क्रिकेट में 'Timed out' का दिलचस्प है इतिहास, जानिए कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

क्रिकेट में Timed Out ऐसा नियम है जिसके बारे में हर क्रिकेट फैंस को जानकारी नहीं होती है, क्योंकि इस तरीके से आउट होने वालों की तादात काफी कम है.

क्रिकेट में 'Timed out' का दिलचस्प है इतिहास, जानिए कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

नई दिल्ली: क्रिकेट में आउट होने के प्रचलित तरीकों को तो हर कोई जानता है. लेकिन कुछ तरीके ऐसे भी हैं, जिनका उपयोग इतना कम हुआ है कि बहुत सारे क्रिकेटर भी उनके बारे में नहीं जानते होंगे. ऐसा ही एक तरीका है बल्लेबाज को 'टाइम्ड आउट' (Timed out) घोषित किए जाने का. आइए आपको बताते हैं कि इस नियम में कोई बल्लेबाज कब और क्यों आउट दिया जाता है. लेकिन इससे पहले आपको बताएंगे उस मैच के बारे में, जिसके कारण क्रिकेट में इस नियम को बनाना पड़ा. यह मैच 101 साल पहले 22 मई के ही दिन इंग्लैंड में खेला गया था.

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आर्थर हैगेट बने थे टाइम्ड आउट के पहले शिकार

101 साल पहले 1919 में ससेक्स और समरसेट के बीच टांटन के मैदान पर इंग्लिश काउंटी क्रिकेट मैच खेला गया. इसी मैच में ससेक्स के बल्लेबाज हारोल्ड हैगेट (Harold Heygate) को मैदान पर समय से नहीं पहुंचने के कारण अंपायर ने टाइम्ड आउट घोषित कर दिया था. हालांकि हैगेट की टांग घायल थी और वे क्रिकेट की जर्सी के बजाय सामान्य कपड़े पहनकर लंगड़ाते हुए पिच पर अंपायर को ये बताने आए थे कि उन्हें थोड़ा समय लगेगा. लेकिन अंपायर ने उनकी इस अपील को मानने से इंकार कर दिया और ससेक्स की पारी वहीं खत्म हो गई.

टाइम्ड आउट नियम नहीं होने से घोषित हुए एब्सेंट

हैगेट को भले ही अंपायर ने समय पर पिच पर नहीं पहुंचने के कारण टाइम्ड आउट दिया था, लेकिन तब तक क्रिकेट में ऐसा कोई नियम नहीं था. इसके चलते स्कोरर को स्कोरशीट पर हैगेट के नाम के आगे आउट होने के कारण वाले कॉलम में 'एब्सेंट (गैरहाजिर)' लिखना पड़ा था.

हैगेट को आउट देने से मैच हो गया टाई

महज 2 दिन में खत्म हो गए इस मैच में समरसेट ने पहली पारी में 243 रन बनाए थे, जिसके जवाब में ससेक्स की पहली पारी 242 रन पर सिमट गई. दूसरी पारी में समरसेट महज 103 रन ही बना सकी. जवाब में उतरी ससेक्स ने अपने 9 विकेट 104 रन पर खो दिए थे. इसके बाद हैगेट आखिरी बल्लेबाज बचे थे और इसी कारण वे चोटिल होने के बावजूद टीम को जीत दिलाने के लिए मैदान पर आना चाहते थे. लेकिन अंपायरों के उन्हें आउट दे देने से मैच वहीं पर टाई रिजल्ट के साथ खत्म हो गया और ससेक्स मैच जीतने का मौका चूक गई.

कई महीने तक चली थी बहस

हैगेट को आउट दिए जाने के तरीके को लेकर कई महीने तक बहस चलती रही थी. बाद में एमसीसी (क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था) ने अंपायरों के निर्णय को सही ठहराकर इस बहस को खत्म किया था. आगे ऐसी किसी बहस की गुंजाइश नहीं छोड़ने के लिए एमसीसी ने बाद में क्रिकेट के अंदर टाइम आउट का नियम ही बना दिया था.

क्या है टाइम आउट का नियम

टाइम आउट के नियम में दरअसल एक बल्लेबाज के आउट होने पर दूसरे बल्लेबाज के पवेलियन से पिच तक पहुंचने का समय निर्धारित किया गया है. इस नियम के तहत अगर कोई बल्लेबाज 2 मिनट के अंदर मैदान में नहीं उतरता है तो विपक्षी टीम उसे टाइम आउट दिए जाने की मांग कर सकती है. खुद अंपायर भी सज्ञान लेते हुए उस बल्लेबाज को टाइम आउट घोषित कर सकते हैं.

इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं हुआ आज तक कोई टाइम आउट

'टाइम आउट' के नियम से आज तक इंटरनेशनल क्रिकेट में कोई भी बल्लेबाज आउट नहीं हुआ है. टाइम आउट तरीके से क्रिकेट के इतिहास में प्रथम श्रेणी स्तर पर भी महज 5 ही क्रिकेटर आउट माने गए हैं, जिसमें आखिरी बार आउट होने वाले बल्लेबाज रेयान ऑस्टिन थे, जो वेस्टइंडीज के घरेलू क्रिकेट में सेंट विंसेंट मैदान पर वर्ष 2013-14 में कंबाइंड कैंपस टीम के लिए खेलते हुए विंडवर्ड आइसलैंड के खिलाफ आउट हुए थे.