इस तरह से बदल रही है टीम इंडिया, इंदौर टेस्ट के साथ विराट ने भी किया इशारा

India vs Bangladesh: इंदौर टेस्ट में टीम इंडिया में कई किस्म के बदलाव दिखाई दिए जिससे पता लगता है कि विराट कोहली की टीम पूरी तरह से नई चुनौतियों के लिए खुद को कितना बदल रही है.

इस तरह से बदल रही है टीम इंडिया, इंदौर टेस्ट के साथ विराट ने भी किया इशारा
टेस्ट टीम इंडिया में पिछले एक साल में ही काफी बदलाव आए हैं. (फोटो: ANI)

नई दिल्ली: इंदौर में भारत और बांग्लादेश (India vs Bangladesh) के बीच हुए टेस्ट मैच का नतीजा टीम इंडिया (Team India) में पिछले कुछ सालों से आ रहे चारित्रिक बदलाव का साफ इशारा कर रहा है. चाहे भारतीय तेज गेंदबाजों (Indian Pacers) की बढ़ती भूमिका हो या फिर भारत की जीतों में टीम वर्क का बढ़ता योगदान.न केवल टीम इंडिया (Team India) ने अपना नजरिया बदला है, बल्कि टीम खुद को हर हालात के मुताबिक तैयार रहने की कामयाब कोशिश करती दिख रही है. इंदौर टेस्ट में ऐसे ही कुछ बदलाव की झलकियां देखने को मिली हैं. खुद कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) का मैच के बाद का बयान इस ओर संकेत कर रहा है.

1. पिच पर खत्म होती निर्भरता
हाल ही में देखने को मिल रहा है कि टीम इंडिया (Team India) मैच जीत रही है और इसका पिच के मिजाज से ज्यादा संबंध नहीं दिखा. भारतीय पेसर्स जहां हर तरह की पिच में बेस्ट परफॉर्म करने के लिए जोर लगा रहे हैं  बुमराह के टीम इंडिया (Team India) में आने के बाद से ऐसा ज्यादा देखने को मिल रहा है. वहीं स्पिनर्स भी तेज पिचों में अपनी भूमिका को लेकर बहुत गंभीर होते दिख रहे हैं. जडेजा ने वेस्टइंडीज में ,और अश्विन और कुलदीप ने ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर यह साबित भी किया है. अब कोलकाता में गुलाबी गेंद की चुनौती को सभी गेंदबाज एक चुनौती के तौर पर ले रहे हैं. यह भारतीय क्रिकेट में बहुत बड़े बदलाव का संकेत है.

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2. एक हीरो के भरोसे नहीं है अब टीम 
इंदौर टेस्ट में यह साफ दिखा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा  के नहीं चलने के बाद भी टीम इंडिया (Team India) ने 493 रन का पहाड़ खड़ा कर दिया. मैच में मयंक ने दोहरा शतक लगाया और रहाणे, पुजारा, जडेजा ने हाफ सेंचुरी लगाई. इससे साफ है कि टीम इंडिया (Team India) अब एक स्टार खिलाड़ी पर निर्भर रहकर नहीं चलने वाली. वहीं गेंदबाजी में सभी गेंदबाज चले. शमी ने सबसे ज्यादा सात विकेट लिए. अश्विन ने पांच, उमेश ने चार और इशांत ने तीन विकेट लिए. सभी गेंदबाजों ने एक दूसरे का भरपूर साथ दिया और एक के दबाव से दूसरे को विकेट मिलने में मदद भी मिली.

3. घरेलू इंटरनेशनल मैचों में पेसर्स की बढ़ती भूमिका
कुछ साल पहले तक भारतीय पिचों को स्पिन के अनुकूल माना जाता था. घरेलू इंटरनेशनल मैचों में स्पिनर्स का बोलबाला रहता था. पहले कभी देखा गया कि भारत में कोई मैच हो और टीम इंडिया (Team India) तीन पेसर्स के साथ मैदान में उतर रही है. भारत में केवल मोहाली की ही पिच ऐसी मानी जाती थी कि वह पेसर्स की सहायता करती है. हाल ही के कुछ सालों में पिचों का मिजाज तो बदला ही, अब भारत में हर तरह के मैचों में पेसर्स की भूमिका भी बढ़ रही है. ऐसा आईपीएल तक के मैचों में दिखाई दे रहा है. इंदौर में भारतीय पेसर्स ने 20 में से 14 विकेट लिए वह इस बाद का सबूत है.

4. मजबूत होती बेंच स्ट्रेंथ
पिछले कुछ सालों में टीम इंडिया (Team India) का सबसे मजबूत पक्ष उसकी बेंच स्ट्रेंथ है. जसप्रीत बुमराह के बिना दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ क्लीन स्वीप और फिर इंदौर में बड़ी जीत यही कहती है. इसमें भारतीय तेज गेंदबाजी का आक्रमण की धार में कोई कमी दिखाई नहीं दी. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया (Team India) के पेसर्स ने तीन मैचों में 6, 10, और 10 विकेट लेकर साबित किया कि बुमराह के बिना भी टीम में काफी दम है. वहीं बल्लेबाजी में शिखर धवन, केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों के बिना भी टीम इंडिया (Team India) बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. 

5. नए खिलाड़ियों के लिए नए तरह के सबक 
अब टीम इंडिया (Team India) में जगह पाना तो पहले की ही तरह मुश्किल है, लेकिन टीम में बने रहने के लिए निरंतरता एक अहम मुद्दा होता जा रहा है. टेलैंट की भारत में कभी कमी नहीं रही. पिछले कुछ सालों में चयनकर्ताओं का काम चुनौतीपूर्ण इसलिए ज्यादा हो गया है क्योंकि खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बहुत से मंच मिल रहे हैं. अब घरेलू क्रिकेट में किसी को नजरअंदाज करना नामुमकिन है. मंयक को लंबे समय बाद टीम इंडिया (Team India) में मौका मिलना इसका सटीक उदाहरण है. मयंक ने देर से मिले मौके को बखूबी भुनाया और अब वे टीम के अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं.