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B'day Special: घुटने के दर्द को झेलते हुए बने शोएब अख्तर रफ्तार के बादशाह

शोएब अख्तर को बचपन बीमारी और युवा होने पर घुटनों के दर्द से जूझते रहना पड़ा फिर भी उन्होंने अपनी मंजिल से निगाहें नहीं हटाईं

B'day Special: घुटने के दर्द को झेलते हुए बने शोएब अख्तर रफ्तार के बादशाह
शोएब अख्तर फिटनेस और विवादों के कारण ज्यादातर मैचों में चुने नहीं गए.. (फोटो :IANS)

नई दिल्ली: रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर रहे पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) मंगलवार को 44 साल के हो गए हैं. अपने जमाने में अपनी बॉलिंग स्पीड से तहलका मचाने वाले शोएब अख्तर ने दुनिया भर के बल्लेबाजों में अपनी बॉलिंग का खौफ पैदा करने में कामयाबी हासिल की थी. पाकिस्तान स्थित पंजाब प्रांत के रावलपिंडी में 13 अगस्त 1975 में जन्मे शोएब ने अपनी मेहनत के दम पर पाकिस्तान क्रिकेट में अपनी एक खास पहचान बनाई. 

कभी सपने देखना मत छोड़िए
रिटायरमेंट के काफी समय बाद अख्तर ने यह कह दुनिया को सकते में डाल दिया था कि अपने 18 साल के लंबे करियर में वे हमेशा ही घुटनों के दर्द की बीमारी से जूझे रहे थे. उन्होंने कहा था कि चाहे पहला मैच हो या आखिरी घुटनों के दर्द ने हमशा उन्हें परेशान किया. शोएब अख्तर ने एक बार सोशल मीडिया पर अपने घुटने का एक एक्सरे शेयर किया था. इस एक्सरे रिपोर्ट को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था- ‘एक बच्चा जो 6 साल की उम्र तक ठीक से चल तक नहीं पाता था, वो आगे चलकर क्रिकेट इतिहास में सबसे तेज बॉलर बन गया. इसलिए सपने देखना कभी मत छोड़िए.’  

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काफी उतार चढ़ाव भरा रहा करियर
इस लंबे करियर में उन्होंने 46 टेस्ट मैच और 163 वनडे खेले. उनके नाम 178 टेस्ट विकेट और 247 वनडे विकेट रहे.  टेस्ट में उन्होंने 12 बार 5 विकेट लिए और दो टेस्ट में दोनों पारियों में कुल 10 विकेट लेने का कारनामा भी किया. शोएब के नाम ही क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड रहा है. उनकी गेंद से कई बल्लेबाज भी चोटिल हो चुके हैं. वे ज्यादातर चोट या विवादों  के कारण टीम से बाहर रहे. उन्हें एक बार अपने एक्शन में भी सुधार करना पड़ा और एक बार ड्रग्स लेने के विवाद में भी फंस चुके हैं. 

गरीबी में बीता बचपन
 शोएब अख्तर का जन्म बहुत मन्नतों के बाद हुआ था तीन साल की उम्र में उन्हें काली खांसी की खतरनाक बीमारी हो गई थी. कई लोगों ने कहा कि ये लड़का कभी ठीक नहीं होगा, लेकिन शोएब की मां ने हिम्मत नहीं हारी. डॉक्टर्स ने कहा था कि शोएब के फेंफड़े हमेशा के लिए कमजोर हो चुके हैं. बीमारी के कारण फेंफड़ों का साइज बढ़ गया है. इसके चलते उनमें दूसरे बच्चों के मुकाबले ज्यादा एनर्जी रहती थी. इसी एनर्जी को शोएब ने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया.

क्या कर रहे हैं इन दिनों शोएब
क्रिकेट फील्ड से दूर होने के बाद भी वो कभी बतौर क्रिकेट एक्सपर्ट तो कभी टीवी होस्ट के रूप में फैन्स को एंटरटेन कर रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ समय  से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं वे अपने यू ट्यूब चैनल पर पाकिस्तान क्रिकेट के बारे में अपनी राय जाहिर करते रहते हैं. इस विश्व कप में पाकिस्तान के प्रदर्शन पर उनके वीडियो काफी चर्चा में रहे थे.