‘तू क्या सहवाग के साथ ओपन करेगी’ जैसे ताने सुने, अब अपने बल्ले से कर रहीं बोलती बंद

अक्सर हरमनप्रीत कौर को उसके भाई के दोस्त चिढ़ाते थे, ‘‘हमारे पास तो विकल्प (पुरुष क्रिकेट) है, तू क्या सहवाग के साथ ओपन करेगी.’’ 

‘तू क्या सहवाग के साथ ओपन करेगी’ जैसे ताने सुने, अब अपने बल्ले से कर रहीं बोलती बंद
हरमनप्रीत कौर की क्रिकेटर बनने की राह नहीं थी आसान (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: उन्होंने पिता को ‘बेटी को खिला के क्या करोगे’ की सलाह देने वालों को भी सुना और खुद ‘तू क्या सहवाग के साथ ओपन करेगी’ जैसे ताने भी सुने, लेकिन इससे भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर का हौसला कम नहीं हुआ. आज उसका बल्ला हर सवाल का जवाब दे रहा है तथा उसकी तुलना किसी और से नहीं बल्कि उसके आदर्श क्रिकेटर रहे वीरेंद्र सहवाग से की जा रही है. 

वह 20 जुलाई 2017 का दिन था जब इंग्लैंड के डर्बी में ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीम के खिलाफ हरमनप्रीत के बल्ले की धमक पूरे क्रिकेट जगत ने सुनी थी. इसके ठीक 477 दिन बाद गुयाना के प्रोविडेन्स में उनके बल्ले से एक और धमाकेदार पारी निकली है जिस पर पूरा विश्व क्रिकेट गौरवान्वित महसूस कर रहा है. इस उपलब्धि के साथ ही हरमनप्रीत टी-20 अंतरराष्ट्रीय में शतक जड़ने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बन गई हैं. 

हरमनप्रीत के लिए यहां तक पहुंचने की राह कतई आसान नहीं रही. यह अलग बात है कि पिता हरमंदर और मां सतविंदर कौर ने हमेशा बेटी का साथ दिया. जब पिता ने देखा कि बेटी हाथ में हॉकी की स्टिक लेकर क्रिकेट खेल रही है तो उनको भी लगने लगा कि उनकी बेटी क्रिकेट के लिए ही बनी है.

लेकिन मोगा में कोई क्रिकेट अकादमी नहीं थी. हरमनप्रीत अपने छोटे भाई गुरजिंदर भुल्लर और उनके दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलती थी. उस दौर में महिला क्रिकेट खास लोकप्रिय नहीं था और इसलिए अक्सर हरमनप्रीत कौर को उसके भाई के दोस्त चिढ़ाते थे, ‘‘हमारे पास तो विकल्प (पुरुष क्रिकेट) है, तू क्या सहवाग के साथ ओपन करेगी.’’ 

हरमनप्रीत के क्रिकेट प्रेम को तब पंख लगे जब ज्ञान ज्योति स्कूल अकादमी के कोच कमलदीश सिंह सोढ़ी की नजर पर उन पर पड़ी. लेकिन घर से 30 किमी दूर बेटी को भेजना और उसका पूरा खर्च उठाना जिला अदालत में क्लर्क पद पर कार्यरत हरमंदर सिंह के लिए आसान नहीं था. सोढ़ी ने इसका भी हल निकाला. हरमनप्रीत के लिए मुफ्त कोचिंग और ठहरने की व्यवस्था करके. यही वजह है कि सोढ़ी को हरमनप्रीत अपना गॉडफादर मानती है. 

और आखिर में सात मार्च 2009 को हरमनप्रीत को बल्लेबाजी ऑलराउंडर के रूप में भारतीय टीम की तरफ से पहला वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिल गया. ऑफ स्पिन करने वाली यह खिलाड़ी जल्द ही टी-20 टीम की सदस्य भी बन गई, लेकिन 2013 तक अपनी खास पहचान नहीं बना पाई. इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में 2013 में उन्होंने नाबाद 107 रन की पारी खेली जिसकी विरोधी टीम की कप्तान चार्लोट एडवर्ड्स ने भी तारीफ की थी. इसके बाद हरमनप्रीत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

बता दें कि कप्तान हरमनप्रीत ने 51 गेंद में नाबाद 103 रन की पारी खेली, जिससे भारत ने आईसीसी विश्व टी-20 के पहले मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 34 रन की आसान जीत दर्ज की. अपनी इस पारी में उन्होंने सात चौके और आठ छक्के लगाए. वह टी-20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में शतक बनाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं. इस दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' भी चुना गया.