VIDEO: जानिए, क्यों है 2005 की एशेज सीरीज सबसे खास

पीटरसन ने 156 रनों की शानदार पारी खेली. लेकिन खराब मौसम की वजह से ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी शुरू में केवल चार गेंदें खेल सका. लिहाजा टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया. इसके साथ ही एशेज पर इंग्लैंड का कब्जा हो गया. 

VIDEO: जानिए, क्यों है 2005 की एशेज सीरीज सबसे खास
2005 एशेज सीरीज इंग्लैंड ने जीती थी (File Photo)

नई दिल्ली: क्रिकेट प्रेमियों के लिए एशेज हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण सीरीज रही है. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच होने वाली टेस्ट मैचों की यह सीरीज लगभग किसी युद्ध की तरह खेली जाती है. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने पदार्पण करने वाले खिलाड़ी कैमरून बेनक्रॉफ्ट (नाबाद 82) और उप-कप्तान डेविड वॉर्नर (नाबाद 87) की शानदार शतकीय साझेदारी के दम पर इंग्लैंड को एशेज सीरीज 2017 के पहले टेस्ट मैच में 10 विकेट से हरा दिया. ब्रिस्बेन क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मैच में जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त ले ली है.

यूं तो हर सीरीज ही खास होती है, लेकिन 2005 की एशेज को दुनिया के क्रिकेट प्रेमी आज भी याद करते हैं. आइए एस सीरीज के पांचों टेस्ट मैचों पर नजर डालते हैं और देखते हैं क्यों इस सीरीज को सबसे खास माना जाता हैः 

एशेज सीरीज : कम मैच जीतकर भी ऑस्ट्रेलिया के बराबर सीरीज जीता है इंग्लैंड

1. पहला टेस्ट, लॉर्ड्स (21-25 जुलाई): दुनिया में हर फतह के पीछे पाथ ब्रेकिंग मूवमेंट होता है. इस पहले टेस्ट में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज हरमिसन ने मैच की दूसरी गेंद पर ही ऑस्ट्रेलिया ओपनर जस्टिन लेंगर पर गेंद मारी. लेंगर बमुश्किल 40 रन बना पाए. हरमिसन की आग उगलती गेंदों के सामने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज टिक नहीं पाए और पूरी टीम 190 रन बनाकर आउट हो गई. हरमिसन ने 43 रन देकर पांच विकेट लिए. जवाब में इंग्लैंड की टीम केवल 155 रनों पर सिमट गई. मैकग्राथ ने 53 रन देकर पांच विकेट लिए. पीटरसन ने 57 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में आक्रामक बल्लेबाजी की और 384 रनों का स्कोर खड़ा किया. इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में 180 रनों पर आउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया पहला टेस्ट मैच 239 रनों से जीत गया. 

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2. दूसरा टेस्ट, एजबेस्टन (4-8 अगस्त): पहले टेस्ट में लगातार दो बार 200 से भी कम के स्कोर पर आउट हो जाना इंग्लैंड के लिए एशेज में शुभ संकेत नहीं था. पहले टेस्ट में हार के बाद ऑस्ट्रेलियायन मीडिया ने इंग्लैंड की कड़ी आलोचना की थी. इंग्लैंड के मन मस्तिष्क में कुछ और ही चल रहा था. दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी शुरू की. मार्क ट्रिस्कोथिक ने ब्रेट ली की गेंदों पर 9 चौके जड़े. एंड्रयू स्ट्रॉस और ट्रिस्कोथि की जोड़ी ने पहले सेशन में 118 रन बनाए. इंग्लैंड की तरफ से फ्लिनटॉफ ने 62 गेंदों में 68 शानदार रन बनाए. इंग्लैंड की पूरी टीम 407 रन बनाकर आउट हो गई. ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 308 रन बनाए. इंग्लैंड को 99 रन की बढ़त मिल गई. लेंगर 82, पोन्टिंग 61 रन बनाकर आउट हुए. इंग्लैंड की पहली पारी में शेन वार्न ने 46 रन देकर 6 विकेट लिए. जबकि ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में फिल्नटॉफ ने 52 रन देकर 3 विकेट लिए. इंग्लैंड की दूसरी पारी 182रनों पर सिमट गयी. फिल्नटॉफ ने शानदार 73 रनों की पारी खेली. फ्लिनटॉफ ने अपनी पारी में पांच लंबे छक्के लगाये. लेकिन अब सारा दबाव इंग्लैंड पर आ गया था. ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में जीत के लिए 282 रन बनाने थे. मैच में हर पल पासा पलट रहा था. ऑस्ट्रेलिया के 9 विकेट गिर चुके थे. लेकिन ब्रेट ली और कास्प्रोविच टीम को जीत के एकदम करीब ले गए. लेकिन हरमिसन के एक बाउंसर पर कास्प्रोविच आउट हो ये और ऑस्ट्रेलिया जीत से केवल तीन रन दूर रह गया. इस तरह इंग्लैंड ने पहले टेस्ट की हार का बदला चुका लिया.  

3. तीसरा टेस्ट, मैनचेस्टर (11-15 अगस्त): दो टेस्ट मैचों के बाद अब एशेज ऐसे मुकाम पर पहुंच गई थीं जहां रोमांच अपने चरम पर था. क्रिकेट प्रेमी जानते थे कि दोनों ही टीमें तीसरे टेस्ट में अपना दबदबा बनाने की कोशिश करेंगी. माइकल वान अब तक अपने बल्ले से कुछ खास नहीं कर पाये थे. लेकिन तीसरे टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने शानदार 166 रन बनाए और इंग्लैंड का स्कोर 444 तक पहुंचा दिया. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 302 पर सिमट गयी. जोन्स ने 53 रन देकर 6 विकेट लिए और शेन वार्न ने शानदार 90 रन की पारी खेली. इंग्लैंड ने दूसरी पारी 6 विकेट पर 280 रन बनाकर घोषित कर दी. एक समय लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से मैच जीत जाएगा लेकिन पोन्टिंग ने 156 रनों की साहसिक पारी खेली और मैच ड्रा करा दिया. ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 9 विकेट पर 371 रन था. ऑस्ट्रेलिया ने इस ड्रा का भी जश्न मनाया.

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4. चौथा टेस्ट, ट्रेन्ट ब्रिज (25-28 अगस्त): इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया एक एक टेस्ट जीत चुके थे और तीसरा टेस्ट ड्रा रहा था. चौथे टेस्ट में दोनों टीमों पर दबाव था. लेकिन इंग्लैंड का पलड़ा भारी लग रहा था. इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 477 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया. फ्लिनटॉफ ने शानदार 102रनों की पारी खेली. जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 218रनों पर सिमट गई. जोन्स ने 44 रन देकर ऑस्ट्रेलिया के 5 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्त दिखाया. ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन मिल गया. फॉलोऑन खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 387 रन बनाए. लेंगर ने 61 और साइमन कैटिच ने 59 रन की पारी खेली. हरमिसन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 93 रन पर तीन विकेट लिए. अब इंग्लैंड को जीत के लिए महज 129 रन बनाने थे. लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के शुरुआती और मध्यक्रम के बल्लेबाजों को सस्ते में आउट कर दिया. बावजूद इसके इंग्लैंड 7 विकेट पर जीत का लक्ष्य पाने में कामयाब रहा. 

5. पांचवां टेस्ट, ओवल (8-12 सितंबर): इस सीरीज का परिणाम क्या होगा यह अब भी कोई नहीं जानता था. लेकिन इतना तय था कि इंग्लैंड सीरीज हार नहीं सकता. वह 2-1 से आगे था. ऑस्ट्रेलियाई टीम दबाव में थी. क्रिकेट प्रेमी जानते थे कि ऑस्ट्रेलिया कभी हार नहीं मानता. इसलिए वे उम्मीद कर रहे थे कि पांचवें और अंतिम टेस्ट में उन्हे कुछ करिश्माई पारियां देखने को मिलेंगी. इंग्लैंड ने पहली पारी में एंड्रयू स्ट्रास के शानदार 129 रनों की बदौलत 373 रन बनाए. वार्न ने 122 रन देकर छह विकेट हासिल किए. जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम 367 रन बना सकी. मैथ्यू हैडन ने 138 और जस्टिन लेंगर ने 105 रन बनाए. इंग्लैंड को 7 रन की लीड मिल गई. इंग्लैंड ने दूसरी पारी में भी 335 रन बनाए. पीटरसन ने 156 रनों की शानदार पारी खेली. लेकिन खराब मौसम की वजह से ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी शुरू में केवल चार गेंदें खेल सका. लिहाजा टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया. इसके साथ ही एशेज पर इंग्लैंड का कब्जा हो गया.