भारत में एक शानदार कोच यह भी है जो दे रहा है लगातार नतीजे
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भारत में एक शानदार कोच यह भी है जो दे रहा है लगातार नतीजे

विजय हजारे ट्रॉफी में आमतौर पर खिलाड़ी और कोच  अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद गुमनाम रहते हैं लेकिन सनथ कुमार ने लगातार परिणाम देकर सबका ध्यान खींचा है. 

भारत में एक शानदार कोच यह भी है जो दे रहा है लगातार नतीजे

नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट में एक साथ दो तरह की दुनिया दिखती है. एकतरफ विराट कोहली, रोहित शर्मा और रवि शस्त्री जैसी शख्सियतों के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल का ग्लैमर है तो वहीं दूसरी तरफ रणजी ट्राफी, विजय हजारे ट्राफी और सैयद मुश्ताक अली ट्राफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट है जिसके ज्यादातर खिलाड़ियों के साथ कोच भी गुमनामी में रहते हैं. एक तरफ टीम इंडिया के लिए हमेशा ही कोच की तलाश बढ़-चढ़ कर होती है. देशी बनाम विदेशी कोचों पर जम कर बहस होती है ऐसे में घरेलू क्रिकेट टीमों के कोचों के बारे में चर्चा करना तो दूर कोई सोचना भी पसंद नहीं करता. लेकिन जब कोई घरेलू कोच अपने प्रभाव से टीम का प्रदर्शन बढ़िया कर दे तो कब तक वह गुमनामी में रह सकेगा. 

ऐसे ही कोच हैं आंध्र प्रदेश टीम के के. सनथ कुमार जिनकी टीम गुरुवार को विजय हजारे ट्राफी के क्वार्टर फाइनल में दिल्ली की मजबूत टीम से भिड़ेगी. विजय हजारे ट्रॉफी के ग्रुप मैचों के ग्रुप सी में आंध्र की टीम 20 अंकों के साथ टॉप पर रहीं जिसने अपने सभी छह मैच जीते थे.

ग्रुप में उसके अलावा मुंबई, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, गोवा और तमिलानाडू की टीम थी.  सनथ कुमार इससे पहले 2015-16 में असम जैसी कमजोर मानी जानी टीम को रणजी ट्राफी के सेमीफाइनल में पहुंचा चुके हैं. 55 साल के इस कोच ने एक बार फिर कमजोर समझी जाने वाली टीम को नाकआउट में पहुंचाने में अहम भूमिका निभायी. 

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सनथ कुमार ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरने की कला से संबंधित है ताकि आप शीर्ष राज्यों के खिलाड़ियों से खुद को कम ना आंके. अपने कोचिंग के वर्षों में मैंने जो बात महसूस की वह यह है कि दो राज्यों के खिलाड़ियों के कौशल और प्रतिभा में ज्यादा फर्क नहीं होता.’’ 

मानसिकता होती है खास
उन्होंने कहा, ‘‘प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक अच्छी टीम और औसत टीम में मानसिकता का अंतर होता है. जहां से मेरा काम शुरू होता है. मेरा काम यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों में हीन भावना नहीं आए.’’ सनथ कुमार नामी खिलाड़ियों से भरी कर्नाटक टीम के भी कोच रहे हैं और वह मजबूत और कमजोर टीम के खिलाड़ियो की मानसिकता को अच्छे से समझते है. उनका कहना है कि कर्नाटक की टीम से पहले भी कई अंतराराष्ट्रीय दिग्गज खिलाड़ी आए हैं. लेकिन आंध्र की टीम में पहले केवल एमएसके प्रसाद और वेणुगोपाल राव ही आए हैं.

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इस टीम से जुड़ने के बाद कुछ खराब प्रदर्शनों को देखकर मैंने देखा कि खिलाड़ी एक तरह से हथियार ही डाल चुके थे. मुझे गर्व है कि मैच की परिस्थिति जैसी भी हो अब उन्होंने आसानी से हथियार डालना सीख लिया है. और आंध्र की इस बार की सफलता का राज यही है उनकी जूझने की इच्छाशक्ति, कुमानर कहा कि टीम से जुड़ने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता थी खिलाड़ियों की फिटनेस. इसके बाद उन्होंने फिल्डिंग कोच को ढूंढा. उनकी तला सुबादीप घोष पर जाकर खत्म हुई. सुबादीप अभी दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ जुड़ चुके हैं. हालाकि क्षेत्ररक्षण में हमारा स्तर काफी उठ चुका है. बल्लेबाजी में हनुमा विहारी और रिकी बुई हमारे स्टार परफॉर्मर्स हैं. 
(इनपुट भाषा)

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