आखिर वीगर मुसलमानों के साथ चीन क्यों अपना रहा बर्बर रवैया

चीन ने वीगरों पर लगाम कसने के लिए शिनच्यांग प्रांत में कई कैंप बनाए हैं जिनमें खबरों के अनुसार करीब दस लाख लोग बंदियों वाला जीवन जी रहे हैं. हालांकि चीन के इस कदम की पूरी दुनिया में आलोचना होती रही है. 

आखिर वीगर मुसलमानों के साथ चीन क्यों अपना रहा बर्बर रवैया

वीगर मुसलमानों के साथ चीन का बर्बर रवैया दुनियाभर के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. चीन के उत्तर-पश्चिमी स्वायत्त राज्य में वीगर मुसलमान एक हजार वर्ष से भी ज्यादा समय से रहते आए हैं. चीन के इस इलाके पर समय के अंतराल के साथ ही मंगोल, तिब्बती, तुर्की और चीनी लोगों ने शासन किया है. आज भी शिनच्यांग प्रांत के तारिम बेसिन और राजधानी उरुमुछी में वीगर मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती है. 

ऑटोमन साम्राज्य के दिनों में उनका आधिपत्य चीन के शिनच्यांग तक फैल गया था, जिसे वो अपनी भाषा में तुर्किस्तान कहते थे. ये वही दौर था जब इस इलाके में इस्लाम को फैलाया गया. वीगरों को लेकर चीन ने सख्त रवैया तब अपनाया जब 1949 में कम्युनिस्ट चीन का निर्माण हुआ. कई बार वीगर लोगों का विरोध विद्रोह में भी तब्दील हुआ जिसे चीन की तानाशाही सरकार ने सख्ती से बर्बरता पूर्वक कुचल डाला.

शिनच्यांग प्रांत की जनसंख्या पैटर्न को बदलना
वीगरों के ऊपर अपना प्रभुत्व बढ़ाने और उनके किसी भी विद्रोह को कुचलने के लिए चीन ने सबसे पहली जो योजना बनाई, वो थी विस्थापन की. चीन ने पूरे शिनच्यांग स्वायत्त प्रांत में हान जाति के चीनियों को एक सुनियोजित तरीके से बसाना शुरू किया. हान जाति की ये बसाहट इतनी सुनियोजित थी कि आज की तारीख़ में शिनच्यांग प्रांत में हान जाति बहुसंख्यक और अपने ही घर में वीगर लोग अल्पसंख्यक बन गए हैं.

वीगरों के लिए बनाए कई यंत्रणा शिविर
चीन ने वीगरों पर लगाम कसने के लिए शिनच्यांग प्रांत में कई कैंप बनाए हैं जिनमें खबरों के अनुसार करीब दस लाख लोग बंदियों वाला जीवन जी रहे हैं. हालांकि चीन के इस कदम की पूरी दुनिया में आलोचना होती रही है. कई
वैश्विक संस्थाओं ने भी इन घटनाओं पर चिंता जाहिर की है लेकिन चीन अपने घरेलू मामलों में किसी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को दरकिनार करता आया है. चीन ने अपने कई अधिकारी सिर्फ इस बात के लिए नियुक्त किया है कि वो विश्वभर के मीडिया के सवालों का जवाब देंगे.

चीन दुनिया को बताता आया है कि ये कैंप कंसंट्रेशन, कैंप नहीं बल्कि वीगर लोगों को पढ़ाने के लिए बनाए गए कैंप हैं. जिन स्कूलों में वो वीगरों को चीनी भाषा और संस्कृति के बारे में पढ़ाता है साथ ही उन्हें इस्लामी आतंकवाद से दूर रहने के तरीके भी सुझाता है. समय समय पर चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों के समूहों को चीन बुलाता है और कुछ ऐसे ही केन्द्रों में घुमाता है जहां पर वीगर मुसलमानों से उनकी मुलाकात करवाता है. ऐसा चीन इसलिए करता है जिससे बाहरी दुनिया को वो ये संदेश दे सके कि वीगरों पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जा रहा है बल्कि उन्हें चीनी सभ्यता में समाहित कर रहा है हालांकि सच्चाई इससे कोसों दूर है.

कजाकिस्तान और तुर्की से लीक होती हैं यंत्रणा शिविरों की खबरें
चीन के इन कैंपों और शिनच्यांग की असल खबर दुनिया को कजाकिस्तान और तुर्की से लगती है, जहां पर यहां से भागकर बचे हुए वीगर मुसलमान दुनिया को चीन का असली चेहरा दिखाते हैं. ऐसे ही कुछ लोगों ने बताया कि इन कैंपों में यंत्रणा शिविर भी बनाए गए हैं, जहां से कई दिनों तक लगातार चीखें सुनाई देती हैं. इसके अलावा, इन कैंपों में मानवाधिकारों की खुले आम धज्जियां उड़ाई जाती हैं. यंत्रणा देने के अलावा इन कैंपों या सुधार गृहों में जबरन मर्दों और औरतों की नसबंदी की जाती है. उनसे बंधुआ मजदूरी करवाई जाती है. 
 
वीगर महिलाओं का यौन शोषण
चीनी सरकार ने एक योजना चलाई है जिसे नाम दिया है 'पेयरअप एंड बिकम फैमिली' ( pair up and become family). यानि वीगर लोग साथ में रहें और परिवार बनाएं. इसके तहत कम्युनिस्ट पार्टी के हान जाति के चीनी पुरुष उन वीगर घरों में जाकर रहते हैं जिनके मर्द सुधार गृहों में कैद हैं. उनकी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता इन वीगर महिलाओं के साथ उनके घरों में जाकर रहते हैं. इसका मकसद ये है कि आने वाली नस्ल वीगर न होकर चीनी हान जाति की बने. कम्युनिस्ट कार्यकर्ता दिन भर इन महिलाओं और बच्चों के साथ रहकर उन्हें ये बताते हैं कि आपको चीनी भाषा सीखने और चीन के तौर-तरीके सीखने से क्या फायदा हो सकता है.   

चीन को इस्लाम फैलने का खतरा  
चीन को इस बात का खतरा है कि वीगर मुसलमानों के कारण चीन में इस्लाम और फिर इस्लामिक आतंकवाद फैल सकता है जिसे रोकने के लिए चीन हर जुगत का इस्तेमाल कर रहा है. इस नाम पर चीन वीगर मुसलमानों के साथ बर्बरता के साथ पेश आ रहा है और दुनियाभर के मानवाधिकारों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है. चीन का पूरा प्लान है कि वीगर मुसलमानों की आबादी को खत्म कर दिया जाए जिसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.

जब बात आती है, अपने घर में मानवाधिकारों के हनन की तो चीन किसी अंतरराष्ट्रीय कानूनों की परवाह नहीं करता, फिर चाहे वो मामला वीगर मुसलमानों का हो, फेलुंगॉन्ग का हो. थ्येनआन मेन चौराहे का हो या फिर हांगकांग में लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने का हो. जब मामला किसी दूसरे देश का होता है तो चीन हमेशा अपना दूसरा चेहरा दिखाता है लेकिन घर में उसके खाने के दांत और दिखाने के और हैं.

(डिस्क्लेमर: लेखक Zee News में असिस्टेंट एडिटर हैं. इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं.)