जन्म के समय बना था कुछ ऐसा संयोग, अब हरमनप्रीत कौर कर रहीं 'गुड बैटिंग'

वह आठ मार्च का दिन था, जिसे दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाती है. वर्ष था 1989. पंजाब के मोगा में रहने वाले हरमंदर सिंह के घर पहली संतान आने वाली थी. उनको लगा बेटा ही होगा और वह लड़कों की बड़ी शर्ट खरीद लाए.

जन्म के समय बना था कुछ ऐसा संयोग, अब हरमनप्रीत कौर कर रहीं 'गुड बैटिंग'
हॉकी स्टिक से क्रिकेट खेलने वाली हरमनप्रीत अब बल्ले से छुड़ा रही छक्के (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  महिला टीम इंडिया की कप्तान हरमनप्रीत कौर को कभी हॉकी की स्टिक थमाई गई थी और जिन्हें क्रिकेट का ककहरा सीखने के लिए घर से 30 किमी दूर जाना पड़ता था. बालीबॉल और बॉस्केटबाल के खिलाड़ी रहे हरमंदर सिंह भुल्लर चाहते थे कि बेटी हॉकी खिलाड़ी बने. लेकिन हरमनप्रीत को तो बस क्रिकेट खेलना था. और इसकी नींव उसी दिन पड़ गई थी जब हरमनप्रीत का जन्म हुआ था. 

वह आठ मार्च का दिन था, जिसे दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाती है. वर्ष था 1989. पंजाब के मोगा में रहने वाले हरमंदर सिंह के घर पहली संतान आने वाली थी. उनको लगा बेटा ही होगा और वह लड़कों की बड़ी शर्ट खरीद लाए. संयोग देखिये कि उस शर्ट पर एक बल्लेबाज का चित्र बना हुआ था जो "ड्राइव" कर रहा था. हरमनप्रीत उस शर्ट पर लिखे ‘गुड बैटिंग’ यानि ‘अच्छी बल्लेबाजी’ शब्दों को अब पूरी तरह से चरितार्थ करके दुनिया भर में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवा रही है. 

उन्हें बचपन से केवल सहवाग को बल्लेबाजी करते हुए देखना पसंद था. सहवाग की तरह उनका भी मूलमंत्र है ‘गेंद देखो और हिट करो’ लेकिन 2016 में जब उन्होंने अजिंक्य रहाणे को नेट्स पर बल्लेबाजी करते हुए देखा तो तब लगा कि ‘बल्लेबाजी के लिए धैर्य’ भी जरूरी है. 

हरमनप्रीत हालांकि अब भी सहवाग के मूलमंत्र पर ही चलती है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे विश्व कप 2017 के सेमीफाइनल में खेली गई नाबाद 171 रन की पारी हो या न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टी-20 में खेली गई 103 रन की पारी, हरमनप्रीत को देखकर लगता है कि उनका लक्ष्य गेंद को सीमा पार पहुंचाना ही होता है. 

अपने विस्फोटक तेवरों के कारण ही वह ऑस्ट्रेलिया के बिग बैश लीग और इंग्लैंड की किया सुपर लीग में खेलने वाली पहली भारतीय क्रिकेटर बनी. अब वह भारत की टी-20 टीम की कप्तान हैं और यही आक्रामकता उसकी कप्तानी में दिखती है. 

पूर्व क्रिकेटर और अब सीओए सदस्य डायना एडुल्जी की पहल और सचिन तेंदुलकर की सिफारिश पर रेलवे में नौकरी पाने वाली हरमनप्रीत का पिछले दो वर्षों के दौरान विवादों से भी वास्ता पड़ा. महिला टीम के कोच तुषार अरोठे ने पद से हटाए जाने के बाद हरमनप्रीत पर निशाना साधा और पंजाब पुलिस में नौकरी मिलने पर उनकी डिग्री को जाली बताया गया ,लेकिन यह 29 वर्षीय क्रिकेटर सीख गई है कि मैदान से इतर की चीजें उसका ध्यान भंग नहीं कर सकती हैं. 

बता दें कि कप्तान हरमनप्रीत ने 51 गेंद में नाबाद 103 रन की पारी खेली, जिससे भारत ने आईसीसी विश्व टी-20 के पहले मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 34 रन की आसान जीत दर्ज की. अपनी इस पारी में उन्होंने सात चौके और आठ छक्के लगाए. वह टी-20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में शतक बनाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं. इस दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' भी चुना गया.