ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

बच्‍चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाते ही माता-पिता में खालीपन देखा जा रहा है. जैसे किसी ने उनकी मुस्‍कान गिरवी रख दी हो कि खुश रहना मना है.

दयाशंकर मिश्र | Feb 15, 2019, 08:52 AM IST
प्रेम और प्रेम दिवस!

प्रेम और प्रेम दिवस!

आज के लोग कहते पाए जाते हैं कि तबके प्रेमियों में साहस नहीं होता था. बेशक Kiss और Hug का साहस नहीं होता था क्योंकि प्रेमिका के लिए दिल में सम्मान होता था.

मैत्रेयी पुष्पा | Feb 14, 2019, 03:18 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: अकेलेपन की सुरंग और ‘ऑक्‍सीजन’!

डियर जिंदगी: अकेलेपन की सुरंग और ‘ऑक्‍सीजन’!

हरियाली के बीच मन में उदारता, दूसरों की सहायता की भावना बढ़ने के साथ ब्‍लड-प्रेशर, अवसाद से लड़ने की शक्ति मिलती है. 

दयाशंकर मिश्र | Nov 12, 2018, 08:18 AM IST
चुनावी रण में नेताओं से समझिए राजनीतिक संबंधों और कसमे-वादों का कितना मोल है!

चुनावी रण में नेताओं से समझिए राजनीतिक संबंधों और कसमे-वादों का कितना मोल है!

40-50 साल तक पार्टी को 'मां' कहने वाले लोग टिकट कटते ही नई 'मां' के गले लग रहे हैं. अगर एक लाइन में कहना हो, तो कह सकते है कि एक सुपरहिट हिंदी फिल्म बनाने के लिए जो कुछ चाहिए, वह सब मध्य प्रदेश के चुनावी रण में है.

संतोष मानव | Nov 9, 2018, 10:11 PM IST
Opinion: प्रदूषण का पैमाना ही छोटा पड़ा, भुक्तभोगी अन्य देशों के उपाय हो सकते हैं सहायक

Opinion: प्रदूषण का पैमाना ही छोटा पड़ा, भुक्तभोगी अन्य देशों के उपाय हो सकते हैं सहायक

विश्व के सभी देशों ने सबसे पहले आर्थिक वृद्धि और विकास की दर के आंकड़े की चिंता को पीछे छोड़ा तब वहां प्रदूषण से निपटने के उपाय कारगर हो पाए. आर्थिक विकास और सतत विकास के फ़र्क को समझे बिना प्रदूषण से निपटना हमेशा मुश्किल रहेगा.

सुविज्ञा जैन | Nov 9, 2018, 12:57 PM IST
डियर जिंदगी : दीपावली की तीन कहानियां और बच्‍चे…

डियर जिंदगी : दीपावली की तीन कहानियां और बच्‍चे…

असल में अंतर एक-एक कदम से ही पड़ता है! हम सब मिलकर ही दुनिया को बेहतर, बदतर बनाते हैं. हमारी हवा, पानी जैसे भी हैं, सबमें हमारी भूमिका है!

दयाशंकर मिश्र | Nov 9, 2018, 08:24 AM IST
गोरों के सामने अब भी सिर उठाने की हिम्मत नहीं....

गोरों के सामने अब भी सिर उठाने की हिम्मत नहीं....

बात देश को ऑलंपिक में 8 स्वर्ण पदक दिलाने वाले हॉकी खेल की हो तो बरबस ही खेलप्रेमी सोचने पर मजबूर हो जाते हैं. 

डियर जिंदगी : ऐसे ‘दीपक’ जलाएं…

डियर जिंदगी : ऐसे ‘दीपक’ जलाएं…

जिंदगी को रास्‍ता बनाना आता है, बस आप नाविक की तरह तूफान में पतवार थामे रहें.

दयाशंकर मिश्र | Nov 7, 2018, 10:05 AM IST
डियर जिंदगी : कितने ‘दीये’ नए!

डियर जिंदगी : कितने ‘दीये’ नए!

बच्‍चों की परवरिश, संस्‍कार जरूरी हैं, लेकिन यह काम उनके मन की कोमलता, सुंदरता, उदारता की कीमत पर नहीं होना चाहिए. ये सबसे अनमोल गुण हैं. बच्‍चों की परिवरिश में उनके साथ होने वाली हिंसा, उन पर थोपी जाने वाली जिद, जिंदगी के कुछ ऐसे अंधेरे हैं, जो हर दिवाली के साथ गहराते जा रहे हैं.

दयाशंकर मिश्र | Nov 6, 2018, 08:02 AM IST
21वीं सदी में भी कुपोषित बचपन से कुपोषित लोकतंत्र

21वीं सदी में भी कुपोषित बचपन से कुपोषित लोकतंत्र

आज जब हम विधानसभा और लोकसभा चुनावों की प्रक्रिया में प्रवेश कर रहे हैं, तब राजनीतिक दलों, विश्लेषकों से रणनीतिकारों से यह स्वाभाविक अपेक्षा की जाती है कि वे बच्चों के कुपोषण को विकास और बेहतर भविष्य के लिए एक अनिवार्य राजनीतिक-आर्थिक मुद्दे के रूप में इसे केंद्र में रहें

सचिन कुमार जैन | Nov 5, 2018, 07:19 PM IST
Pollution : खुद को बचाइए, धरती कहीं नहीं जा रही...

Pollution : खुद को बचाइए, धरती कहीं नहीं जा रही...

हमने अपनी कब्र खोदनी शुरू कर दी है. हम अपने ही पैदा किए हुए जहर में घुट-घुट कर मर जाएंगे.

पंकज रामेंदु | Nov 5, 2018, 01:49 PM IST
डियर जिंदगी: दूसरे के हिस्‍से का ‘उजाला’!

डियर जिंदगी: दूसरे के हिस्‍से का ‘उजाला’!

कभी-कभी अनजाने ही हम कठोर, अनुदार और हिंसक दुनिया गढ़ने में सहभागी होते जाते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Nov 5, 2018, 08:19 AM IST
डियर जिंदगी: जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे...

डियर जिंदगी: जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे...

दुनिया छोटी कोशिश के मरहम का नाम है, इससे ही जिंदगी को रास्‍ते मिलते हैं. 

दयाशंकर मिश्र | Nov 2, 2018, 09:01 AM IST
क्या खबरें पत्रकारों के खून से लिखी जाएंगी

क्या खबरें पत्रकारों के खून से लिखी जाएंगी

यह पत्रकार ही होते हैं जो बहुमत की लानत-मलामत झेलने के बाद भी नक्सली और आतंकवादियों तक के मानवाधिकार की बात करते हैं. उनका पेशा ही ऐसा है कि उन्हें अंतत: मानवता के साथ खड़ा होना पड़ता है. 

पीयूष बबेले | Nov 1, 2018, 05:39 PM IST
डियर जिंदगी : उसके ‘जैसा’ कुछ नहीं होता!

डियर जिंदगी : उसके ‘जैसा’ कुछ नहीं होता!

कोई किसी के जैसा नहीं होता! हम किसी का पूरा सच नहीं जानते, इसलिए उसके जैसे अरमान में घुलते रहते हैं, यह जीवन के प्रति सबसे बड़ा छल है.
 

दयाशंकर मिश्र | Nov 1, 2018, 11:44 AM IST
राम मंदिर, सबरीमाला और पटाखे- विवादों के घेरे में सुप्रीम कोर्ट

राम मंदिर, सबरीमाला और पटाखे- विवादों के घेरे में सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली में सिर्फ ग्रीन पटाखे, यानी पटाखों पर बैन- सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते के आदेश की व्याख्या करते हुए यह कहा है कि दिल्ली में सिर्फ ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल हो सकेगा. 

विराग गुप्ता | Oct 31, 2018, 06:38 PM IST
डियर जिंदगी:  गैस चैंबर; बच्‍चे आपके हैं, सरकार और स्‍कूल के नहीं!

डियर जिंदगी: गैस चैंबर; बच्‍चे आपके हैं, सरकार और स्‍कूल के नहीं!

प्रदूषण के नाम पर न तो वोट कटते हैं. न ही साफ हवा होने से अधिक मिलते हैं. इसलिए हवा, पानी किसी की चिंता में शामिल नहीं. पराली जलाने से रोकने में ‘खतरा’ है, इसलिए प्रदूषण की जगह पराली पर ध्‍यान दिया जा रहा है!

दयाशंकर मिश्र | Oct 31, 2018, 10:58 AM IST
नए उत्कर्ष का आलोक

नए उत्कर्ष का आलोक

आलोक ने संकीर्णताओं और ख़ानाबंदियों से खु़द को आज़ाद रखा है. यही वजह है कि छोटे शहरों, कस्बों से लेकर महानगरों के संघर्षशील रंगकर्मियों और मुंबई की मंडी तक उनका राब्ता रहा है.

विनय उपाध्याय | Oct 30, 2018, 07:42 PM IST
डियर जिंदगी : रो लो, मन हल्‍का हो जाएगा!

डियर जिंदगी : रो लो, मन हल्‍का हो जाएगा!

हमारे यहां तो रोना सहज अभिव्‍यक्ति रही है. रोने से मन हल्‍का होता है. ऐसा हम बचपन से सुनते आए हैं, लेकिन कुछ अधिक शहरी होते ही, हमारे मिजाज में कठोरता ऐसी घुली कि हंसना तो टीवी, मोबाइल के सहारे बढ़ गया, लेकिन रोकर मन के मैल को साफ करने का चलन छूट गया है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 30, 2018, 10:43 AM IST
चंद महीने दूर वर्ल्डकप से पहले भारी न पड़ जाए धोनी की अनदेखी

चंद महीने दूर वर्ल्डकप से पहले भारी न पड़ जाए धोनी की अनदेखी

दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी एबी डिविलियर्स ने हाल ही में धोनी की अदभुत क्षमता का बखान करते हुए कहा था कि अगर धोनी व्हीलचेयर पर हों तो भी मैं उन्हें अपनी टीम में शामिल करूंगा.

सुशील दोषी | Oct 30, 2018, 12:05 AM IST
कैलाश सत्यार्थी आरएसएस के कार्यक्रम में गए, तो बुरा क्या है

कैलाश सत्यार्थी आरएसएस के कार्यक्रम में गए, तो बुरा क्या है

मैंने गौर किया है कि वे हर उस मंच पर जाते हैं, जहां से बच्चों का हित सधता हो. पिछले साल उन्होंने बच्चों की ट्रैफिकिंग और यौन शोषण के खिलाफ देशव्यापी भारत यात्रा का आयोजन किया था.

देवेंद्र बराल | Oct 29, 2018, 06:59 PM IST
गांधी के विरोध की एक ही वजह है कि वे सबके हैं किसी एक के नहीं

गांधी के विरोध की एक ही वजह है कि वे सबके हैं किसी एक के नहीं

आज सारी ओर हिंसा का बोलबाला दिखाई पड़ रहा है. बहुत से लोगों का मानना है कि अहिंसा का विचार आज कमोवेश अप्रासांगिक हो गया है.

चिन्मय मिश्र | Oct 29, 2018, 06:06 PM IST