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फ्लैट पिचों से हो रहा टेस्ट क्रिकेट को नुकसान: सचिन तेंदुलकर

फ्लैट विकेट देखते ही गेंदबाज के कंधे झुक जाते हैं, ऐसे में रोमांचक खेल की उम्मीद करना बेकार होगा.

फ्लैट पिचों से हो रहा टेस्ट क्रिकेट को नुकसान: सचिन तेंदुलकर
सचिन ने दिए टेस्ट मैचों को रोमांचक बनाने के टिप्स (File Photo)

लंदन : भारतीय टीम इंग्लैंड में बॉलर फ्रेंडली पिचों पर भले ही संघर्ष कर रही हो, पर सचिन तेंदुलकर इससे चिंतित नहीं हैं. उनका मानना है कि अगर टेस्ट क्रिकेट को पॉपुलर बनाए रखना है तो हमें फ्लैट पिचों से बचना होगा. 

सचिन ने आईसीसी की वेबसाइट से कहा, ‘टेस्ट क्रिकेट का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट वह पिच है, जिस पर हम खेलते हैं. वनडे और टी20 क्रिकेट में फ्लैट विकेट बनाए जाते हैं. इन पिचों पर गेंदबाज के लिए ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं होता. हर वक्त उनकी परीक्षा होती रहती है. पर क्या टेस्ट मैचों में ऐसा है. पांच दिन के इस खेल में सिर्फ चौके-छक्के से रोमांच नहीं आ सकता. हमें यह देखना होगा कि क्या टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज, बल्लेबाजों की वैसी ही परीक्षा ले पा रहे हैं, जैसे वनडे व टी20 मैचों में बल्लेबाज लेते हैं.’

यंग जनरेशन को टेस्ट से जोड़ने के लिए नए आइडियाज की जरूरत:
टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक 15921 रन बनाने वाले सचिन ने कहा, ‘हमें टेस्ट क्रिकेट को लोकप्रिय बनाए रखने के लिए नए आइडियाज की जरूरत है. ऐसे आइडिया, जो नए जनरेशन को टेस्ट क्रिकेट की ओर खीचें. इसका एक तरीका बेहतर और जीवंत पिच तैयार करना हो सकता है. जैसा बर्मिंघम में खेले गए पहले टेस्ट में था. हालांकि, अभी अक्सर टेस्ट मैच में भी फ्लैट विकेट बनाए जाते हैं. ऐसे विकेट देखकर गेंदबाज को लगता है कि उसके लिए इस पर कुछ भी नहीं है. दूसरी ओर, बल्लेबाज सोचता है कि अगर वह कोई बेवकूफी नहीं करेगा तो आसानी से बड़ी पारी खेल सकता है. यहीं से टेस्ट बोरिंग होना शुरू हो जाता है.’

फील्डर स्लिप और गली पर खड़े हों तो चौका मारना आसान हो जाता है:
विदेश में 54.74 की औसत से 8705 रन बनाने वाले सचिन ने कहा, ‘मुझे अच्छी पिचों पर खेलना हमेशा अच्छा लगता था. जब तीन फील्डर स्लिप पर और दो फील्डर गली पर खड़े होते थे, तब मुझे पता होता था कि बस एक अच्छा शॉट खेलना है, जो यकीनन चौका जाएगी. जबकि, फ्लैट ट्रैक होने पर एक फील्डर डीप एक्स्ट्रा कवर पर दिखता है. ऐसे में आपको तेज शॉट लगाने होते हैं, जिसमें कोई मजा नहीं है.’