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आखिर क्यों तिहाड़ जेल जाने से डर रहे थे चिदंबरम?

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने तिहाड़ जाने से बचने के लिए लाख दाव पेंच चले, तमाम कानूनी हथकंडे अपनाए और हर मौजूद विकल्प को इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन तिहाड़ जेल जाने से नहीं बच पाए... सुप्रीम कोर्ट तक उनके दांव काम ना आए और तिहाड़ जेल उनका अस्थाई ठिकाना बन ही गया...

आखिर क्यों तिहाड़ जेल जाने से डर रहे थे चिदंबरम?

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने तिहाड़ जाने से बचने के लिए लाख दाव पेंच चले, तमाम कानूनी हथकंडे अपनाए और हर मौजूद विकल्प को इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन तिहाड़ जेल जाने से नहीं बच पाए... सुप्रीम कोर्ट तक उनके दांव काम ना आए और तिहाड़ जेल उनका अस्थाई ठिकाना बन ही गया...

पुरानी कहावत है कि पिंजरा चाहे सोने का हो लेकिन होता पिंजरा ही है और आपका स्टेटस चाहे जो भी हो और वीवीआईपी कैदियों को जेल में शानदार सुविधाएं मिलने के जितने भी आरोप लगते हों जेल आखिर जेल ही होती है...

अब फर्क देखिए... पी चिदंबरम को तिहाड़ जेल ले जाने के लिए दिल्ली पुलिस की बस में ले जाया गया, वो भी आम कैदियों की तरह और आम कैदियों के साथ... नॉन एसी बस... जी हां, नॉन एसी बस... जबकि सीबीआई की कस्टडी में कोर्ट आने जाने के लिए भी एसी गाड़ी में सुरक्षा कर्मियों के बीच हाथ हिलाते हुए, अंगूठा दिखाते हुए चलते थे... सुरक्षा कारणों का हवाला देकर और कोर्ट में गिड़गिड़ाने के बाद ही उन्हें अपने लिए अलग बैरक मिली और वेस्टर्न टॉयलेट कमोड मिला... जी हां.. कमोड के लिए भी उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी... और सुनिए... शाम को 7 बजे, जब बाहर लोग इवनिंग एंजॉय करने निकलते हैं, उस वक्त जेल में डिनर के बाद सोने का वक्त भी हो चुका होता है... और डिनर भी कैसा कि आप सुन लो तो खा ही ना पाओ... फिर सुबह 6 बजे चाय मिलती है.. बेड टी नहीं, बल्कि खुद जाकर लाइन में लग कर लेनी पड़ती है... अब वीवीआईपी को जेलों में सुविधाएं मिलने के जितने भी आरोप लगें तब भी समस्या तो बड़ी ही रहेगी... यानि सोने का पिंजरा भी पिंजरा ही रहेगा...

इंसान आज बेशक बुरे हालात में जी रहा हो लेकिन अगर भविष्य ज्यादा बुरा दिखता है तो वो चाहता है कि वर्तमान के कम बुरे हालात में ही रह ले... यही चिदंबरम के साथ भी हुआ है... सीबीआई की गिरफ्तारी से बचने के लिए भागते फिरे... कानून का हर पैंतरा आजमाया... सीबीआई ने फिर भी गिरफ्तार कर लिया... रिमांड से बचने की कोशिश की.. लेकिन लगातार सीबीआई के रिमांड पर रहे... रिमांड के दौरान उन्हें राहत ये मिली कि कोर्ट आने जाने के लिए एसी गाड़ी, सुरक्षा कारणों के चलते सीबीआई ऑफिस के एक सैल में फाइव स्टार सुविधाओं के साथ रहे, इसलिए वो चाहते थे कि जब तक गिरफ्तार रहें, सीबीआई की हिरासत में रहें और जमानत पाकर वहां से सीधे अपने घर ही जाएं, जेल नहीं...

अब समस्या उनके लिए ईडी यानि प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी में रहने से भी थी... लाख कोशिश की कि सीबीआई के बाद ईडी गिरफ्तार ना कर सके, लेकिन जब लगा कि तिहाड़ जेल जाना पड़ सकता है तो ईडी से गिरफ्तार होने के लिए सरेंडर की पेशकश कर दी... क्योंकि उन्हें मालूम था कि ईडी के पास कैदियों को रात में रखने कि व्यवस्था ही नहीं है और हो सकता है उन्हें बाकी मुल्ज़िमों की तरह रिमांड के दौरान रात किसी थाने के लॉकअप में बितानी पड़ जाए... इसलिए तिहाड़ जेल में रातें गुजारने की बजाय उन्हें लगा कि ईडी की हिरासत ज्यादा ठीक है...

अब कोर्ट ने उन्हें 19 सितंबर तक जेल भेजा है... उससे पहले हो सकता है कोर्ट उन्हें इस मामले में जमानत पर रिहा भी कर दे, लेकिन उनका अभी बाहर निकलना मुश्किल ही दिखाई दे रहा है... एक मामले में राहत मिली तो दूसरे मामले में ईडी गिरफ्तार करने के लिए तैयार बैठी है.. यानि ईडी ने गिरफ्तार किया तो एक बार फिर रिमांड और जेल जैसे काम फिर से हो सकते हैं...

यहां बताते चलें कि INXMedia केस में सीबीआई ने 21 अगस्त को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तार किया था, तब से वो रिमांड पर सीबीआई के पास थे और 5 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें जेल भेजा था..

लेखक- जितेंद्र शर्मा, जी न्‍यूज में Editor Crime हैं.

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)