस की नेता हैं. यह लेख उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर उन पर की गईं आपत्तिजनक टिप्पणियों के जवाब में लिखा है.)
(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)