ओलंपिक चैंपियन की एक न चली, हरियाणवी बॉक्सर ने पिछला हिसाब भी किया चुकता

एशियाई खेलों में सबसे पहले स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज पदम बहादुर माल थे जिन्होंने 1962 में यह कारनामा किया था.

ओलंपिक चैंपियन की एक न चली, हरियाणवी बॉक्सर ने पिछला हिसाब भी किया चुकता
एशियाई चैंपियन दुसमातोव को हराकर एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले ओवरऑल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने अमित. (PHOTO: PTI)

जकार्ता: अमित पांघल (49 किग्रा) शनिवार को यहां मौजूदा ओलंपिक और एशियाई चैंपियन हसनब्वाय दुसमातोव को हराकर एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले ओवरऑल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने.

सेना के 22 वर्षीय अमित फाइनल में पहुंचने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज थे. उन्होंने प्रबल दावेदार दुसमातोव को 3-2 से हराया. उन्होंने इस तरह से पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान के इस मुक्केबाज से मिली हार का बदला भी चुकता कर दिया. भारत ने इस तरह से एशियाई खेलों की मुक्केबाजी प्रतियोगिता में एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज जीतकर अपने अभियान का अंत किया. विकास कृष्ण ने मिडिलवेट में कांसे का तमगा जीता था.

एशियाई खेलों में पहली बार भाग ले रहे अमित ने अपने तकनीकी कौशल का शानदार नमूना पेश किया. उज्बेक के मुक्केबाज का अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में विशिष्ट स्थान है लेकिन अमित के शानदार रक्षण के सामने उनकी एक नहीं चली. दुसमातोव ने पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीता था.

Asian Games 2018 : बॉक्सिंग में अमित पंघल ने जीता गोल्ड, भारत ने सबसे अधिक मेडल जीतने का रिकॉर्ड तोड़ा

हरियाणा के मुक्केबाज अमित ने हैम्बर्ग में करीबी अंतर से मिली जीत से सबक लेकर अपने से थोड़ा छोटे कद के प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सही समय पर सही पंच लगाये. जवाबी हमले के लिए मशहूर उज्बेक के बाएं हाथ का मुक्केबाज भारतीय खिलाड़ी को अपनी चाल में नहीं फंसा पाया जिससे वह काफी परेशान दिख रहा था.

पिछली हार का बदला किया चुकता
अमित ने बाद में कहा, ‘‘मैं इससे पहले उससे हार गया था इसलिए मैंने बदला चुकता कर दिया. कोच सैंटियागो (नीवा) और अन्य कोच ने मुझे अच्छी तरह से तैयार किया था. सेमीफाइनल में मैं पहले राउंड में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया था लेकिन यहां मैंने कोई गलती नहीं की.’’ उन्होंने कहा कि कोच ने मुझसे जवाबी हमले करने को कहा. इंग्लैंड में अभ्यास और भारत में शिविर लगाने से मदद मिली. मैंने इन दोनों स्थानों पर बायें हाथ के मुक्केबाजों के साथ अभ्यास किया था. मैं जानता था कि अपर कट से कैसे फायदे में रहना है.’’

करियर की बड़ी जीत
अमित के करियर की यह सबसे बड़ी जीत है. उन्होंने पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज पदक जीता था. विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले इस मुक्केबाज ने राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर पदक जीता था. इससे पहले उन्होंने इंडिया ओपन और बुल्गारिया में प्रतिष्ठित स्ट्रैन्दजा मेमोरियल में गोल्ड पदक जीते थे.

मेरीकॉम के बाद अमित का नाम
भारत की तरफ से एशियाई खेलों में गोल्ड पदक जीतने वाले आखिरी मुक्केबाज विजेंदर सिंह और विकास कृष्णन थे जिन्होंने ग्वांग्जू एशियाई खेल 2010 में सोने के तमगे हासिल किये थे. विकास (75 किग्रा) को इस बार ब्रॉन्ज पदक से संतोष करना पड़ा. चार साल पहले 2014 के खेलों में एमसी मेरीकॉम गोल्ड पदक जीतने वाली अकेली मुक्केबाज थीं.

इतिहास इनके नाम
एशियाई खेलों में सबसे पहले गोल्ड पदक जीतने वाले मुक्केबाज पदम बहादुर माल थे जिन्होंने 1962 में यह कारनामा किया था. हवा सिंह एकमात्र भारतीय मुक्केबाज हैं जिन्होंने लगातार दो एशियाई खेलों 1966 और 1970 में गोल्ड पदक जीते थे.