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एथलीट दुती चंद ने किया बड़ा खुलासा, ‘हां, मेरे समलैंगिक संबंध हैं’ फैंस ने दिए ऐसे रिएक्शन

दुतीचंद भारत की समलैंगिक संबंध स्वीकारने वाली पहले एथलीट बन गई हैं. 

एथलीट दुती चंद ने किया बड़ा खुलासा, ‘हां, मेरे समलैंगिक संबंध हैं’ फैंस ने दिए ऐसे रिएक्शन
(फोटो: PTI)

नई दिल्ली: भारत में समलैंगिक समुदाय ( LGBT)अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहा है. देश में समलैंगिकता को लेकर भारी विवाद जारी है. इस बीच देश की जानी मानी प्रमुख एथलीट और एशियन गेम्स मेडलिस्ट दुतीचंद ने समलैंगिक संबंध बनाने की बात स्वीकार करने का साहस दिखाया है. दुती की इस स्वीकारोक्ति पर उनके फैंस ने उनके साहस को सलाम किया है. 

यह कहा दुती ने
देश में एथलेटिक्स के शीर्ष मुकाम पर पहुंचने वाली दुती ने अपनी पार्टरन के नाम का खुलासा करने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि वे नहीं चाहती कि उनकी साथी को अनावश्यक पब्लिक अटेंशन मिले जिसे वह नजरअंदाज करना चाहती हैं.  इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक दुती ने बताया, “ मैने अपनी जीवनसाथी को ढूंढ लिया है. मुझे लगता है कि हर एक व्यक्ति को इस बात की आजादी होनी चाहिए कि वे यह तय करें कि वे किसके साथ रहना चाहते हैं. मैंने हमेशा ही समान सेक्स संबंध बनाने के इच्छुक लोगों के अधिकारों के लिए समर्थन किया है. यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद है.”

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले 
अपने खुलासे के बारे में आगे बताते हुए दुती ने यह भी बताया कि उन्हें यह स्वीकारने का साहस सुप्रीम कोर्ट एक एतिहासिक निर्णय के बाद आया जिसमें धारा 377 में समलैंगिकता को अपराध बताने वाले प्रावधान को हटा दिया गया था. दुती सार्वजनिक तौर पर इस तरह की स्वीकारोक्ति करने वाली पहली एथलीट बताई जा रही हैं. दुतीचंद के नाम इस समय 100 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड और 2018 एशियन गेम्स में दो सिल्वर मेडल हैं.
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सोशल मीडिया से मिली तारीफ
दुती चंद के इस साहसिक सार्वजनिक खुलासे की कई फैंस ने सराहना की है. वहीं स्वतंत्र समाज के समर्थकों ने भी दुती की तारीफ की है.  सोशल मीडिया पर इस तरह की प्रतिक्रियाएं बढ़ती जा रही हैं. 

 

 

कड़े संघर्षों की कहानी है दुती चंद
एशियन गेम्स में भारत को दो सिल्वर दिलाने वाली दुती ने कड़े संघर्षों के बाद गांव की गलियों से ट्रैक तक का सफर तय किया है. जून 2014 में दुती चंद को  एथलेटिक्स फेडेरेशन ऑफ इंडिया ने जेंडर टेस्ट के लिए बुलाया था. जेंडर टेस्ट में उनके पुरुष हार्मोन लेवल की जांच होनी थी जिसे हाइपरएन्ड्रोजेनिज्म कहते हैं. बिना किसी जांच और पुष्टि के उन्हें निलंबित कर दिया गया और वे ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेंलो में भाग नहीं ले सकीं. तब दुती चंद ने हार नहीं मानी और खेल पंचाट (सीएएस) में अपील की, जहां से उन्हें राहत मिली.

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आर्थिक स्थिति भी थी शुरु से खराब
दुती चंद एक गरीब परिवार से आई हैं. उनके पिता गरीब बुनकर हैं. दुती के नौ सदस्यीय परिवार में पांच बहनें और एक भाई है. पिता की 500 से 1000 रुपए आमदनी होने के कारण दुती चंद के परिवार ने काफी गरीब रहा. ओडिशा के चाका गोपालपुर गांव की रहने वाली दुती के परिवार की खऱाब आर्थिक स्थिति की वजह से उनके भाई-बहन की अच्छी पढ़ाई-लिखाई नहीं हो सकी. दुती केपरिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार एशियन गेम्स में सिल्वर जीतने के बाद हुआ है. ओडिशा सरकार ने दुती चंद को 1.5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है.