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B'day Special: दुनिया में आज का बेस्ट विकेटकीपर माना जाता है साहा को

Indian Wicket keeper: ऋद्धिमान साहा ने केवल 35 टेस्ट ही खेले हैं, लेकिन विकेटकीपिंग क्षमताओं में दुनिया के दिग्गज विकेटकीपर माने जाते हैं. 

B'day Special: दुनिया में आज का बेस्ट विकेटकीपर माना जाता है साहा को
साहा की विकेटकीपिंग क्षमताएं दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं. (फोटो : ANI)

नई दिल्ली: क्रिकेट का छोटा प्रारूप हो या बड़ा, एक विकेटकीपर की सफलता के लिए उसका एक बढ़िया बल्लेबाज होना जरूरी माना जाता है. पिछले कई सालों से टीम इंडिया (Team India) के लिए पूर्व कप्तान एमएस धोनी (MS Dhoni) ने इस पद पर निर्विवाद रूप से एकछत्र राज किया था. लेकिन 2014 में धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने और 2015 विश्व कप के बाद से उनके विकल्प की तलाश शुरू हुई. टेस्ट में धोनी की कमी को पूरा करने में सबसे आगे रहे ऋद्धिमान साहा (Wriddhiman Saha) गुरुवार को 35 साल के हो रहे हैं. 

उतार चढ़ाव भरा रहा करियर
साहा का करियर बहुत ही आशाजनक रहा, लेकिन उन्हें भारतीय क्रिकेट में वह मुकाम न मिल सका जिसके वे हकदार थे. इसकी दो वजह ही खास रहीं एक तो एमएस धोनी और दूसरा उनका चोट से भरा करियर. धोनी के जाने के बाद साहा टीम इंडिया के नंबर एक विकेटकीपर थे. यहां तक कि टीम इंडिया के कोच और कई दिग्गज आज भी यही मानते हैं कि साहा से बेहतर विकेटकीपर दुनिया में कोई नहीं हैं. लेकिन इस खिलाड़ी को किस्मत का उस तरह साथ नहीं मिला.

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शानदार विकेटकीपिंग 
साहा के करियर की बात करें तो साहा ने अब तक 35 टेस्ट और 9 वनडे मैच खेले हैं. टेस्ट में उन्होंने 48 पारियों में 1209 रन ही बनाए हैं जिसमें तीन शतक और पांच हाफ सेंचुरी शामिल है. वे एक स्थापित बल्लेबाज माने जाते हैं लेकिन उन्हें उनकी विकेटकीपिंग स्किल्स के लिए ज्यादा जाना जाता है. उन्होंने इन 35 मैचों में 86 कैच और 11 स्टंपिंग की हैं. वहीं वनडे में वे 17 कैच ले चुके हैं. रिकॉर्ड भले ही ज्यादा कुछ न कहे लेकिन जिस दिग्गज ने भी साहा को मैदान पर कीपिंग करते हुए देखा है. उन्हें दुनिया के बेस्ट विकेटकीपर में शुमार करने से गुरेज नहीं किया है. 

ऐसा खेलने को मिला पहला टेस्ट
साहा को पहला टेस्ट खेलने का मौका अपनी बल्लेबाजी क्षमताओं के कारण मिला. 2010 में वे रोहित शर्मा की जगह छठे नंबर के बल्लेबाज के तौर पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नागपुर टेस्ट में शामिल किए गए. वहीं 2012 में वे धोनी के स्लोओवर रेट के कारण बाहर किए जाने की वजह से टीम में चुने गए. लेकिन टीम इंडिया के नियमित विकेटकीपर 2014 में धोनी के टेस्ट संन्यास के बाद ही बन सके. उन्होंने खुद को इस जगह के लिए बखूबी साबित करते हुए भारतीय दिग्गजों का तारीफ भी हासिल की. 

सबसे पहले बनाया यह रिकॉर्ड
साहा पहले ऐसे भारतीय विकेटकीपर हैं जिन्होंने भारत और विदेश (एशिया से बाहर) दोनों जगह शतक लगाए हैं. वे भारत में दो और वेस्टइंडीज में एक शतक लगा चुके हैं. हालांकि इस सूची में अब ऋषभ पंत भी हैं जि भारत और इंग्लैंड दोनों जगह शतक लगा चुके हैं. साहा वैसे तो निर्विवाद रूप से भारत के टेस्ट विकेटकीपर हैं.

चोट ने किया बहुत परेशान
पिछले कुछ समय से  चोटिल होने की वजह से वे टीम के अंदर-बाहर होते रहे हैं. 2018 में वे चोट के कारण टीम इंडिया से बाहर रहे. उन्हें पहले टीम इंडिया के दक्षिण अफ्रीका के बीच दौरे में से चोट के कारण वापस आना पड़ा और फिर चोट के कारण इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे में भी शामिल नहीं हो सके. इसी दौरान ऋषभ पंत को टीम इंडिया में आने का मौका मिला और वे प्रभावित करने में भी सफल रहे.  लेकिन हाल ही में पंत के प्रदर्शन में गिरावट आई और साहा को फिर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौका मिला. 

दुनिया के बेहतरीन विकेटकीपर
आज भी साहा को विकेटकीपिंग के मामले में बेहतर विकेटकीपर माने जाते हैं. हालांकि पंत को ताबड़तोड़ बल्लेबाजी में बेहतर माना जाता है यही वजह है कि धोनी के रहते भी पंत वनडे और टी20 टीम इंडिया में खेलते दिखाई देते हैं. वे उन गिने चुने विकेटकीपर में से एक हैं जिनका प्रति पारी खिलाड़ी आउट करने का औसत 1.5 से कम है. उनकी विकेटकीपिंग की तारीफ करने वालों में विराट कोहली, सौरभ गांगुली, रवि शास्त्री शामिल हैं.