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ये हैं क्रिकेट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, जिसे जानकर हैरान रह जाएंगे आप

क्रिकेट का इतिहास सदियों पुराना है, इस खेल में कुछ ऐसे नियम और ऐसी घटनाएं हुईं जिसे जानकर काफी हैरानी होती है.

ये हैं क्रिकेट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, जिसे जानकर हैरान रह जाएंगे आप

नई दिल्ली: क्रिकेट की दुनिया अन्य खेलों से एक बात में बहुत अनोखी है। यह बात है इस खेल में खिलाड़ियों के लगातार रिकॉर्ड तोड़ते रहने की। लेकिन रिकॉर्ड तोड़ने के अलावा भी कुछ बातें ऐसी हैं, जो आपको अनूठी लग सकती हैं। ऐसे ही पांच अनोखे फैक्ट्स हम आपको बताते हैं.

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एक क्रिकेटर को मिल चुकी है मर्डर के लिए फांसी
क्रिकेट की दुनिया में भी एक इंटरनेशनल खिलाड़ी ऐसा रहा है, जिसे किसी इंसान की हत्या करने के लिए फांसी की सजा दी गई थी. ये क्रिकेटर थे वेस्टइंडीज के लेस्ली हिल्टन. वेस्टइंडीज के इस तेज गेंदबाज ने अपनी पत्नी लर्लिन रोज की दूसरे शख्स के साथ अवैध संबंध होने के शक में शादी के 12 साल बाद 1954 में हत्या कर दी थी. लेस्ली अपनी पत्नी से इतना खफा था कि उसे 7 गोलियां मारकर हत्या की थी. लर्लिन जमैका के पुलिस इंस्पेक्टर की बेटी थी. इस हत्या के लिए लेस्ली को 17 मई, 1955 के दिन जमैका में फांसी दी गई थी. लेस्ली ने वेस्टइंडीज के लिए 26.12 के औसत से 6 टेस्ट मैच में 19 विकेट लिए थे.

नहीं बदला है कभी पिच की लंबाई का नियम
क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट की दुनिया में सबसे पुराना यानी सबसे पहले बनाया गया नियम कौन सा था? चलिए हम आपको बताते हैं. यह नियम है किसी क्रिकेट पिच की लंबाई का. क्रिकेट के नियम-7 के मुताबिक, पिच की लंबाई 22 गज और चौड़ाई 10 फीट होती है. यह नियम-7 ही सबसे पहले तैयार किया गया था और आज तक क्रिकेट पिच की इतनी लंबाई बरकरार है.

एक बार ओलंपिक में भी खेला गया है क्रिकेट
क्रिकेट को भले ही आप आजकल ओलंपिक खेलों से गायब पाते हैं, लेकिन एक बार ओलंपिक खेलों में इस खेल को शामिल किया जा चुका है. साल 1900 के पेरिस ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किया गया था, जिसमें ब्रिटेन यानी इंग्लैंड ने फ्रांस की टीम को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था. मजे की बात यह है कि इन ओलंपिक खेलों में यही दो टीम क्रिकेट में हिस्सेदारी कर रही थी, जिससे क्रिकेट खेलने वाला देश नहीं होने के बावजूद फ्रांस के खाते में इस खेल का रजत पदक शामिल हो गया, लेकिन कांस्य पदक लेने के लिए कोई टीम ही नहीं थी.
 
दरअसल ओलंपिक से पहले बेल्जियम और नीदरलैंड ने भी टीम भेजने की सहमति दी थी, लेकिन बाद में ऐन मौके पर उन्होंने इनकार कर दिया. इससे ओलंपिक खेलों में पेरिस में महज एक ही टेस्ट मैच से पदक विजेता का फैसला कर लिया गया. इस टेस्ट मैच में फ्रांस दोनों पारियों में 104 रन ही बना सकी और ब्रिटेन ने यह मैच 158 रन से महज दूसरे दिन ही जीत लिया. पहले ब्रिटेन को रजत पदक और फ्रांस को कांस्य पदक दिया गया और इस मैच को ओलंपिक का अधिकारिक हिस्सा नहीं माना गया, लेकिन 1912 ओलंपिक में इस भूल को सुधारते हुए इसे अधिकृत ओलंपिक मुकाबला घोषित किया गया और दोनों टीमों के पदक स्वर्ण व रजत में बदल दिए गए.

भारत और इंग्लैंड, दोनों के लिए टेस्ट मैच खेले पटौदी
नवाब पटौदी शब्द सुनते ही भारतीय क्रिकेटरों के दिमाग में अभिनेता सैफ अली खान के पिता और अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज नवाब मंसूर अली खां पटौदी की याद आ जाती है. टाइगर के नाम से मशहूर पटौदी भारतीय टीम के सबसे कम उम्र के कप्तान भी रहे हैं। लेकिन यहां हम उनकी नहीं बल्कि उनके पिता नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी की बात कर रहे हैं, जो भारत और इंग्लैंड दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेले थे. 

उन्होंने 1932-33 की मशहूर ‘बॉडीलाइन’ सीरीज के लिए इंग्लैंड की टीम में जगह बनाई थी और अपने पहले ही टेस्ट मैच में सिडनी में शतक जड़ा था. लेकिन वे दूसरे टेस्ट मैच के बाद इंग्लैंड की टीम से हमेशा के लिए बाहर कर दिए गए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि उन्होंने डगलस जार्डिन की बॉडलाइन रणनीति पर एतराज जताया था, जो जार्डिन को पसंद नहीं आया था. इसके बाद बड़े नवाब पटौदी के नाम से मशहूर इफ्तिखार ने 1946 के इंग्लैंड दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की थी. उन्होंने कुल 6 टेस्ट मैच खेले थे.

एशेज ट्रॉफी में है स्टंप की राख
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए विजेता टीम को एशेज ट्रॉफी दी जाती है. वैसे तो यह एक बड़ी ट्रॉफी होती है, लेकिन इसके अंदर ऐसी ही बेहद छोटी सी लकड़ी की ट्रॉफी होती है, जिसके अंदर एश यानी राख भरी हुई है. यह राख है एक क्रिकेट स्टंप की. दरअसल लंदन के केनिंग्सटन ओवल के मैदान 29 अगस्त, 1882 को टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 7 रन से हराकर उनकी धरती पर अपनी पहली जीत हासिल की थी.

इस हार से दुखी होकर स्पोर्टिंग टाइम्स अखबार के खेल पत्रकार शिर्ले ब्रुक्स ने इंग्लिश क्रिकेट की मौत का हैडिंग अपनी खबर पर लगाया और कहा कि अंतिम संस्कार के बाद एश यानी राख ऑस्ट्रेलिया भेज दी जाएगी. बस इसी हैडिंग से एशेज शब्द निकला और उस टेस्ट मैच के एक स्टंप को जलाकर उसे प्रतीकात्मक राख के तौर पर एशेज कलश में भरा गया.

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