B'Day Special: क्यों टीम इंडिया में विकल्प नहीं है इस खिलाड़ी का

Team India: चेतेश्वर पुजारा ने इस साल इंटरनेशनल नहीं बल्कि घरेलू क्रिकेट में एक खास रिकॉर्ड बनाया. 

B'Day Special: क्यों टीम इंडिया में विकल्प नहीं है इस खिलाड़ी का
पुजारा ने इस साल फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपनी पचासवीं सेंचुरी पूरी की. (फोटो: ANI)

नई दिल्ली: टीम इंडिया (Team India) की मॉडर्न वॉल कहे जाने वाले चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) का टेस्ट क्रिकेट में एक अहम मुकाम है. वनडे और टी20 प्रारूप के लिए बहुत से पंडितो के मुताबिक पुजारा उपयुक्त नहीं माने जाते हैं, लेकिन विदेशी पिचों में पुजारा ने जिस तरह से अपना लोहा मनवाया है, उनके खराब फॉर्म के बाद भी टीम में उनके विकल्प की चर्चा भी नहीं होती जैसा कि पिछले साल हुआ था. 

25 जनवरी, 1988 को गुजरात के राजकोट में जन्मे चेतेश्वर का बचपन में ही क्रिकेट के प्रति झुकाव रहा.  सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके चेतेश्वर के पिता ने उन्हें प्रोत्साहित किया. अब तक पुजारा 75 टेस्ट मैचों में 18 शतक और 24 हाफ सेंचुरीलगा चुके हैं. पिछले एक साल में उन्होंने एक शतक और चार हाफ सेंचुरी लगाई हैं. फिर भी पिछले साल भर में अपनी लय में नहीं माने गए पुजारा के नाम एक अहम उपलब्धि जुड़ी.  

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पुजारा  ने सौराष्ट्र के लिए खेलते हुए कर्नाटक के खिलाफ सेंचुरी ठोक दी और अपने फर्स्ट क्लास करियर का 50वां शतक लगाया.
चेतेश्वर के अलावा सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं. गावस्कर और सचिन ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 81 शतक लगाए हैं जबकि द्रविड़ के नाम 68 शतक हैं. पुजारा अब फर्स्ट क्लास मैचों में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले चौथे सक्रिय बल्लेबाज बने. उनके अलावा एलिस्टर कुक (65), वसीम जाफर (57), हाशिम आमला (52) ऐसे खिलाड़ी हैं जो 50 से ज्यादा फर्स्ट क्लास सेंचुरी लगा चुके हैं और अब भी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल रहे हैं. 

पिछले साल पुजारा ने जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दौरे में 74.42 के औसत से शानदार बल्लेबाजी की. लेकिन अपने जन्मदिन के बाद उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका 14, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 50.69 के औसत के साथ, बांग्लादेश के खिलाफ 61.58 के औसत से रन बनाए. 

पुजारा इस साल बेहतरीन लय में नहीं माने गए. यहां तक जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन भारत की दूसरी पारी में 148 गेंदों पर 81 रन की पारी खेली. इस पारी से वे बहुत खुश नजर नहीं आए. दिन के खेल समाप्ति के बाद उन्होंने कहा, "एक ही प्रारुप में खेलते रहने से इसका आप पर प्रभाव पड़ता है. लेकिन ये मुझे अपनी फिटनेस और फील्डिंग पर काम करने की इजाजत देता है. जब आप ही एक फॉर्मेट में लगातार खेलते रहते हैं तो फिर इसमें आपको जल्द से फॉर्म में लौटने की जरूरत होती है."

पुजारा के धैर्य की तुलना टीम इंडिया की दीवार कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ से की जाती है. इसी वजह से उन्हें टीम इंडिया की मॉडर्न वाल भी कहा जाता है. पुजारा रन बनाने में अपना समय लेते हैं. उनकी यह तकनीक टेस्ट मैच जैसे प्रारूप के बहुत ज्यादा कारगर है. उन्होंने एक साल पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई टीम इंडिया की टेस्ट सीरीज के चार टेस्ट मैचों में तीन सेंचुरी और एक हाफ सेंचुरी के साथ कुल 521 रन बनाए और मैन ऑफ द सीरीज का खिताब भी हासिल करने में कामयाब रहे थे.

पुजारा ने अपने 75 टेस्ट मैचों की 124 पारियों में 49.48 के औसत से 5740 रन बनाए हैं जिसमें 18 शतक शामिल हैं. इनमें से 10 शतक भारत में जबकि 8 शतक विदेश में लगाए हैं.