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B'day Special: गांगुली से कई साल पहले इस कप्तान ने सिखाया था भारत को विदेश में जीतना

मंसूर अली खान पटौदी ने भारत को विदेश में पहला टेस्ट और पहली सीरीज जिताई थी. 

B'day Special: गांगुली से कई साल पहले इस कप्तान ने सिखाया था भारत को विदेश में जीतना
पटौदी को दुर्घटना के बाद देखने में काफी परेशानी होती थी. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: जब भी भारत के उन कप्तानों की बात होती है जो विदेशों सबसे सफल रहे हैं तो इनमें विराट कोहली (Virat Kohli), एमएस धोनी और सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) का नाम लिया जाता है. 1990 के दशक में काफी समय तक विदेशों में संघर्ष करती रही टीम इंडिया को विदेशों जीतना सिखाने का श्रेय बहुत से लोग सौरव गांगुली को देते है, लेकिन कम लोग यह जानते हैं कि गांगुली से कई साल पहले यह काम मंसूर अली खान पटौदी ने सबसे पहले किया था.

पहले टेस्ट मैच और सीरीज में जीत
टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तान माने जाने वाले मंसूर अली खान पटौदी का रविवार को जन्मदिन है. पटौदी को भारत के सबसे बेहतरीन कप्तान माना जाता था. एक दुर्घटना में अपनी एक आंख खोने के बाद भी मंसूर ने क्रिकेट में वापसी की और शानदार करियर बनाया. मंसूर ही थे जिन्होंने भारत को विदेश में पहले टेस्ट मैच और पहली टेस्ट सीरीज में जीत दिलाई थी. 

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एक हादसा और चली गई आंख
'टाइगर' के नाम से मशहूर मंसूर अली खान पटौदी का जन्म 5 जनवरी 1941 को भोपाल में हुआ था. 1961 को होव में एक कार एक्सीडेंट में एक कांच का टुकड़ा उनकी आंख में लग गया और उनकी दाईं आंख हमेशा के लिए खराब हो गई. उन्हें साफ देखने में परेशानी भीहुई लेकिन  पटौदी जल्दी ही नेट प्रैक्टिस पर लौटे और एक आंख के साथ ही अपने खेल में शानदार वापसी की.

शानदार शुरुआत
आंख में खराबी आने के बावजूद 6 महीने से भी कम समय में पटौदी ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की. वे दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ खेले. मद्रास (चेन्नई) में अपने तीसरे ही टेस्ट में पटौदी ने 103 रन बनाए. उनके इन रनों की बदौलत भारत इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली सीरीज जीतने में सफल हुआ. 

सबसे कम उम्र के कप्तान
1962 में पटौदी को वेस्टइंडीज दौरे के लिए उपकप्तान बनाया गया. मार्च 1962 में मंसूर भारतीय टीम के कप्तान नियुक्त किए गए. 21 साल और 77 दिन की उम्र में वे कप्तान बनाए गए. कई वर्षों तक दुनिया के सबसे कम उम्र के कप्तान का रिकॉर्ड उनके नाम रहा जिसे बाद में ततेन्दा तैबु ने मई 2004 में तोड़ा. 2015 के नंवबर तक उनके नाम भारत के सबसे कम उम्र के कप्तान और दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र के कप्तान होने का रिकॉर्ड रहा. 

शानदार रिकॉर्ड रहा पटौदी का
 पटौदी ने भारत की तरफ से 46 मैच खेलते हुए करीब 35 की औसत से 2793 रन बनाए जिसमें छह शतक 16 अर्धशतक शामिल हैं. 8 फरवरी 1964 को पटौदी ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार 203 रन बनाए थे, जो उनके क्रिकेट करियर का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर है. उन्होंने न्यूजीलैंड में भारत को चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 3-1 से जीत हासिल कर इतिहास रच दिया था

पोलो खेलते हुए हुआ था पिता का निधन
मंसूर के पिता इफ्तिखार अली खान भी एक जाने-माने क्रिकेटर थे.  मंसूर अली खान ने अरेबिक और फ्रेंच ऑक्सफोर्ड के बैलिओल कॉलेज में पढ़ी. मंसूर अली खान के पिता की दिल्ली में पोलो खेलते समय मृत्यु हो गई. उस दिन मंसूर का जन्मदिन था. 1952 में मंसूर उनके स्टेट के नौवें नवाब बने. वे 1952 से 1971 तक वे पटौदी के नवाब रहे.
 

ये खिताब भी मिले पटौदी को
मंसूर को कई अवार्ड भी मिले. 1962 में वे 'इंडियन क्रिकेटर ऑफ द ईयर' रहे. 1968 में 'विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर' बने. नवाब पटौदी ने 1969 में अपनी आटोबॉयोग्राफी 'टाइगर्स टेल' प्रकाशित की. वे 1974-75 में भारतीय टीम के मैनेजर रहे. 2007 में मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब ने भारत और इंग्लैंड के बीच पटौदी ट्रॉफी का आयोजन किया, जो उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी के सम्मान में आयोजित की गई थी. उनकी मृत्यु 22 सितंबर 2011 को हुई.