वो 'मनहूस मैच' जब 5 भारतीय बल्लेबाजों को बिना खेले ही दे दिया गया था आउट

25 अप्रैल 1976 को किंग्सटन के सबीना पार्क में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों पर जबरदस्त कहर बरपाया था. 

वो 'मनहूस मैच' जब 5 भारतीय बल्लेबाजों को बिना खेले ही दे दिया गया था आउट

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में जितने सुनहरे पल हुए हैं, उनके बीच एक कभी न याद रखने वाला वाक्या भी हु्आ है. यह मामला ऐसा था, जिसने पूरे क्रिकेट जगत में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों का खौफ भर दिया तो टीम इंडिया के ऊपर तेज गेंदबाजों से घबराने का वो ठप्पा लगा दिया, जिसे मिटाने में कई दशक लग गए. ये घटना घटी था 25 अप्रैल 1976 को,  जब जमैका टेस्ट में वेस्टइंडीज के खतरनाक गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाज एक के बाद एक चोट के शिकार हो रहे थे और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ रहा था. 

हालात इतने खतरनाक थे कि तत्कालीन भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) ने बीच में ही पारी घोषित कर वेस्टइंडीज को जीत के लिए सिर्फ 13 रन का लक्ष्य दे दिया. बेदी को ऐसा इसलिए करना पड़ा ताकि उनके गेंदबाज भी चोटिल न हो जाएं और उन्हें भी अस्पताल ना ले जाना पड़ जाए. नतीजा ये रहा कि 5 भारतीय बल्लेबाजों को बिना खेले ही आउट घोषित कर दिया गया.

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पोर्ट आफ स्पेन टेस्ट में भारतीय जीत ने रख दी थी नींव

दरअसल कैरेबियाई गेंदबाजों की इस घातक गेंदबाजी की नींव सीरीज में जमैका से पहले पोर्ट आफ स्पेन में खेले गए तीसरे टेस्ट में ही रख दी गई थी. पोर्ट आफ स्पेन टेस्ट में भारतीय बल्लेबाजों ने वेस्टइंडीज की घातक गेंदबाजी को ठेंगा दिखाते हुए 406 रन का लक्ष्य हासिल कर दिखाया था. ऐसा कारनामा टेस्ट क्रिकेट में किसी टीम ने महज दूसरी बार किया था. अपनी टीम के साथ ऐसा खराब इतिहास जुड़ने से वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लायड ( Clive Lloyd) बेहद नाराज हो गए थे. उन्होंने इसका बदला जमैका टेस्ट में लेने की ठानी और 4 तेज गेंदबाजों माइकल होल्डिंग, वैनबर्न होल्डर, बर्नार्ड जूलियन और वेन डैनियल के साथ मैदान पर उतरने का फैसला कर लिया.

पहले ही दिन से चालू हो गया था खूनी खेल

जमैका के सबीना पार्क स्टेडियम की पिच पर चौथे टेस्ट मैच की शुरुआत 21 अप्रैल को हुई और पहले ही दिन से कैरेबियाई गेंदबाजों का खूनी खेल चालू हो गया. दरअसल वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का मौका दिया, लेकिन ओपनिंग में ही लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर तथा अंशुमन गायकवाड़ की जोड़ी जम गई. दोनों ने 136 रन जोड़ दिए तो लायड और ज्यादा गुस्सा हो गए और उन्होंने 'व्हिस्परिंग डेथ' के नाम से मशहूर माइकल होल्डिंग (Michael Holding) को बॉडीलाइन बालिंग यानी बल्लेबाजों के शरीर को निशाना बनाकर गेंद फेंकने का आदेश दिया. इससे ध्यान भटकने के चलते गावस्कर 66 रन बनाकर होल्डिंग की गेंद पर बोल्ड हो गए. पहले दिन भारत ने 1 विकेट खोकर 175 रन बनाए.

दूसरे दिन चालू हुआ भारतीयों के अस्पताल जाने का सिलसिला

जब दूसरे दिन का खेल चालू हुआ तो कैरेबियाई गेंदबाजों ने पहली गेंद से ही आक्रामक रुख अपनाया. मोहिंदर अमरनाथ 39 रन बनाकर 205 रन पर दूसरे विकेट के रूप में लौटे. गायकवाड़ बेहतरीन खेल रहे थे और 81 रन बना चुके थे. लेकिन होल्डिंग की एक खतरनाक बाउंसर उनके कान पर लगी और वे पिच पर ही गिर गए. खून इतना बह रहा था कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां वो 2 दिन तक भर्ती रहे. गायकवाड़ के थोड़ी देर बाद होल्डिंग का एक और बाउंसर ब्रजेश पटेल के मुंह पर लगा और उन्हें भी टांके लगवाने अस्पताल जाना पड़ा. दिग्गज बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ होल्डिंग का अगला शिकार बने. उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा.

बीच में ही घोषित कर दी कप्तान बेदी ने पारी

अपने 3 बेहतरीन बल्लेबाजों के चोटिल होने पर कप्तान बिशन सिंह बेदी ने पहली पारी को 306 रन के स्कोर पर ही घोषित कर दिया। बाद में बेदी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि पारी इस डर से घोषित की गई थी कि यदि गेंदबाजों को भी चोट लग गई तो आगे मैच कैसे होगा. भारतीय गेंदबाजों ने वेस्टइंडीज को पारी जल्दी घोषित होने का बड़ा लाभ नहीं उठाने दिया और 391 रन पर ही रोक दिया। महान लेग स्पिनर बीएस चंद्रशेखर ने 5 विकेट लिए. लेकिन विंडीज को पहली पारी में 85 रन की बढ़त मिल गई. फील्डिंग के दौरान कप्तान बिशन सिंह बेदी और चंद्रशेखर भी चोटिल हो गए.

दूसरी पारी में फिर बरपा कहर

25 अप्रैल के दिन भारतीय टीम जब सबीना पार्क की पिच पर दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लिए उतरी तो गायकवाड़ अस्पताल में होने के कारण पहले ही गैरमौजूद थे. नतीजा ये हुआ कि सुनील गावस्कर के साथ दिलीप वेंगसरकर ने पारी की शुरुआत की. गावस्कर महज 2 रन बनाकर फिर से होल्डिंग का शिकार बन गए. इसके बाद वेंगसरकर और मोहिंदर अमरनाथ ने भारत की पारी को संभालने की कोशिश की. वेंगसरकर जब आउट हुए, तब भारत का स्कोर 68 रन था. होल्डिंग और उनके साथी इतनी खतरनाक गेंदबाजी कर रहे थे कि भारतीय बल्लेबाजों के लगातार अपने शरीर पर गेंद झेलनी पड़ रही थी. इसके चलते भारतीय बल्लेबाज अपने विकेट गंवाते चले गए. टीम का स्कोर 97 पर पहुंचने तक मदन लाल (8), मोहिंदर अमरनाथ (60) और एस. वेंकटराघवन (0) पैवेलियन लौट गए थे.

आगे खेलने कप्तान बेदी ने नहीं उतारे बल्लेबाज

कप्तान बेदी ने अपने बाकी बल्लेबाजों को चोट से बचाने के लिए 5 विकेट पर 97 रन के स्कोर पर ही पारी घोषित कर दी। इस फैसले से हर कोई हैरान रह गया और वेस्टइंडीज ने जीत के लिए मिले 12 रन के लक्ष्य को बिना विकेट खोए 1.5 ओवर में ही हासिल कर 10 विकेट से मैच जीत लिया. इसके साथ सीरीज भी 2-1 से विंडीज के नाम हो गई. स्कोरर ने भारतीय टीम के दूसरी पारी के स्कोर कार्ड में खेलने नहीं उतरे बल्लेबाजों के सामने 'एब्सेंट आउट' लिखा. इस टेस्ट मैच को आज तक भी भारतीय क्रिकेट के काले दिनों में से एक माना जाता है.

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