वो 5 मौके जब पिता-पुत्र ने मैच में एक साथ की बल्लेबाजी, एक भारतीय जोड़ी भी है शामिल

क्रिकेट को बेहतरीन करिश्मे का खेल समझा जाता है, ऐसा काफी कम होता है जब पिता और पुत्र एकसाथ मैदान में बैटिंग करते हुए नजर आते हैं.

वो 5 मौके जब पिता-पुत्र ने मैच में एक साथ की बल्लेबाजी, एक भारतीय जोड़ी भी है शामिल
शिवनारायण चंद्रपॉल और उनके बेटे तेगनारायण. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: क्रिकेट में महान बल्लेबाजों और गेंदबाजों के नक्शेकदम पर चलकर उनके बच्चों के भी इसी खेल में नाम कमाने के उदाहरण तो बहुत सारे मिल जाएंगे. लेकिन ऐसे मौके गिनती के ही हैं, जब पिता-पुत्र की जोड़ी को एकसाथ पिच पर बल्ले से कमाल करते हुए देखने का मौका दर्शकों को मिल गया हो. सुनने में आपको थोड़ा नामुमकिन सा जरूर लग रहा होगा, लेकिन क्रिकेट इतिहास में पिता-पुत्र की 5 जोड़ियां ऐसी रही हैं, जिन्होंने पिच पर एक साथ उतरकर अपनी बल्लेबाजी से दर्शकों को हैरान किया है. इनमें एक भारतीय पिता-पुत्र की जोड़ी भी शामिल है तो एक पिता-पुत्र के पुरखों का नाता भारतीय धरती से रहा है यानी उनकी नसों में भी भारतीय खून ही दौड़ता है. आइए आपको बताते हैं इन 5 अनूठे जोड़ों के बारे में.

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लाला अमरनाथ के साथ उतरे उनके बेटे सुरिंदर
शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी होगा जो भारतीय क्रिकेट के पहले टेस्ट शतकधारी लाला अमरनाथ के बारे में नहीं जानता होगा. 1933 में मुंबई के मैदान पर अपने पहले ही टेस्ट मैच में शतक ठोकने वाले लाला अमरनाथ के दोनों बेटे मोहिंदर अमरनाथ और सुरिंदर अमरनाथ भी टीम इंडिया के लिए खेले थे. मोहिंदर जहां 70 और 80 के दशक के स्टार क्रिकेटर थे और 1983 वर्ल्ड कप जीत में फाइनल के 'मैन ऑफ द मैच' भी बने थे, वहीं 10 टेस्ट खेलने वाले बडे़ बेटे सुरिंदर के बारे में कम लोग ही जानते हैं.

अपने करियर में 24 टेस्ट मैच खेलने वाले लाला अमरनाथ ने अपना आखिरी टेस्ट मैच 1955 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था. इसके बावजूद 1963 में एक ऐसा मौका आया था, जब लाला और उनके बेटे सुरिंदर एक साथ पिच पर उतरे थे. यह मुंबई में एक चैरिटी मैच था, जिसमें लाला अमरनाथ 52 साल की उम्र में हिस्सेदारी कर रहे थे. उनके बेटे सुरिंदर तब महज 15 साल के थे और पहली बार बड़े खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने का मौका उन्हें मिला था. 

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शिवनारायण चंद्रपॉल की तरह पिच पर गिल्ली ठोकने वाले तेग
वेस्टइंडीज के भारतीय मूल के दिग्गज बल्लेबाज शिवनारायण चंद्रपॉल तो आपको याद होंगे. वही जो बल्लेबाजी के लिए आने के बाद पहले स्टंप की गिल्ली उठाकर पिच पर ठोकते थे. वेस्टइंडीज के लिए सबसे ज्यादा 164 टेस्ट मैच खेलकर 11,867 रन बनाने वाले शिवनारायण ने 2015 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन घरेलू क्रिकेट में वे खेलते रहे थे. 

साल 2017 में दर्शकों को तब एक अनोखा नजारा देखने को मिला था, जब पिच पर उन्होंने चंद्रपॉल के अलावा एक और बल्लेबाज को उन्हीं के अंदाज में गिल्ली ठोकते हुए देखा. ये बल्लेबाज था शिवनारायण का बेटा तेगनारायण चंद्रपॉल, जो उसी मैच में अपने पिता के साथ खेल रहा था. पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने उस टेस्ट मैच में 256 रन की साझेदारी की थी. तेगनारायण को वेस्टइंडीज के लिए खेलने का दावेदार माना जा रहा है.

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इंग्लैंड के क्वाफे पिता-पुत्र की जोड़ी
इंग्लैंड के लिए महज 7 टेस्ट खेलने के बावजूद विली क्वाफे को अपने जमाने के सबसे ज्यादा स्टाइलिश बल्लेबाजों में से एक गिना जाता है. विली के बेटे बर्नार्ड भी बेहतरीन क्रिकेटर थे और उन्होंने 319 प्रथम श्रेणी मैच खेले थे. दोनों पिता-पुत्र की जोड़ी ने वारविकशायर के लिए 1 या 2 नहीं बल्कि पूरे 20 मैच में एकसाथ मैदान पर समय बिताया. इसके बाद बर्नार्ड के दूसरे टीम के लिए खेलना शुरू करने से ये सिलसिला यहीं टूट गया. 

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जिंबाब्वे के स्ट्रीक परिवार का भी है जलवा
जिंबाब्व के पूर्व कप्तान और अपने जमाने के बेहतरीन ऑलराउंडर हीथ स्ट्रीक को सभी जानते हैं. जिंबाब्वे के लिए 65 टेस्ट मैच में 216 विकेट लेने और 2000 से ज्यादा रन बनाने वाले हीथ स्ट्रीक ने रंगभेद के विरोध में अपना करियर बीच में ही छोड़ दिया था. हीथ के पिता डेनिस स्ट्रीक भी बेहतरीन क्रिकेटर थे, लेकिन उनके करियर का असली दौर जिंबाब्वे को इंटरनेशनल क्रिकेट में टेस्ट मैच खेलने का दर्जा मिलने से पहले ही बीत गया था. 

डेनिस ने क्रिकेट छोड़ने के बाद जिंबाब्वे के लिए लॉन बॉल्स खेल में इंटरनेशनल लेवल पर हिस्सेदारी की थी. लेकिन 1996 में डेनिस ने अचानक करीब 11 साल बाद जिंबाब्वे की घरेलू क्रिकेट में लोनर्हो लोगान कप के मैच में माताबेलेलैंड के लिए मैच में हिस्सेदारी की. इस मैच में दर्शकों के लिए अजब नजारा था, जब एक छोर से हीथ तो दूसरे छोर से डेनिस गेंदबाजी कर रहे थे. इस मैच में उनकी टीम ने मैशोनालैंड कंट्री को हराने में सफलता हासिल की थी.

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गन परिवार ने एक ही मैच में ठोका शतक
इंग्लैंड की काउंटी टीम नाटिंघमशायर के लिए उस समय अनूठा रिकॉर्ड बना, जब 1931 में वारविकशायर के खिलाफ मुकाबले में जॉर्ज वेर्नोन गन ने अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक बनाया. जब वेर्नोंन गन 100 रन पर थे तो उसी समय उनके पिचा जॉर्ज गन सीनियर 53 साल की उम्र में 183 रन ठोक चुके थे. यह क्रिकेट इतिहास में इकलौता मौका है, जब पिता-पुत्र की जोड़ी में से दोनों ने 'थ्री फिगर स्कोर' बनाया था. जॉर्ज सीनियर ने इंग्लैंड के लिए भी टेस्ट क्रिकेट में अपना जलवा दिखाया था, लेकिन वेर्नोन कभी इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेल पाए. इसके बावजूद पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने नाटिंघमशायर के लिए एकसाथ 34 मैच में हिस्सेदारी की थी, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है. 

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