B'DAY SPECIAL: विस्फोटक कांबली की जगह मिली थी टीम में एंट्री, ऐसे पैर जमाए कि बरसों तक बना रहा 'दीवार'

3 अप्रैल 1996 को राहुल ने अपने वनडे क्रिकेट का आगाज किया. श्रीलंका के खिलाफ सिंगापुर में सिंगर कप में विनोद कांबली के रिप्लेसमेंट के रूप में राहुल द्रविड़ ने डेब्यू किया.

B'DAY SPECIAL: विस्फोटक कांबली की जगह मिली थी टीम में एंट्री, ऐसे पैर जमाए कि बरसों तक बना रहा 'दीवार'
श्रीलंका के खिलाफ सिंगापुर में सिंगर कप में विनोद कांबली के रिप्लेसमेंट के रूप में राहुल द्रविड़ ने डेब्यू किया था (File Photo)

नई दिल्ली: क्रिकेट में अक्सर लोग अपनी छवि आक्रामक बल्लेबाज या गेंदबाज के रूप में बनाते हैं, लेकिन विनम्रता से भी दुनिया को जीता जा सकता है यह बात भारतीय क्रिकेट में 'द वाल' कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ ने साबित करके दिखाई है. तकनीकी रूप दुनिया के सबसे मजबूत माने जाने वाले राहुल द्रविड़ अपनी विनम्रता और शानदार बल्लेबाजी से पूरी दुनिया के किक्रेट प्रेमियों को अपना मुरीद बनाया. वह धीमी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, लेकिन जब मौका पड़ा तो उन्होंने वनडे में तेज खेलकर भी दिखाया. दूसरे क्रिकेटरों की तरह ही उनके क्रिकेट करियर में भी अनेक उतार चढ़ाव आए. लेकिन उनकी हर पारी उन्हें बुलंदियों तक ले जाती रही. 

आइए जानते हैं उनके करियर के पांच यादगार पलः

विनोद कांबली के रिप्लेसमेंट के तौर पर किया डेब्यू
3 अप्रैल 1996 को राहुल ने अपने वनडे क्रिकेट का आगाज किया. श्रीलंका के खिलाफ सिंगापुर में सिंगर कप में विनोद कांबली के रिप्लेसमेंट के रूप में राहुल द्रविड़ ने डेब्यू किया, लेकिन पहले मैच में राहुल कुछ खास नहीं कर पाए. उन्हें तीन रन पर मुथैया मुरलीधरन ने आउट कर दिया. भारत की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 199 रन बनाए थे, लेकिन गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और टीम इंडिया ने श्रीलंका को 12 रनों से हरा दिया. इस मैच के साथ ही राहुल द्रविड़ के वनडे करियर का आगाज हुआ.  

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डेब्यू टेस्ट मैच में खेली 95 रनों की पारी 
किसी भी क्रिकेट खिलाड़ी के लिए डेब्यू मैच बेहद अहम होता है. 11 जनवरी 1973 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्में राहुल का डेब्यू भी कुछ अलग रहा. क्रिकेट के 'मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स में भारतीय टीम सीरीज खेलने के लिए मौजूद थी. यह 1996 की बात है. मोहम्मद अजहरुद्दीन टीम के कप्तान थे. राहुल द्रविड़ को चोटिल संजय मांजरेकर की जगह टीम में शामिल किया गया था. 20 जून 1996 को राहुल द्रविड़ ने टेस्ट में डेब्यू किया. अपने पहले ही मैच में राहुल ने धैर्यपूर्वक 95 रनों की पारी खेली. यह पारी संकते दे रही थी कि टीम इंडिया को तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज मिल गया है. 95 रनों की इस पारी के लिए राहुल ने 267 गेंदें खेली और केवल छह चौके लगाए. इस मैच में सौरव गांगुली ने शानदार 131 रनों की पारी खेली थी. मैच ड्रॉ रहा था. 

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द्रविड़ ने एकमात्र खेले टी-20 मैच में 3 छक्के जड़े थे 
15 साल के अपने लंबे करियर में राहुल द्रविड़ इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टी-20 में डेब्यू करने से पहले ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया. आज जब अधिकांश खिलाड़ी टी-20 खेलने का लोभ नहीं छोड़ पाते राहुल ने समझ लिया था कि टी-20 युवाओं का खेल है. उन्होंने एकमात्र खेले टी-20 में 21 गेंदों पर शानदार 31 रनों की पारी खेली थी. इसमें तीन छक्के शामिल थे. 

Rahul Dravid

हारे हुए मैच में हुई राहुल द्रविड़ की विदाई 
राहुल द्रविड़ ने अपना अंतिम वनडे इंग्लैंड के खिलाफ कार्डिफ में 16 सितंबर 2011 में खेला. इस मैच में विराट कोहली ने शानदार 107 रनों की पारी खेली थी. भारत ने पहले खेलते हुए 304 रन बनाए. राहुल द्रविड़ ने अपने अंतिम वन डे में शानदार 69 रनों की पारी खेली. भारत ने पचास ओवरों में 6 विकेट पर 304 रन बनाए. बारिश के कारण इंग्लैंड को 241 रनों का लक्ष्य मिला जो उसने 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया. इंग्लैंड छह विकेट से मैच जीत गया. इसी के साथ भारतीय टीम से राहुल द्रविड़ की विदाई हो गई. 

टेस्ट मैच में भी हार के साथ क्रिकेट को कहा अलविदा 
हर अच्छी चीज का अंत होता है. राहुल द्रविड़ के करियर का भी अंत निकट आ गया था. जनवरी 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडीलेड में राहुल ने अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला. ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी 7 विकेट पर 604 रन बनाकर घोषित की. इसके जवाब में भारत की टीम 272 रनों पर सिमट गई. राहल ने केवल एक रन बनाया. दूसरी पारी में भी राहुल कुछ खास नहीं कर पाए और 25 रनों पर आउट हो गए. भारत यह मैच भी हार गया, लेकिन इस हार के साथ ही राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया.