म्यूजियम से गायब हुए हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह के मेडल, ‘इस वजह’ से नहीं करेंगे FIR

94 वर्षीय पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर के परिवार ने खोए मेडल के संबंध में एफआईआर दर्ज कराने से मना कर दिया है.

म्यूजियम से गायब हुए हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह के मेडल, ‘इस वजह’ से नहीं करेंगे FIR
बलबीर सिंह सीनियर ने अपने मेडल के न मिल पाने पर भी एफआईआर दर्ज न कराने का फैसला किया है (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : खेल की दुनिया में 94 वर्षीय पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर अनजाना नाम नहीं हैं. वे भारत की उस हॉकी टीम के सदस्य थे जिसने तीन ओलंपिक में गोल्ड मैडल जीते. लंदन (1948), हेल्सिंकी (1952) और मेलबोर्न (1956) में खेली इस टीम में हॉकी के जादूगर ध्यानचंद भी खेले थे. बलबीर सिंह सीनियर ऐसे हॉकी खिलाड़ी हैं जिन्होंने सबसे अधिक हॉकी गोल का रिकार्ड अपने नाम किया है. 1952 के ओलपिंक के दौरान फायनल में नीदरलैंड के विरूद्ध खेलते हुए बलबीर सिंह ने पांच गोल कर रिकॉर्ड बनाया था. उन्हें बलबीर सिंह सीनियर एक अन्य हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह से अलग पहचान के लिए कहा जाता है. 

 बलबीर सिंह सीनियर भारतीय हॉकी टीम के मैनेजर और चीफ कोच 1975 में थे. उनके कोच रहते भारतीय टीम भारत ने पुरूषों का हॉकी वर्ल्डकप जीता. 1971 में भारत ने पुरूषों के हॉकी वर्ल्डकप में कांस्य पदक जीता.  2012 के लंदन ओलंपिक के दौरान, रॉयल ओपेरा हाउस के द्वारा सिंह का सम्मान किया गया. 

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बलबीर सिंह ने 1985 में स्पोर्ट्स म्यूजियम में रखने के लिए साई पटियाला को अपने 36 मेडल, 120 तस्वीरें और ओलंपिक के 2 ब्लेजर सौंपे थे.  जिनके गुम होने की जानकारी उनको 2012 में उस समय मिली जब लंदन ओलंपिक में सम्मानित होने के लिए उनको आमंत्रित किया गया. लंदन ओलंपिक में सम्मानित होने वाले खिलाड़ियों को अपना कलेक्शन डिस्प्ले करना था. जब बलबीर सीनियर ने डिस्प्ले के लिए अपने मेडल साई से मांगे तो पता चला कि वे म्यूजियम से गुम हैं.

इसके बाद से वे अपने मेडल की तलाश में जुटे हुए हैं. उनको वापस पाने के लिए वे केंद्रीय खेल मंत्रालय, खेल मंत्रियों और साई अधिकारियों के  चक्कर काट रहे हैं. परंतु अभी तक उनके हाथ खाली हैं. उनका कहना है कि अपनी धरोहर को वापस पाने की ललक तो है, लेकिन इसके लिए वे पुलिस का सहारा कभी नहीं लेंगे.

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उन्होंने कहा कि वे देश के लिए खेले हैं. यह देश ही उनकी जिंदगी है, भले ही हॉकी उनका पहला प्यार है पर देश से बढ़कर कुछ नहीं है. यदि वे एफआईआर दर्ज कराते हैं, तो विदेश में भी यह सुर्खियां बनेगी, जो उन्हें स्वीकार नहीं है. 

खेल मंत्री की तरफ से मिला आश्वासन
94 वर्षीय पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर के परिवार ने खोए मेडल के संबंध में सितंबर 2017 में केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से मुलाकात की . राठौड़ ने उन्हें मेडल दिलाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि इससे पहले 17 मई 2017 को खेल सचिव इंजेती श्रीनिवास ने साई की ओर से एफआईआर कराने की पेशकश की, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है. उनका कहना है कि साई की ओर से पटियाला पुलिस में मेडल के मिसिंग की रिपोर्ट दी गई है.

Sports minister Rajyavardhan singh Rathore
खेल मंत्री राज्यावर्धन सिंह राठौर से बलबीर सिंह को उम्मीद है कि वे उनके मेडल दिलाने में मदद करेंगे (फोटो : फाइल)

बलबीर सिंह सीनियर की बेटी सुशबीर एवं बेटे कबीर ने बताया कि साई की ओर से पुलिस को दी गई मिसिंग की सूचना भी सही नहीं है. मिसिंग रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्लेजर 10 जुलाई 2017 से नहीं मिल रहा है. जबकि  बलबीर सिंह ने जब साई पटियाला से आरटीआई के जरिये मेडल और अन्य सामान के बारे में जानकारी मांगी थी तो जुलाई 2012 में उनको लिखित जानकारी दी थी कि ब्लेजर नहीं मिल रहा है.

बलबीर सिंह सीनियर इन दिनों अपनी बेटी के साथ चडीगढ़ सेक्टर-36 में रह रहे हैं. बलबीर सिंह सीनियर ने कहा कि यदि उनको यह मेडल वापस मिल जाता है तो वह उसे देश को समर्पित कर देंगे.

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