close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बरसों बाद मैराथन में दिखे बुधिया सिंह, दिल्ली हाफ मैराथन में युवाओं को दिया यह संदेश

 Half Marathon: बुधिया सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एडमंट हाफ मैराथन 2019 में हिस्सा लेकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया.   

बरसों बाद मैराथन में दिखे बुधिया सिंह, दिल्ली हाफ मैराथन में युवाओं को दिया यह संदेश
बुधिया का बचपन बहुत गरीबी में बीता जिसकी वजह से उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. (फोटो : IANS)

नई दिल्ली: विश्व के सबसे युवा मैराथन धावक बुधिया सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एडमंट हाफ मैराथन 2019 में हिस्सा लिया. इस मैराथन का आयोजन युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देने के लिए किया गया था. ओडिशा में 2002 में जन्मे बुधिया उस समय सुर्खियो में आए थे जब केवल 5 साल की उम्र में उन्होंने 65 किलोमीटर लंबी मैराथन पूरी की थी. बुधिया लंबे समय से दौड़ते दिखाई नहीं दिए थे. बुधिया पर एक बॉलीवुड फिल्म भी बनी है जिसका नाम ‘बुधिया सिंह-बॉर्न टु रन’ है. 

 

5 कैटिगिरी में बंटी थी मैराथन 
पूर्वी दिल्ली स्थित कामनवेल्थ गेम्स विलेज में एडमंट एचआर कंसल्टिंग की ओर से आयोजित एडमंड हाफ मैराथन 2019 कामनवेल्थ विलेज से शुरू होकर विभिन्न क्षेत्रों से गुजरी. इसमें बुधिया सिंह सहित 5 साल से लेकर 17 साल के बच्चों व उनके माता पिता ने भाग लिया. इस मैराथन को पांच केटेगरी में डिवाइड किया गया था. इसमें किड्स के लिए एक किलोमीटर, फन रन के लिए 3 किलोमीटर, 5, 10 और 21.1 किलोमीटर का रूट था. मैराथन में विजेता बच्चों को प्रमाणपत्र व पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.

यह खास मकसद था मैराथन का 
मैराथन के आयोजक अखिलेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस मैराथन का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य लोगों खासकर युवाओं में ड्रग्स के प्रति जागरुकता फैलाना था. बकौल अखिलेश, "इसके लिए हमने 'से नो टू ड्रग्स' अभियान भी चलाया था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फिट इंडिया अभियान के तहत फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लक्ष्य के साथ यह मैराथन अपना मकसद पूरा करने में सफल रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और नशे को ना कहने का वचन लिया."

5 साल की उम्र में 65 किमी की मैराथन
ओडिशा में 2002 में जन्मे बुधिया उस समय सुर्खियो में आए थे जब केवल 5 साल की उम्र में उन्होंने 65 किलोमीटर लंबी मैराथन पूरी की थी. उन्होंने यह दूरी ओडिशा के पुरी से भुवनेश्वर तक सात घंटे, दो मिनट में पूरी की थी और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के साथ भारतीय रिकॉर्ड बुक राजीव गांधी अवार्ड में अपना नाम दर्ज करवाया था. 

गरीबी में झेला यह बुरा दौर
बुधिया ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था जिसकी वजह से गरीबी के कारण उनकी मां को उन्हें दो साल की उम्र में एक दलाल को केवल 850 रूपये में बेचना पडा था. बाद में बुधिया के साथ हुए खराब व्यवहार के कारण उनकी मां ने एक अनाथआलय चलाने वाले स्थानीय जूडो कोच बिराची दास से मदद मांगी. बिरंची ने उस दलाल से बुधिया को उतनी ही रकम देकर छुड़ाया जिसके बाद बुधिया बिरंची के साथ रहे. 

ऐसा मैराथन के लिए तैयार हुए बुधिया
एक बार बिरंची ने बुधिया को दौड़ने की सजा दी और भूल गए. पांच घंटे बाद जब बिरंची ने वापस आकर देखा कि बुधिया तब भी दौड़ रहे थे. इसके बाद बुधिया की चिकित्सकीय जांच के बाद पाया कि इतनी देर लगातार दौड़ने के बावजूद उनका दिल सामान्य रूप से काम कर रहा है. यहां से बिरंची ने बुधिया को मैराथन के लिए तैयार करना शुरू किया. चार साल की उम्र की तक बुधिया 50 मैराथन दौड़ चुके थे. बाद में बुधिया को भुवनेश्वर के साई होस्टल में जगह मिल गई. यहा नौ साल रहने के बाद बुधिया अब अपनी मां और बहन के साथ रह रहे हैं. 
(इनपुट आईएएनएस)