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जब भारत नहीं खेल रहा हो, तब टेस्ट मैच देखने में ज्यादा मजा आता है : रामचंद्र गुहा

रामचंद्र गुहा के लिए, टेस्ट मैच में जरुरी नहीं है कि भारत खेल रहा हो, उल्टे जब भारत बिल्कुल नहीं खेल रहा होता है तो उन्हें ज्यादा मजा आता है.

जब भारत नहीं खेल रहा हो, तब टेस्ट मैच देखने में ज्यादा मजा आता है : रामचंद्र गुहा
टेस्ट मैच चल रहा हो, केवल तभी रामचंद्र गुहा लेखन से रहते हैं दूर (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: चाहे रविवार का फुर्सत का दिन हो या सोमवार का व्यस्तभरा दिन, इतिहासकार रामचंद्र गुहा पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है और वह आदतन रोजाना कई पन्ने लिख डालते हैं . लेकिन जब टेस्ट मैच होता है, तो वह अपने आप को रोक नहीं पाते हैं, भले ही उन्हें दो-तीन दिन तक ही क्यों न उन्हें अपनी कलम रोकनी पड़े. मशहूर क्रिकेट प्रशंसक गुहा क्रिकेट पर काफी लिख चुके हैं और वह प्रशासकों की समिति (सीओए) के सदस्य भी रह चुके हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को चलाने के लिए नियुक्त किया था.

गुहा ने कहा, ‘‘मैं प्रतिदिन लिखता हूं. मैं कभी अवकाश नहीं लेता, सोमवार और रविवार से कोई फर्क नहीं पड़ता. हां, लेकिन जब टेस्ट मैच हो तो मैं दो दिन का अवकाश ले सकता हूं, खासकर बेंगलूर में रोमांचक टेस्ट मैच, मैं तय कर सकता हूं कि चलो ठीक है, 2-3 दिन मैं काम पर नहीं जा रहा.’’ गुहा के लिए, टेस्ट मैच में जरुरी नहीं है कि भारत खेल रहा हो, उल्टे जब भारत बिल्कुल नहीं खेल रहा होता है तो उन्हें ज्यादा मजा आता है.

रामचंद्र गुहा के तीखे बोल- टीम इंडिया को नुकसान पहुंचा रहा है विराट कोहली का अहंकार

उन्होंने कहा, ‘‘जब भारत नहीं खेल रहा हो तब मुझे लगता है कि मुझे ज्यादा मजा आ रहा है क्योंकि तब मैं भावनात्मक रुप से नहीं जुड़ा होता हूं. उदाहरण के लिए, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच वाकई अच्छी प्रतिस्पर्धा देखने में रोमांचित करती है.’’ 

खूब बिकने वाली पुस्तक ‘‘इंडिया आफ्टर गांधी’’ के लेखक और गैर गल्प लिखने के अपने रुझान के लिए चर्चित गुहा बड़ी सख्त दिनचर्या का पालन करते हैं. वह रोजाना सुबह नौ बजे से एक बजे तक और दोपहर में फिर दो-तीन घंटे लेखन करते हैं. लेखन कार्य करते समय वह मोबाइल या इंटरनेट से दूर रहते हैं.

बता दें कि बीसीसीआई और टीम इंडिया पर अपने तीखे बयानों को लेकर रामचंद्र गुहा अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं. इसी साल जनवरी में गुहा ने विराट कोहली के बीसीसीआई में बढ़ते कद को लेकर भी एक लेख लिखा था. उन्होंने इस बात की आलोचना की थी. उन्होंने विराट को करिश्माई खिलाड़ी बताया था, लेकिन इसके साथ ही अपने चार महीने के कार्यकाल में बीसीसीआई में विराट के बढ़ते कद को भी गैरजरूरी करार दिया. उन्होंने विराट कोहली पर तंज कसते हुए कहा था कि मैदान और मैदान के बाहर सिर्फ और सिर्फ वहीं दिखते हैं, जो कि भारतीय खेल इतिहास के अनोखा उदाहरण है.

इतिहासकार और पूर्व में बीसीसीआई के प्रशासक रहे रामचंद्र गुहा ने विराट कोहली के रवैए की कड़ी आलोचना की थी. गुहा ने उनके उस व्यवहार के अलावा खेल और उनकी कप्तानी के से जुड़े कई मुद्दों को उठाया था. गुहा क्रिकेट का कामकाज देखने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर (सीओए) के मेंबर भी थे. उन्होंने भारतीय क्रिकेट में सुपरस्टार कल्चर का हवाला देकर अपना पद चार महीने में ही छोड़ दिया था.