पार्थिव पटेल ने बताया धोनी की कामयाब कप्तानी का राज, जानिए डिटेल

भारतीय क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने चेन्नई सुपरकिंग्स के मौजूदा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की जमकर तारीफ की है और उनकी कप्तानी के फायदे बताए हैं.

पार्थिव पटेल ने बताया धोनी की कामयाब कप्तानी का राज, जानिए डिटेल

नई दिल्ली: भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) ने महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी के बारे में एक बड़ा खुलासा किया है. साल 2008 से 2010 के बीच धोनी की आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलने वाले पार्थिव ने बताया कि किसी भी मैच से पहले जब धोनी टीम मीटिंग किया करते थे तो वो मीटिंग एक-दो मिनट में ही खत्म हो जाया करती थी. इसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि धोनी अपने साथियों के खेल को पूरी तरह से समझते थे और उन्हें अच्छी तरह से मालूम था कि किस खिलाड़ी से उसका बेस्ट कैसे निकलवाना है.

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साल 2008 में जब आईपीएल की शुरूआत हुई थी तो धोनी को सीएसके का कप्तान नियुक्त किया गया था. कप्तान बनते ही धोनी ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सभी को हैरान कर दिया था. दरअसल धोनी ने पार्थिव से सीएसके की पारी की शुरूआत कराने का फैसला लिया था और उनका ये दाव बिल्कुल सही साबित हुआ क्योंकि पार्थिव ने 13 मैचों में 302 रन बनाए और चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल के फाइनल में पहुंचाने में सबसे अहम योगदान दिया. हांलाकि चेन्नई टूर्नामेंट जीतने में कामयाब नहीं हो सका क्योंकि उन्हें राजस्थान रॉयल्स के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था.

पार्थिव ने एक खेल चैनल से बातचीत में कहा, 'धोनी की टीम मीटिंग 2 मिनट तक चलती थीं. 2008 के फाइनल में धोनी की अगुवाई में सीएसके की टीम मीटिंग 2 मिनट तक चली और मुझे यकीन है कि 2019 में भी वो 2 मिनट तक ही चली होगी. धोनी हमेशा अपने खिलाड़ियों से जो चाहते थे, उसको लेकर स्पष्ट थे. धोनी हमेशा अपनी टीम के संयोजन के बारे में स्पष्ट थे और हर खिलाड़ी को अपना रोल पता था. 2008 के सीजन में राजस्थान रॉयल्स की टीम 11 खिलाड़ियों के समूह की तरह खेली. यह कभी भी अकले खिलाड़ियों की टीम नहीं थी और इसीलिए हमने उन्हें गंभीरता से लिया. वे कभी भी अंडरडॉग्स नहीं थे.'

पार्थिव ने आगे ये भी बताया कि चेन्नई के महान खिलाड़ियों से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला. उन्होनें कहा, 'मैंने माइकल हसी (Michael Hussey), स्टीफन फ्लेमिंग (Stephen Fleming)और मैथ्यू हेडन (Matthew Hayden) जैसे खिलाड़ियों को देखकर 2008 में बहुत कुछ सीखा. वे कैसे बड़े मैचों के लिए तैयार होते और कैसे इसकी तैयारी करते. आईपीएल बहुत बदल गया है. हम बल्लेबाजी के आखिरी 5 ओवरों में 30 से 36 रन का लक्ष्य रखते थे. अब पहली पारी के आखिरी 5 ओवरों में 50 से 60 रन का लक्ष्य रखना नॉर्मल है.'