वर्ल्ड टूर फाइनल्स : पीवी सिंधु की राह कठिन, समीर वर्मा की निगाहें भी नॉकआउट पर

वर्ल्ड में नंबर एक चीनी ताइपै की ताइ जु यिंग, वर्ल्ड में नंबर दो और मौजूदा चैम्पियन जापान की अकाने यामागुची और पीवी सिंधु को इंडिया ओपन में हराने वाली अमेरिका की बीवेन झांग को इस ग्रुप में रखा गया है. 

वर्ल्ड टूर फाइनल्स : पीवी सिंधु की राह कठिन, समीर वर्मा की निगाहें भी नॉकआउट पर
पीवी सिंधु को महिला सिंगल जीतने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी (फाइल फोटो)

ग्वांग्झू : पीवी सिंधु और समीर वर्मा को अगर बुधवार (12 दिसंबर) से शुरू होने वाले बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स बैडमिंटन टूर्नामंट के नॉकआउट में जगह बनानी है तो उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा. इस सत्र में भारतीय खिलाड़ियों में पीवी सिंधु का प्रदर्शन सबसे प्रभावशाली रहा है.  पीवी सिंधु ने राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर जीते. इसके अलावा वह इंडिया ओपन और थाईलैंड ओपन में भी उप विजेता रही थी. पिछली बार दुबई में उप विजेता रही हैदराबाद यह 23 वर्षीय खिलाड़ी वर्ल्ड टूर फाइनल्स में खिताब जीतकर अपने अभियान का स्वर्णिम अंत करना चाहेगी. लेकिन महिला सिंगल का खिताब जीतने लिए उन्हें कड़ी मशक्कत करनी होगी. 

पीवी सिंधु को बेहद कड़ा ड्रॉ मिला है. उन्हें ऐसे ग्रुप में रखा गया है जिसे ‘मौत का ग्रुप’ कहा जा सकता है. वर्ल्ड में नंबर एक चीनी ताइपै की ताइ जु यिंग, वर्ल्ड में नंबर दो और मौजूदा चैम्पियन जापान की अकाने यामागुची और सिंधु को इंडिया ओपन में हराने वाली अमेरिका की बीवेन झांग को इस ग्रुप में रखा गया है. 

सत्र के आखिरी और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में चोटी के आठ खिलाड़ी ही भाग लेते हैं. प्रत्येक ग्रुप से शीर्ष पर रहने वाले खिलाड़ी सेमीफाइनल में पहुंचेगे. लगातार तीसरी बार इस टूर्नामेंट में भाग ले रही सिंधु का यामागुची के खिलाफ रिकॉर्ड 9-4 है लेकिन इस सत्र में इन दोनों के बीच जो पांच मुकाबले खेले गए उनमें से चार जापानी खिलाड़ी ने जीते थे. 

भारतीय खिलाड़ी के लिए ताइ जु यिंग से पार पाना भी मुश्किल रहा है. सिंधु ने उनसे पिछले छह मुकाबले गंवाए हैं. भारतीय खिलाड़ी ने आखिरी बार ताई जु यिंग को रियो ओलंपिक 2016 में हराया था. झांग के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड 3-3 से बराबरी पर है, लेकिन पिछले तीन मुकाबलों में अमेरिकी खिलाड़ी भारतीय खिलाड़ी पर भारी रही है जिसमें इंडिया ओपन वर्ल्ड टूर सुपर 500 टूर्नामेंट का फाइनल भी शामिल है.

सिंधु हालांकि अच्छा प्रदर्शन करने के प्रति आश्वस्त हैं और उन्होंने कहा कि अभ्यास के लिए पर्याप्त समय मिलने के कारण वह सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं. 

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस बार तैयारी के लिये पर्याप्त समय मिला है. मुझे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है. इसमें सभी चोटी की खिलाड़ी भाग लेती हैं. यह कड़ा है लेकिन मैं इसे जीतना चाहती हूं.’’  सिंधु इस 15 लाख डॉलर इनामी टूर्नामेंट की तैयारियों के कारण सैयद मोदी टूर्नामेंट से हट गई थीं. 

पुरुष एकल में समीर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. उन्होंने पिछले महीने सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव करके अंतिम क्षणों में इस टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया. उनके ग्रुप में जापान के वर्ल्ड नंबर एक केंतो मोमोता, इंडोनेशिया के टामी सुगियार्तो और थाईलैंड के कांताफोन वानचारोइन हैं. 

किदांबी श्रीकांत के बाद टूर्नामेंट का टिकट पाने वाले दूसरे भारतीय पुरुष बने समीर का सुगियार्तो और वानचारोइन के खिलाफ रिकॉर्ड 1-1 से बराबर है, लेकिन उन्हें किसी भी तरह के उलट परिणाम से बचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा. 

इस 24 वर्षीय खिलाड़ी के लिए मोमोता की चुनौती से पार पाना आसान नहीं होगा. समीर ने उन्हें स्विस ओपन में खिताबी जीत के दौरान हराया था. स्विस ओपन के बाद जापान का यह खिलाड़ी इस खेल की बड़ी ताकत के रूप में उभरा है. 

इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को पहले सुपर सीरीज फाइनल के नाम से जाना जाता था, जिसके लिए साइना नेहवाल सात बार क्वालीफाई करने में सफल रही. वह 2011 के सत्र के फाइनल में पहुंची थी. ज्वाला गुट्टा और वी दीजू की भारतीय मिश्रित युगल जोड़ी 2009 में इस टूर्नामेंट की उपविजेता रही थी.