राहुल द्रविड़ के नाम दर्ज है ये अनचाहा वर्ल्ड रिकॉर्ड, आप जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत की दीवार कहे जानें वाले राहुल द्रविड़ को क्रिकेट में उनके डिफेंस के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता था.

राहुल द्रविड़ के नाम दर्ज है ये अनचाहा वर्ल्ड रिकॉर्ड, आप जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली: भारत की 'दीवार' कहे जानें वाले राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) को क्रिकेट में उनके डिफेंस के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता था. उनके बारे में ये बात मशहूर थी कि अगर आपने द्रविड़ के डिफेंस को तोड़ दिया तो समझ लीजिए आपने भारत की कमर भी तोड़ दी क्योंकि जब-जब द्रविड़ जल्दी आउट हो जाते थे तब-तब भारत की टीम संकट में पड़ ही जाती थी. ऐसे में द्रविड़ को काफी संभलकर बल्लेबाजी करनी पड़ती थी और इसी वजह से क्रिकेट पंडित उन्हें मिस्टर भरोसेमंद के नाम से भी संबोधित करते थे.

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इसमें कोई शक नहीं कि द्रविड़ में जिम्मेदारी उठाने का जज्बा बेजोड़ था पर फिर भी कई बार ऐसा हुआ जब द्रविड़ अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाने में नाकाम रहे. इसका सबसे बड़ा कारण था उनके डिफेंस का कमजोर होना जिसकी वजह से वो कई बार क्लीन बोल्ड हुए. आपको जानकर हैरानी होगी कि द्रविड़ के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार क्लीन बोल्ड होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है.

इसमें कोई दो राय नहीं कि द्रविड़ को इस रिकॉर्ड पर बिल्कुल भी गर्व नहीं होगा. देखा जाए तो द्रविड़ अपने इस रिकॉर्ड की वजह से खुद को कोसते होंगे कि कहाँ टेस्ट क्रिकेट में 13 हजार से ज्यादा रन, क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा गेंद खेलने का रिकॉर्ड, सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारियों का रिकॉर्ड और कहाँ सबसे ज्यादा बार क्लीन बोल्ड होने का रिकॉर्ड. सच में उनके लिए तो ये काफी अपमानजनक बात है. आखिर हो भी क्यों न, जिस खिलाड़ी को आउट करने में बड़े से बड़े गेंदबाज के पसीने छूट जाया करते थे, वो खिलाड़ी कैसे 55 बार टेस्ट मैचेज में क्लीन बोल्ड हो सकता है? ये बात तो सच में हैरान करने वाली है और किसी को भी ये सोचने पर मजबूर कर सकती है कि आखिर ये हुआ तो कैसे हुआ?

दरअसल द्रविड़ कभी भी अपने करियर के दौरान 55 बार क्लीन बोल्ड नहीं होते पर रिटायरमेंट से एक-दो साल पहले द्रविड़ को अंदर आने वाली गेंदों से खासी परेशानी होने लगी थी. पहले तो किसी गेंदबाज का ध्यान इस ओर कुछ खास गया नहीं पर कुछ ही समय के बाद दुनिया के सभी गेंदबाजों ने द्रविड़ की इस कमजोरी को पकड़ लिया. फिर क्या था हर किसी गेंदबाज ने द्रविड़ के लिए इसी रणनीति को फॉलो करना शुरू कर दिया और उनके ऑफ स्टंप को निशाना बनाना शुरू कर दिया. जिसकी वजह से द्रविड़ बहुत बार क्लीन बोल्ड आउट होने लगे. अपनी रिटायरमेंट से पहले द्रविड़ आखिरी बार टीम इंडिया के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले थे और उस सीरीज में द्रविड़ की ये कमजोरी खुलकर सामने आई थी क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने उन्हें 5 बार बोल्ड आउट किया था.

इसमें कोई शक नहीं कि द्रविड़ अपने इस रिकॉर्ड को याद नहीं रखना चाहेंग, लेकिन इस अनचाहे रिकॉर्ड के बावजूद भारतीय क्रिकेट फैंस ने उन्हें प्यार करना, सम्मान देना और उनकी तारीफ करना नहीं छोड़ा. आखिर द्रविड़ इन सबके सच्चे हकदार हैं और महज एक खराब रिकॉर्ड उनके द्वारा टीम इंडिया के लिए किए गए योगदान को कम नहीं कर देता और इसलिए जब तक क्रिकेट है तब तक द्रविड़ क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर राज करते रहेंगे.