'नाखुश' राहुल द्रविड़ ने पूछा, सबने की बराबर मेहनत तो केवल मुझे ही 50 लाख क्यों?

न्यूजीलैंड से लौटने के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में शनिवार को द्रविड़ ने कहा कि इस जीत का श्रेय पूरे सपोर्ट स्टाफ को जाता है, जिसने पर्दे के पीछे कड़ी मेहनत की है.

'नाखुश' राहुल द्रविड़ ने पूछा, सबने की बराबर मेहनत तो केवल मुझे ही 50 लाख क्यों?
भारत ने चौथी बार जीता वर्ल्ड कप (File Photo)

नई दिल्ली: भारत ने ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से हराकर रिकॉर्ड चौथी बार अंडर 19 विश्व कप जीता और ‘गुरू’ राहुल द्रविड़ को उनके कोचिंग करियर की सबसे बड़ी कामयाबी से नवाजा. भारतीय गेंदबाजों ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 216 रन पर आउट कर दिया. जवाब में भारत ने सिर्फ दो विकेट खोकर 38.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया. टीम वापस स्वदेश भी लौट आई है. भारत ने चौथा खिताब जीतकर ऑस्ट्रेलिया को पछाड़ा जिसके नाम तीन खिताब हैं.  भारत ने छह साल पहले 2012 में उन्मुक्त चंद की अगुवाई में यह खिताब जीता था. विराट कोहली ने 2008 और मोहम्मद कैफ ने 2000 में खिताबी जीत दिलाई थी. 

टीम इंडिया की इस कामयाबी के बाद बीसीसाई ने भी अंडर-19 टीम के लिए इनामों की बौछार कर दी, लेकिन कोच राहुल द्रविड़ इसके बावजूद खुश नहीं हैं. उन्होंने बीसीसीआई से एक सवाल पूछा है कि नकद पुरस्कारों में उनके, सपोर्टिव स्टाफ और विनिंग टीम के बीच इतना भेदभाव क्यों? 

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गौरतलब है कि वर्ल्ड कप जीतने के बाद बीसीसीआई ने राहुल द्रविड़ के लिए 50 लाख रुपए, 20-20 लाख सपोर्टिव स्टाफ के लिए तथा 30-30 लाख हर खिलाड़ी के लिए घोषित किए हैं. राहुल द्रविड़ ने इस बात पर अपनी नाखुशी जाहिर की है कि उन्हें खिलाड़ियों से ज्यादा राशि दी जा रही है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि अंडर-19 टीम के प्रमुख कोच राहुल द्रविड़ के नकद पुरस्कारों पर अपने रिजर्वेशन हैं. 

राहुल ने कोचिंग स्टाफ को कम रुपए देने पर भी ऐतराज जताया है. सूत्रों का यह भी कहना है कि द्रविड़ ने इस बात का उल्लेख किया है कि पूरे सपोर्ट स्टाफ ने एक टीम के रूप में काम किया है. इन्हीं लोगों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि अंडर-19 टीम विजेता बन सके. बोर्ड की प्रशासनिक कमेटी ने 3 फरवरी को द्रविड़ के लिए 50 लाख, सपोर्ट स्टाफ-गेंदबाजी कोच पारम म्हाब्रे, फिल्डिंग कोच अभय शर्मा, फिजियोथेरेपिस्ट योगेश परमार, ट्रेनर आनंद दाते, मैसूह मंगेश गायकवाड़ के लिए 20-20 लाख रुपए की राशि घोषित की है. 

चौथी बार U-19 वर्ल्ड कप जीतकर द्रविड़ के 'लड़ाकों' ने बना डाले ढेर सारे रिकॉर्ड

न्यूजीलैंड से लौटने के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में शनिवार को द्रविड़ ने कहा कि इस जीत का श्रेय पूरे सपोर्ट स्टाफ को जाता है, जिसने पर्दे के पीछे कड़ी मेहनत की है. उन्होंने बड़ी विनम्रता से इस भेदभाव की चर्चा की. इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान ही राहुल द्रविड़ सुर्खियों में रहे. राहुल ने सपॉर्ट स्टाफ की तारीफ में कहा था, 'मुझे इस बात का बुरा लग रहा है कि इस सबके लिए मुझे कुछ ज्यादा ही अटेंशन मिल रहा है. मुझसे ज्यादा इसका हकदार हमारा सपॉर्ट स्टाफ है, जिन लोगों ने मिलकर यह काम किया. मैं यहां किसी का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन सपॉर्ट स्टाफ में शामिल हर व्यक्ति ने अपना बेस्ट दिया. इन्हीं के सहयोग की बदौलत हम इन लड़कों के अपने बेस्ट कर पाए.' 

Under-19 World CUP

द्रविड़ ने कहा कि वह सपोर्ट स्टाफ की भूमिका को जानते हैं. कई बार यह अपमानजनक लगता है क्योंकि मैं अटेंशन और फोकस चाहता हूं, लेकिन यह सच है कि स्पोर्ट स्टाफ के काम के बिना यह सब संभव नहीं हो सकता था. हर बार सपोर्ट स्टाफ ने बड़ा प्रयास किया, जो युवाओं के लिए जरूरी था. 

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बता दें कि राहुल द्रविड़ ने 2017 में आईपीएल में किसी टीम के साथ जुड़ने के बजाय अंडर-19 टीम का कोच बनने को प्राथमिकता दी थी. उन्होंने जूनियर और ए टीम्स की कोचिंग के लिए तीन करोड़ रुपए सालाना मिल रहे हैं. सपोर्ट स्टाफ भी बीसीसीआई के पेरोल पर है. द्रविड़ ने हालांकि, इस बात पर जोर दिया कि टीम की जीत में सपोर्ट स्टाफ की भी उतनी ही भूमिका है जितनी मेरी.