ज़ी स्पेशल

Badminton: साइना, सिंधु, कश्यप, समीर का नेशनल चैंपियनशिप खेलना अच्छा संकेत

Badminton: साइना, सिंधु, कश्यप, समीर का नेशनल चैंपियनशिप खेलना अच्छा संकेत

इस बार नेशनल चैंपियनशिप में महिला सिंगल्स से पहले पुरुष सिंगल्स का मुकाबला हुआ. ऐसा पहली बार हुआ कि महिलाओं का फाइनल बाद में खेला गया. 

नामवर सिंह: हिन्दी आलोचना की वाचिक परंपरा के अंतिम शिखर

नामवर सिंह: हिन्दी आलोचना की वाचिक परंपरा के अंतिम शिखर

एक आलोचक के रूप में, नामवर सिंह की किताबों से अधिक उनके व्यक्तित्व का मूल्यांकन होता रहा है... उनके समूचे व्यक्तित्व में एक शैलीगत भव्यता के दर्शन होते हैं.

डॉ. दिलीप शाक्य | Feb 21, 2019, 02:20 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : बच्‍चों को अपने जैसा नहीं बनाना !

डियर जिंदगी : बच्‍चों को अपने जैसा नहीं बनाना !

जब त‍क हम बच्‍चों को संपत्ति की तरह प्रेम करना नहीं छोड़ते. हम उनके साथ जीवन का आनंद नहीं ले सकते.

दयाशंकर मिश्र | Jan 3, 2019, 09:28 AM IST
डियर जिंदगी : क्‍या कहना है, बच्‍चों से!

डियर जिंदगी : क्‍या कहना है, बच्‍चों से!

बच्‍चे केवल स्‍कूल में ही असफल होते हैं! स्‍कूल के सहारे बच्‍चों को मत छोडि़ए. उनका जीवन संवारने की जिम्‍मेदारी हमारी है, स्‍कूल की नहीं. बच्‍चा आपका है, स्‍कूल का नहीं. इसे बहुत अच्‍छी तरह समझना होगा.

दयाशंकर मिश्र | Jan 2, 2019, 09:52 AM IST
Opinion: मुझे गंगा के प्रति न प्यार है, न श्रद्धा बल्कि नफरत है

Opinion: मुझे गंगा के प्रति न प्यार है, न श्रद्धा बल्कि नफरत है

बलिया में मौजूद है हरिहरपुर गांव. इस गांव में रहने वाली रूपकली देवी गंगा से नफरत करती हैं क्योंकि वो अपने उजड़े हुए घर और परिवार की वजह गंगा को मानती है.

पंकज रामेंदु | Jan 1, 2019, 11:51 PM IST
किस्सा-ए-कंज्यूमर: शॉपिंग से डर नहीं लगता साहब! नकली सामान से लगता है

किस्सा-ए-कंज्यूमर: शॉपिंग से डर नहीं लगता साहब! नकली सामान से लगता है

नए कानून में ई-कॉमर्स कंपनियों को एग्रीगेटर या प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाले की जगह सर्विस प्रोवाइडर का दर्जा दिया गया है, लिहाजा गड़बड़ी होने पर सेलर के साथ ही उन पर भी कानून का हंटर चलेगा. नए कानून के तहत कंज्यूमर जिस इलाके में रहता है वहीं से शिकायत की ई-फाइलिंग कर सकेगा.

गिरिजेश कुमार | Jan 1, 2019, 11:00 PM IST
डियर जिंदगी: जोड़े रखना ‘मन के तार’!

डियर जिंदगी: जोड़े रखना ‘मन के तार’!

‘इस बरस आपके मन के तार उन सबसे जुड़े रहें, जिन्‍हें आप प्रेम करते हैं. जो आपको स्‍नेह करते हैं. उनकी आत्‍मीयता, स्‍नेहन के आंगन में आपको जिंदगी के सबरंग मिले!’

दयाशंकर मिश्र | Jan 1, 2019, 08:39 AM IST
डियर जिंदगी: हंसी एक तरह की निकटता है!

डियर जिंदगी: हंसी एक तरह की निकटता है!

अकेलापन अनायास आई अपरिचित चुनौती नहीं, बल्कि यह उस कमी से  उपजी है, जिसे हम अपनेपन के नाम से जानते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Dec 31, 2018, 08:21 AM IST
2018 : किसान सक्रियता के नाम यह साल

2018 : किसान सक्रियता के नाम यह साल

राजनीतिक विश्लेषक भी मान रहे हैं देश के तीन बड़े हिंदी भाषी राज्यों में बड़ी भूमिका किसान आधारित मुद्दों की रही. इसे किसानों के एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उबरने के तौर पर क्यों नहीं देखा जाना चाहिए.

सुविज्ञा जैन | Dec 29, 2018, 09:21 PM IST
निजता का अधिकार बनाम साइबर सुरक्षा की जंग

निजता का अधिकार बनाम साइबर सुरक्षा की जंग

अब सोशल मीडिया यूजर्स की निजता, इंटरमीडिटीयरिज की उपभोक्ताओं के प्रति दायित्व और व्यापार नीति तथा सरकारी दिशानिर्देशों का त्रिकोणीय चक्रव्यू सा हो गया है.

विनय जायसवाल | Dec 28, 2018, 09:05 PM IST
फिल्मों पर प्रतिबंध की राजनीति गलत, चाहे कोई भी लगाए...

फिल्मों पर प्रतिबंध की राजनीति गलत, चाहे कोई भी लगाए...

मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार को चिंता है कि कहीं 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' फिल्म से मनमोहन सिंह या कांग्रेस पार्टी की छवि खराब न हो जाए.

पीयूष बबेले | Dec 28, 2018, 02:45 PM IST
डियर ज़िंदगी: 'रुकना' कहां है!

डियर ज़िंदगी: 'रुकना' कहां है!

जो हमें पसंद है वह कहां छूट गया! उन चीजों के लिए हमारे पास समय नहीं है, जिनसे हमें ऊर्जा मिलती है. जो हमारे होने का मूल आधार हैं.

दयाशंकर मिश्र | Dec 28, 2018, 08:28 AM IST
किस्सा-ए-कंज्यूमर: रुकावट के लिए 'कंज़्यूमर कोर्ट' है

किस्सा-ए-कंज्यूमर: रुकावट के लिए 'कंज़्यूमर कोर्ट' है

अगर कोई कंपनी वारंटी पीरियड में सही सर्विस देने से इनकार करें तो तो कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में संकोच न करें. आपकी जीत दूसरे कंज्यूमर्स के लिए नज़ीर बनेगी.

गिरिजेश कुमार | Dec 28, 2018, 12:10 AM IST
मां के हाथों के स्वेटर में जो बात थी वो फैशनेबल कोट में कहां...

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जिनके पास मां 24 घंटे रहती है अमूनन उन बच्चों को उसके साथ होने की कद्र नहीं होती है, लेकिन घर से दूर रहने वाले लोग मां को कितना मिस करते हैं. ये वही जानते हैं और उनके सिवाय कोई भी इस दर्द को महसूस नहीं सकता है.

आशु दास | Dec 27, 2018, 05:21 PM IST
अगर गांधी को ढंग से समझते तो घाना में उनकी प्रतिमा न हटाते

अगर गांधी को ढंग से समझते तो घाना में उनकी प्रतिमा न हटाते

दिसंबर 2018 में घाना के एक विश्वविद्यालय से गांधी जी की मूर्ति हटाने की घटना का पूरा प्रामाणिक विश्लेषण...

चिन्मय मिश्र | Dec 27, 2018, 03:43 PM IST
डियर जिंदगी: ‘चुपके से’ कहां गया!

डियर जिंदगी: ‘चुपके से’ कहां गया!

अपने प्रेम संबंध के लिए भी हमने सोशल मीडिया को सबसे बड़ा मंच बना दिया. मन जुड़ने से लेकर ‘तार-टूटने’ तक की सूचना अब अभिभावक को भी यहीं मिलती है!

दयाशंकर मिश्र | Dec 27, 2018, 09:36 AM IST
डियर जिंदगी: पति, पत्‍नी और घर का काम!

डियर जिंदगी: पति, पत्‍नी और घर का काम!

दिमाग के अनसुलझे, कुलबुलाते सवाल जब उत्‍तर तक नहीं पहुंचते, तो वह हमारी धमनियों में दौड़ रही रक्‍त कणिकाओं में मिलकर जीवन ऊर्जा को सोखने के काम में जुट जाते हैं. 

दयाशंकर मिश्र | Dec 26, 2018, 08:35 AM IST
क्या दिल्ली के पास है अपना राज्य मानवाधिकार आयोग?

क्या दिल्ली के पास है अपना राज्य मानवाधिकार आयोग?

मई 2016 में इसी से सम्बंधित मामले के ऊपर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर ने यह टिप्पणी की थी कि जब बीस लाख के आसपास की संख्या वाले मणिपुर और त्रिपुरा जैसे राज्यों के पास अपने राज्य मानवाधिकार आयोग हो सकते हैं तो एक करोड़ से भी अधिक जनसँख्या वाले दिल्ली के पास क्यों नहीं? 

पवन चौरसिया | Dec 25, 2018, 05:10 PM IST
डियर जिंदगी : जो तुम्‍हें अपने करीब ले जाए...

डियर जिंदगी : जो तुम्‍हें अपने करीब ले जाए...

हम भूल रहे हैं कि मिट्टी का घड़ा, फ्रि‍ज नहीं. फ्रि‍ज का पानी लाख ठंडा हो, लेकिन उसमें मिट्टी का स्‍वाद नहीं. हमें अपनी मिट्टी के स्‍वाद को खजाने की तरह सहेजना है. इसमें ही जीवन की सुगंध है.

दयाशंकर मिश्र | Dec 25, 2018, 07:39 AM IST
डियर जिंदगी: हम जैसे हैं !

डियर जिंदगी: हम जैसे हैं !

इंटरनेट ने हमारी सोच, समझ, चेतना पर इस तरह कब्‍जा कर लिया है कि सहज बुद्धि, सोच, चिंतन ‘बेघर’ हो गए.

दयाशंकर मिश्र | Dec 24, 2018, 09:45 AM IST
मध्यप्रदेशः स्थानीय निकायों की राजनीति महत्वहीन क्यों है?

मध्यप्रदेशः स्थानीय निकायों की राजनीति महत्वहीन क्यों है?

विधानसभा-2018 में मुख्य रूप से राज्य स्तर की राजनीति का अहसास हमें होता है, किन्तु 15 साल सत्ता रहने के बाद भी भाजपा ने जिस तरह से अपनी उपस्थिति को बरकरार रखा और बराबरी की टक्कर दी, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस की जमीनी ताकत अभी बहुत कमज़ोर है. 

सचिन कुमार जैन | Dec 23, 2018, 02:14 PM IST
बिरजू और शंभू को ‘हल’ दीजिए

बिरजू और शंभू को ‘हल’ दीजिए

जिस मल-मूत्र को पहले खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता था वो अब शहरो में पानी के साथ बहा दिया जाता है. हमारे मल में कार्बन की भरमार होती है और ऐसे जीवाणुओं की भी जो इस कार्बन को पचा कर मिट्टी के लायक बना सके. 

पंकज रामेंदु | Dec 23, 2018, 10:52 AM IST