इस एक फैसले ने बदल दी विराट कोहली की जिंदगी, जानें पूरी डिटेल

आज विराट कोहली दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार किए जाते हैं, लेकिन एक वक्त था जब उन्हें बल्लेबाजी में परेशानी आई थी.

इस एक फैसले ने बदल दी विराट कोहली की जिंदगी, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली: आज विराट कोहली (Virat Kohli) को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना जाता है पर एक वक्त ऐसा भी था जब इंग्लैंड में नाकामयाबी के बाद उनकी खिल्ली उड़ायी जाती थी. ये वो दौर था जब विराट तेज गेंदबाजों के खिलाफ रन बनाने के लिए संघर्ष किया करते थे और जेम्स एंडरसन जैसे गेंदबाज अक्सर उन पर हावी हो जाया करते थे. फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उनकी बल्लेबाजी आम से खास बन गयी और देखते ही देखते विराट क्रिकेट की दुनिया के क्रिकेट सम्राट बन गए? आखिरकार विराट ने खुद इस राज से पर्दा हटा दिया और अपने खुलासे में बताया कि बल्लेबाजी का स्टांस उनकी सबसे बड़ी समस्या हुआ करता था. जैसे ही उन्होनें अपना स्टांस बदला वैसे ही उनकी पूरी दुनिया बदल गई. 

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स्टांस बदलने के बाद विराट काफी आक्रामक हो गए और गेंदबाजों पर इस तरह से हावी होकर खेलने लगे जैसे कि सामने वाला गेंदबाज एक स्थानीय खिलाड़ी हो, न कि एक इंटरनेशनल क्रिकेटर. इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना दबदबा बना चुके विराट ने बांग्लादेश के बल्लेबाज तमीम इकबाल के साथ बातचीत के दौरान अपनी बल्लेबाजी की कमियों के बारे में बात की. 

इकबाल के साथ चर्चा करते हुए विराट ने बताया कि कैसे वो अपने स्टांस की वजह से मैदान के चारों तरफ शॉट नहीं लगा पाते थे और हवाई शॉट लगाना तो जैसे नामुमकिन सा लगता था. जब विराट अपनी बल्लेबाजी से नाखुश रहने लगे तो उन्हें एहसास हुआ कि बल्लेबाजी में जल्द ही परिवर्तन लाना होगा नहीं तो वो बहुत जल्दी टीम इंडिया से बाहर हो जाएंगे. ऐसे में उन्होनें ठान लिया कि जिस भी चीज से उनकी बैटिंग में सुधार आएगा वो हर उस चीज को अपनाएंगे और धीरे-धीरे ही सही पर अपनी बल्लेबाजी को जरूर चमकाएंगे.

विराट का यही संकल्प आगे चलकर उनके बहुत काम आया क्योंकि अपनी शुरूआती विफलता के बाद दिल्ली के इस बल्लेबाज ने अपना स्टांस बदल लिया और इसके बाद आज तक विराट को कोई भी गेंदबाज मैदान पर रोक नहीं पाया है. इस बदलाव के बारे में विराट ने इकबाल को बताया, 'मैं मैदान के चारो ओर शॉट खेलना चाहता था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि स्टेटिक स्टांस से मेरे पास गेंद को मारने के विकल्प कम बच रहे थे. जिससे मुझे लगा कि मेरे स्टाइल के हिसाब से ये काम नहीं कर रहा है लेकिन बहुत लोगों के लिए ये काम करता है. जैसे कि सचिन पाजी स्टेटिक स्टांस से ही खेलते थे क्योंकि हैंड-आई कोर्डिनेशन बहुत अच्छा था. इसलिए मैंने थोड़ी-थोड़ी चीजें समय-समय पर बदलीं और ट्राई करता गया.'

भारतीय कैप्टन ने आगे कहा, 'इस स्टांस को सिर्फ नेट ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय मैच में भी धीरे-धीरे लाया. क्योंकि सिर्फ नेट में बदलाव करने से नहीं चलेगा जब तक आप मैच की कंडीशन में अपने बदलाव का आकलन नहीं करेंगे, तब तक आपको पता नहीं चलेगा. इस तरह मैच में ट्राई करने के बाद मुझे इसके उपर विश्वास आया और मैं अपने स्टांस को बदलने में कामयाब रहा.'