एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले अमित पंघल अब टोक्यो ओलंपिक के लिए हैं तैयार

अमित पंघल ने यह भी कहा कि उनकी तेजी उनका सबसे बड़ा हथियार है. इसका उपयोग वह अधिक वजन वाले मुक्केबाज के खिलाफ भी करेंगे. 

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले अमित पंघल अब टोक्यो ओलंपिक के लिए हैं तैयार
टोक्यो जाने के लिए हर चुनौती का सामना करूंगा : अमित पंघल (PIC : PTI)

नई दिल्ली: ओलम्पिक चैम्पियन को हराकर 18वें एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाले भारत के युवा मुक्केबाज अमित पंघल की नजरें अब टोक्यो ओलम्पिक पर हैं. अमित ने कहा है कि 2020 टोक्यो ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करने हेतु वह हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं. टोक्यो का टिकट हासिल करने के लिए अमित को भारवर्ग में बदलाव करना होगा और यह उनके लिए एक तरह की चुनौती बन गई है. अमित ने जकार्ता में 49 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड जीता था लेकिन टोक्यो ओलम्पिक में यह भारवर्ग शामिल नहीं है, लिहाजा वह 52 किलोग्राम भारवर्ग में ओलम्पिक टिकट हासिल करने का प्रयास करेंगे.

अमित पंघल ने कहा, "ओलम्पिक में पदक जीतने की राह बहुत मुश्किल होगी क्योंकि मैं 49 किग्रा को ओलम्पिक से हटा दिया गया है. इसके कारण मुझे 52 किग्रा वर्ग के लिए टिकट हासिल करना होगा."

अमित पंघलने कहा, "भारवर्ग बदलने के कारण मुझे अपनी पावर पर काम करना होगा. नए भारवर्ग में मुक्केबाज अधिक ताकतवर होते हैं. उनकी लंबाई भी अधिक होती है, जिसके कारण वह दूर तक पंच मार सकते हैं. मुझे अपनी ताकत पर इसलिए भी काम करना होगा क्योंकि तीन राउंड तक अधिक वजन वाले मुक्केबाज का मुकाबला करना मुश्किल होता है."

अमित की तेजी है उनका हथियार
अमित ने यह भी कहा कि उनकी तेजी उनका सबसे बड़ा हथियार है. इसका उपयोग वह अधिक वजन वाले मुक्केबाज के खिलाफ भी करेंगे. पंघल ने कहा, "मेरी कोशिश यही रहेगी कि नए भारवर्ग में भी मेरी तेजी पहले जैसी रहे. भले ही वजन बढ़ जाए लेकिन मैं तेज रहूं और अपनी ताकत को बरकरार रखूं. 52 किग्रा में मेरी तेजी ही मेरी सबसे बड़ी खासियत होगी और इसके अलावा मैं अपने आक्रामक रवैये को बरकरार रखना चाहूंगा."

अमित ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियन को हराकर जीता था गोल्ड
पिछले वर्ष हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में अमित को अनुभवी मुक्केबाज हसनबॉय दुसामाटोव के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में हारकर टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा था और उन्होंने माना कि एशियाई खेलों के फाइनल से पहले भी वह दबाव महसूस कर रहे थे. अमित ने इसी उज्बेक मुक्केबाज को हराकर जकार्ता में गोल्ड जीता था. 

अमित ने कहा, "मैं पहले भी दुसामाटोव से वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में हार चुका था और हमारे देश के सभी मुक्केबाज हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो चुके थे. मैं अकेला बचा था इसलिए मैं दबाव महसूस कर रहा था. मुझे हालांकि, यह भी पता था कि 49 किग्रा में मेरा इनसे मुकाबला हो सकता है इसलिए मैंने सभी कोच के साथ मिलकर योजना बनाई थी कि इनके मुक्कों से बचना है और अपना आक्रामक खेल जारी रखना है."

Amit Panghal

21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड से चूक गए थे अमित
इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया में हुए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में अमित गोल्ड से चूक गए थे. उन्हें ब्रॉन्ज से ही संतोष करना पड़ा था. उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने कोई बड़ी गलती नहीं की थी और चोट के कारण वह अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाए थे लेकिन एशियाई खेलों में वह 100 प्रतिशत फिट थे, जिसके कारण वह गोल्डन पंच जड़ने में सफल रहे. 

अमित ने कहा, "कॉमनवेल्थ गेम्स में पहले दौर में ही मुझे कोहनी में चोट लग गई. इस कारण मैं अपना स्वाभाविक खेल नहीं खेल पाया. मुझे डिफेंस करने में तकलीफ हुई क्योंकि मेरा एक हाथ अच्छे से काम नहीं कर रहा था. ऐसे में मुझे एक हाथ से ही आक्रामण करना पड़ा, जिसके कारण मेरे विपक्षी को अंक अर्जित करने के कई मौके मिले."

Amit Panghal

गोल्ड जीतने के बाद बढ़ गई हैं लोगों की उम्मीदें 
यह पूछे जाने पर कि एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने के बाद जीवन में क्या बदलाव आया है? पंघल ने कहा, "काफी बदलाव आया है. मुझसे लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. मेरे ऊपर भी जिम्मेदारियां ज्यादा आ गई हैं. मेरा अगला लक्ष्य ओलम्पिक पदक जीतना है. इसके लिए मैं अभी से सही रणनीति के साथ मेहनत करुं गा."

अमित पंघल को भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने इस साल के अर्जुन पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है.