ज़ी स्पेशल

G-20 सम्मेलन में जवाबदेही तय की जा सकती थी, लेकिन ये मौका हमने हाथ से जाने दिया

G-20 सम्मेलन में जवाबदेही तय की जा सकती थी, लेकिन ये मौका हमने हाथ से जाने दिया

चीन जो वैश्विक संकट का​ निर्यातक रहा है, उसे एक मंच दिया गया जिससे वो ये बता सके कि पूरी दुनिया को इस वक्त क्या करना चाहिए. 

WION | Mar 28, 2020, 01:23 PM IST
#NirbhayaNyayDiwas: निर्भया के आखिरी शब्द...उन दरिंदों को मत छोड़ना, मां ने गांठ बांध ली

#NirbhayaNyayDiwas: निर्भया के आखिरी शब्द...उन दरिंदों को मत छोड़ना, मां ने गांठ बांध ली

हमें अंदाजा हो रहा था कि यह खबर देश को बदल देगी और आपने सड़कों पर देखा होगा कि इस खबर ने किस तरह देश को बदलकर रख दिया. 

पूजा मक्कड़ | Mar 20, 2020, 12:41 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

ज़माने ज़माने की बात

ज़माने ज़माने की बात

आज़ादी की क़ीमत बड़ी महंगी पड़ रही थी, सारा जोश, सारा उत्साह धराशायी हुआ जाता था जिसमें मेरे गाँव के वाशिन्दे शामिल थे. गांव एक जाति और एक धर्म से बंधा नहीं होता. मेरे गांव में भी सातों जातियां और हिन्दू तथा मुसलमान नाम के धर्म थे. 

मैत्रेयी पुष्पा | Jan 21, 2019, 04:20 PM IST
डियर जिंदगी: बच्‍चों से मत कहिए, मुझसे बुरा कोई न होगा!

डियर जिंदगी: बच्‍चों से मत कहिए, मुझसे बुरा कोई न होगा!

परीक्षा के कठिन मौसम में बच्‍चे बहुत अधिक तनाव में हैं. हमें सजग, सतर्क और आत्‍मीयता से अपनी भू‍मिका निभाने की जरूरत है. हमारा कोई भी सपना बच्‍चों के जीवन से बड़ा नहीं!

दयाशंकर मिश्र | Jan 21, 2019, 08:45 AM IST
दरबार में राग अभी ज़ारी हैं...

दरबार में राग अभी ज़ारी हैं...

विडंबना है कि पचास बरस से हम दरबार के अन्तःपुर से वाकिफ़ हो रहे हैं लेकिन नित नए दरबारों की कैद में अपने निजी स्वार्थ पूरे कर हम दरबारों के प्रभुत्त्व के विरुद्ध मुखर नहीं हो सके. 

मिथलेश शरण चौबे | Jan 18, 2019, 01:36 PM IST
किस्सा-ए-कंज्यूमर : एयरलाइन सताए तो क्या है उपाय?

किस्सा-ए-कंज्यूमर : एयरलाइन सताए तो क्या है उपाय?

सौ बात की एक बात समझ लीजिए- अगर आपके पास कन्फर्म्ड टिकट है, आईडी प्रूफ है और आप एयरलाइंस के बताए वक्त पर चेक इन कर चुके हैं तो आपको प्लेन में बोर्ड करने से कोई नहीं रोक सकता. 

गिरिजेश कुमार | Jan 18, 2019, 12:52 PM IST
डियर जिंदगी: अगर तुम न होते!

डियर जिंदगी: अगर तुम न होते!

तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, सगाई के बाद शादी टूटने जैसी स्थितियों के लिए समाज अब तक तैयार नहीं है. सिनेमा में यह रंग खूब भाते हैं, लेकिन जैसे ही हमारे सामने आते हैं, हम असहज हो जाते हैं!

 

दयाशंकर मिश्र | Jan 18, 2019, 09:39 AM IST
चंदा मामा बहुत दूर के

चंदा मामा बहुत दूर के

चंदामामा वो किताब थी जिसने ‘इस कहानी से तुम्हें क्या शिक्षा मिलती है’ जैसे सवालों के सही मायने स्थापित किये थे लेकिन विडंबना देखिए अखबार में इसी दुर्लभ साहित्य को लेकर खबर छपती है कि उनके मालिक जेल में है और चंदामामा बिकने के लिए तैयार है. 

पंकज रामेंदु | Jan 17, 2019, 07:14 PM IST
डियर जिंदगी: हम कैसे बदलेंगे!

डियर जिंदगी: हम कैसे बदलेंगे!

परंपरा, ‘ऐसा होता आया है’ के आधार पर जब तक हम चीज़ों को बुनते रहेंगे, वह अपने होने के अर्थ तक नहीं पहुंच सकतीं.

दयाशंकर मिश्र | Jan 17, 2019, 09:39 AM IST
भारत में ज्ञानशील समाज के विकास में बढ़ती ऑनलाइन शिक्षा की भूमिका

भारत में ज्ञानशील समाज के विकास में बढ़ती ऑनलाइन शिक्षा की भूमिका

दुनियाभर में ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, रूस और चीन समेत तमाम देशों में शिक्षा के बाजार मेंऑनलाइन कॉलेज और पाठ्यक्रम की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है.

विनय जायसवाल | Jan 16, 2019, 12:41 PM IST
डियर जिंदगी: किससे डरते हैं !

डियर जिंदगी: किससे डरते हैं !

अतीत , करियर, रिश्‍ते अब तक कैसे भी रहे हों, लेकिन अब भी जो बचा है, वह अनमोल है. बची जिंदगी को सार्थक, खुशनुमा बनाना हमारे बस में है. यह हमसे कोई नहीं छीन सकता!

दयाशंकर मिश्र | Jan 16, 2019, 08:20 AM IST
किस्सा-ए-कंज्यूमर : अगली बार कैरी बैग का पैसा मत देना!

किस्सा-ए-कंज्यूमर : अगली बार कैरी बैग का पैसा मत देना!

कंज्यूमर फोरम में लाइफस्टाइल इंटरनेशनल ने कहा कि सरकार की तरफ से पॉलिथीन बैग पर रोक लग चुकी हैं, इसलिए उन्हें पेपर वाले बैग खरीदने पड़ रहे हैं.

गिरिजेश कुमार | Jan 15, 2019, 02:50 PM IST
डियर जिंदगी: दोनों का सही होना!

डियर जिंदगी: दोनों का सही होना!

एक-दूसरे के लिए ‘जगह’ निकाल पाना इतना मुश्किल भी नहीं. मतभेद के साथ सम्‍मान की कला जिंदगी के सुख का सबसे बड़ा आधार है.

दयाशंकर मिश्र | Jan 15, 2019, 09:11 AM IST
एमपी के आंगन में बच्ची की लाश चीख रही थी !

एमपी के आंगन में बच्ची की लाश चीख रही थी !

मध्यप्रदेश में 42 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना ​चिटनीस दावा करती रही हैं कि उन्होंने कुपोषण पर खूब काम किया.

डियर जिंदगी: अतीत के धागे!

डियर जिंदगी: अतीत के धागे!

दूसरों की जिंदगी आसान बनाने में जितनी मदद कर सकते हैं, करें. क्‍योंकि अपनी जिंदगी आसान बनाने का यही सबसे सरल तरीका है.
 

दयाशंकर मिश्र | Jan 14, 2019, 10:11 AM IST
'उरी' जैसी फिल्में बननी चाहिए... न पैसों की बर्बादी, न समय की

'उरी' जैसी फिल्में बननी चाहिए... न पैसों की बर्बादी, न समय की

'उरी: द सर्जिकल स्‍ट्राइक' एक ऐसी फिल्म है, जो आपके अंदर जोश और जुनून भर देती है. आपको अपने देश के प्रति प्यार और उसके सम्मान के लिए प्रेरित करती है. 

प्रतीक शेखर | Jan 12, 2019, 04:31 PM IST
किस्सा-ए-कंज्यूमर: कंज्यूमर की शिकायत, बिल्डर की शामत

किस्सा-ए-कंज्यूमर: कंज्यूमर की शिकायत, बिल्डर की शामत

बिल्डर के अत्याचार के शिकार एक ढूंढो हज़ार मिलते हैं. खरीदारों की शिकायत होती थी कि रियल एस्टेट के ज्यादातर नियम कायदे बिल्डर के हक में बने हैं. 

गिरिजेश कुमार | Jan 11, 2019, 02:50 PM IST
डियर जिंदगी : बच्‍चों की गारंटी कौन लेगा!

डियर जिंदगी : बच्‍चों की गारंटी कौन लेगा!

बच्‍चों के जन्‍म लेते ही हम किसी बड़े स्‍कूल की तलाश में जुट जाते हैं. उसके बाद प्रवेश होते ही मानते हैं कि हमारा काम पूरा हुआ.

दयाशंकर मिश्र | Jan 11, 2019, 10:05 AM IST
Opinion: चेतेश्वर पुजारा की फॉर्म ने छिपा ली बाकी बल्लेबाजों की कमजोरी

Opinion: चेतेश्वर पुजारा की फॉर्म ने छिपा ली बाकी बल्लेबाजों की कमजोरी

अगर ऑस्ट्रेलिया की टीम कमजोर है, तो यह उनकी जिम्मेदारी है. हम अपनी कामयाबी का जश्न मनाने में हिचक क्यों दिखाएं? 

सुशील दोषी | Jan 10, 2019, 10:42 PM IST
किस्सा-ए-कंज्यूमर: जब कंज्यूमर की कसम ने तोड़ा कंपनी का गुरूर

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NCDRC ने टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी और डीलर कॉनकॉर्ड मोटर्स को आदेश दिया कि वो ग्राहक को पूरे 4,58,853 रुपए लौटाएं. साथ ही मुकदमा लड़ने के मुआवजे के तौर पर 10,000 और चुकाएं.

गिरिजेश कुमार | Jan 10, 2019, 03:17 PM IST
डियर जिंदगी: सुसाइड के भंवर से बचे बच्‍चे की चिट्ठी!

डियर जिंदगी: सुसाइड के भंवर से बचे बच्‍चे की चिट्ठी!

जिंदगी किसी भी अनुभव से बड़ी है. जिंदगी है तो अनुभव हैं. इसलिए जिंदगी का साथ देना है. हर मुश्किल में. इसे अकेला नहीं छोड़ना. ‘डियर जिंदगी’ जीवन के प्रति शुभकामना है. इसे हमेशा अपने पास महसूस कीजिए!

दयाशंकर मिश्र | Jan 10, 2019, 09:21 AM IST
बिना अनुदान, कैसे होगा ‘जय अनुसंधान’?

बिना अनुदान, कैसे होगा ‘जय अनुसंधान’?

आज देश के वही शोधार्थी और विज्ञान/अनुसन्धान के सैनिक छात्रवृत्ति/फेलोशिप और इससे जुड़ी अन्य मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं. ऐसा करने वालों में देश के लगभग सभी नामी शोध-संस्थान, उच्च शिक्षा संस्थान एवं विश्वविद्यालय के शोधार्थी शामिल हैं फिर चाहे वो आइआइटी, एनआईटी, आइआइएससी, एम्स, डीआरडीओ जैसे तकनीकी संस्थान के हों या डीयू, जेएनयू, बीएचयू, ऐएमयू जैसे विश्वविद्यालयों के.

पवन चौरसिया | Jan 9, 2019, 07:50 PM IST