Bois Locker Room केस सिर्फ घटना नहीं बल्कि एक मुनादी है, जिसे हम सबको सुनने की जरूरत है

जब प्राइवेट ग्रुप में की जाने वाली ये अश्लील बातें पब्लिक हो गईं तो हल्ला मच गया. दिल्ली महिला आयोग ने भी तुरंत कारवाई करने की मांग करते हुए दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिख डाली. बिना ये जाने-समझे की कारवाई का अंजाम क्या होगा.

Bois Locker Room केस सिर्फ घटना नहीं बल्कि एक मुनादी है, जिसे हम सबको सुनने की जरूरत है

Bois Locker Roon ग्रुप पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है. वजह है स्कूल-कॉलेज जाने वाले लड़कों की इंस्टाग्राम पर अश्लील बातें. इस चर्चा ने आज के समय में स्कूल-कॉलेज जाने वाले हर बच्चे और उनके माता-पिता को परेशान कर रखा है.

जब प्राइवेट ग्रुप में की जाने वाली ये अश्लील बातें पब्लिक हो गईं तो हल्ला मच गया. दिल्ली महिला आयोग ने भी तुरंत कारवाई करने की मांग करते हुए दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिख डाली. बिना ये जाने-समझे की कारवाई का अंजाम क्या होगा. मामला तूल पकड़ता इससे पहले ही दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने खुद संज्ञान लेते हुए IT की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया.

पुलिस ने जांच शुरू की तो पता लगा कि कहानी कुछ और ही है. उधर, सोशल मीडिया पर चल रही इसी तरह की बातों को देखकर एक लड़की ने गुरुग्राम में रहने वाले एक लड़के पर दो साल पहले अश्लील हरकत करने का आरोप लगा दिया. यानी Meetoo Part 2, ये देखते ही सोशल मीडिया पर बिना किसी सबूत के सभी उस लड़के के खिलाफ लिखने लगे. इसका असर ये हुआ कि 17 साल के उस लड़के पर मानसिक दबाव इतना बना कि उसने अपने घर की 11वी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली.

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इधर, पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, मामले की परतें खुलती जा रही थीं. जिसे अश्लील चैट और गैंग रेप करने जैसी घटना बताया जा रहा था, जांच में पता चला कि वो तो एक लड़की ने ही लड़का बन कर चरित्र जांचने के लिए लिखा था. बातचीत में फर्जी लड़के को असली लड़के ने अपने अच्छे चरित्र का सबूत देते हुए मना किया. साथ ही बाकी साथियों और खुद जिस लड़की ने फर्जी लड़का बन कर बात की थी उसको सावधान किया. बाकी लड़कों ने इस बात को फैला दिया और लड़की चुपचाप फर्जी लड़के की आईडी डिलिट कर बैठ गई.

लेकिन इस बीच दिल्ली पुलिस ने जांच करते करते 24 लड़कों से पुछताछ कर एक नाबालिग को हिरासत में लिया और एक को गिरफ्तार किया जिन पर आरोप था कि वो सोशल मीडिया पर ग्रुप बना लड़कियों के साथ बलात्कार करने जैसी बातें कर रहे थे.

लेकिन इस मामले की जांच ने सोशल मीडिया पर चलने वाली खोखली बहसों का सच एक बार फिर बेपर्दा कर दिया. सोच समझकर बनाया गया चैट का एक माहौल, जिसकी बुनियाद पर खड़ी हुई सुर्खियों की इमारत, बिना सबूत के आरोपों का शोर और उस शोर में दबी एक 17 साल के लड़के की खुदकुशी की चीख. क्या सही है क्या गलत? ये इस स्टेज पर कहना शायद जल्दबाजी होगी. लेकिन अगर इस मामले को बिना किसी चर्चा के यूहीं जाने दिया तो शायद देर हो जाएगी.

पहली बात- इस तरह की घटनाओं पर कानूनी कार्रवाई सिर्फ एक तकनीकी पहलू है. असल जरूरत इन मामलों को सामाजिक और पारिवारिक तरीके से देखने और समझने की है.

दूसरी बात- सोशल मीडिया एक ऐसी कंगारू कोर्ट है जो आरोपों के सही साबित होने से पहले ही सजा का एलान कर देता है और वो सजा खौफ, अविश्वास, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना के रास्ते होती हुई किसी निर्दोष की मौत तक का सफर तय कर सकती है.

सूचना क्रांति से लैस सोशल मीडिया के इस दौर में तमाम खुलेपन के बीच हमें अपनी सामाजिक और पारिवारिक जड़ों को और मजबूत करने की जरूरत है. Bois Locker Room ग्रुप मामला एक बार फिर इस बात की मुनादी कर रहा है. बेहतर होगा कि हम इस मुनादी को सुनें और उस पर अमल करें.

(जितेंद्र शर्मा ZEE NEWS के Editor (Crime & Investigation) हैं)

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)