सेना के सम्मान में टीम इंडिया ने पहनी आर्मी कैप, शाहिद अफरीदी ने उड़ाया मजाक
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सेना के सम्मान में टीम इंडिया ने पहनी आर्मी कैप, शाहिद अफरीदी ने उड़ाया मजाक

भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के साथ रांची में खेले गए तीसरे वनडे में भारतीय टीम ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में आर्मी कैप पहनी थी. 

पाकिस्तान के ऑलराउंडर शाहिद अफ्रीदी ने टीम इंडिया द्वारा आर्मी कैप पहनने पर उसका मजाक उड़ाया.

नई दिल्ली: भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के साथ रांची में खेले गए तीसरे वनडे में भारतीय टीम ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में आर्मी कैप पहनी थी. इतना ही नहीं, अपनी मैच फीस राष्ट्रीय रक्षा कोष में दान कर दी थी.  पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने इस पर आपत्ति जताते हुए आईसीसी से इसकी शिकायत की थी. पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने आर्मी कैप पहनने के मामले में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ आईसीसी से कार्रवाई की मांग की थी. चौधरी ने भारतीय टीम पर खेल का 'राजनीतिकरण' करने का भी आरोप लगाया था. 

हालांकि, पाकिस्तान की शिकायत से भारतीय क्रिकेट टीम या बोर्ड को कोई नुकसान नहीं हुआ. आईसीसी ने साफ कहा कि भारतीय टीम को देश के सैन्य बलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सैनिकों जैसी टोपी पहनने की अनुमति दी गई थी. 

पाकिस्तान के ऑलराउंडर शाहिद अफ्रीदी ने टीम इंडिया द्वारा आर्मी कैप पहनने पर उसका मजाक उड़ाया. सोमवार को नेशनल स्टेडियम कराची में लाहौर कलंदर्स पर जीत दर्ज करने के बाद अफरीदी ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान यह बात कही. पत्रकारों ने जब अफरीदी से प्रतिक्रिया लेनी चाहिए तो टीम के मैनेजर नदीम खान ने तत्काल हस्तक्षेप किया और पत्रकारों से क्रिकेट से संबंधित सवाल पूछने का आग्रह किया. पत्रकारों ने सवाल पर खेद जताया लेकिन इसी बीच अफरीदी ने हास्यपद टिप्पणी कर डाली. अफरीदी ने कहा, "कैप पहनी तो उतार भी दी."

 

उधर, भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने मंगलवार को इस पूरे मसले पर एक बार फिर भारत का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि टीम को जो सही लगा उसने वही किया और उनका यह कदम सेना के सम्मान के लिए था. भरत अरुण ने भारत और आस्ट्रेलिया के बीच बुधवार को यहां होने वाले पांचवें और आखिरी वनडे मैच की पूर्वसंध्या पर संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जबाव में कहा, "हमने वही किया जो हमें लगा कि हमें देश के लिए करना चाहिए. सेना ने जो इस देश के लिए किया हमारा यह कदम उसके सम्मान के लिए था." 

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