Kolkata Test: डे-नाइट मैच से पहले बोले साहा, पिंक बॉल से आसान नहीं होगी विकेटकीपिंग

Pink ball test: भारतीय विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा का मानना है कि गुलाबी गेंद से गेंदबाजों और बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें तो होंगी ही, विकेटकीपिंग में भी दिक्कतें आएंगी.

Kolkata Test: डे-नाइट मैच से पहले बोले साहा, पिंक बॉल से आसान नहीं होगी विकेटकीपिंग
साहा को लगता है कि गुलाबी गेंद स्विंग ज्यादा होने से परेशानियां पैदा करेगी. (फोटो: IANS)

कोलकाता: ईडन गार्डन्स में  भारत और बांग्लादेश (India vs Bangladesh) के बीच होने वाले टेस्ट मैच को लेकर गुलाबी गेंद की खूब चर्चा हो रही है. इस मैच में फैंस में गुलाबी गेंद के कारण गेंदबाजी में होने वाले असर को लेकर भी बहुत बातें की जा रही हैं, लेकिन भारतीय विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा (Wriddhiman Saha) ने इस बात पर ध्यान दिलाया है कि इससे विकेटकीपिंग पर भी असर होगा. 

यह है चुनौती
साहा ने कहा है कि दिन-रात टेस्ट मैच में गुलाबी गेंद से विकेटकीपिंग करना विकेटकीपरों के लिए चुनौतीपूर्ण है. साहा ने कहा, "(गुलाबी) गेंद को पकड़ना चुनौतीपूर्ण है. अगर यह स्लिप के लिए चुनौतीपूर्ण है तो मेरे लिए भी है क्योंकि मैं भी स्लिप के बगल में खड़ा रहता हूं. इसके अलावा तेज गेंदबाज जब गेंद फेंकते हैं तो यह गेंद लहराती है. यह एक फैक्टर हो सकता है, लेकिन मुझे चुनौती स्वीकार है. हम पेशेवर हैं."

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साझा किया अपना अनुभव
भारतीय खिलाड़ियों में साहा और मोहम्मद शमी को ही घरेलू क्रिकेट में दिन-रात मैच खेलने का अनुभव है. दोनों खिलाड़ी 2016 में ईडन गार्डन्स में सीएबी के सुपर लीग फाइनल में दिन-रात क्रिकेट खेल चुके हैं. उन्होंने कहा, "यह चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर गेंद को पकड़ते समय. हमें इससे तालमेल बिठाना होगा. गेंद नई है और यह तेज गेंदबाजों के लिए मददगार साबित हो सकती है. यह बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है."

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क्या पेसर्स को मिलेगी मदद
यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय पेस तिकड़ी शमी, उमेश यादव और ईशांत शर्मा को इस गेंद से मदद मिलेगी, उन्होंने कहा, "गेंद गुलाबी हो या लाल. उनके (शमी के) लिए यह वैसा ही रहेगा. शमी ने हाल के मैचों में अच्छा किया है. वह किसी भी परिस्थिती में अच्छा करते हैं. रांची में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था. वह गति के साथ रिवर्स स्विंग हासिल करते हैं."

स्पिनर्स को नहीं मिलेगी मदद.
इस मैच में गुलाबी गेंद से  पेसर्स को तो मदद मिलने की बात की जा रही है, लेकिन स्पिनर्स के लिए गुलाबी गेंद के साथ डे-नाइट टेस्ट खेलना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा. लाल गेंद डाई की जाती है जिसकी चमक खोने के बाद वह स्पिनर्स के लिए सहायक होती है. वहीं गुलाबी गेंद पर रंग की परत चढ़ाई जाती है जिससे उसकी चमक जल्दी न जा सके और बल्लेबाजों को सफेद रोशनी में गेंद देखने में दिक्कत न हो. ऐसे में स्पिनर्स को इस गेंद से मदद कम ही मिलने की संभावना है. 
(इनपुट आईएएनएस)