कोहली ने खोली क्रिकेट टीम में चयन को लेकर पक्षपात की पोल, जानिए क्या कहा

क्रिकेट की दुनिया में टीम में चयन के लिए पक्षपात और रिश्वतखोरी के आरोप हमेशा ही लगते रहते हैं. कई बार सीनियर लेवल पर भी इस तरह की बातें सुनने को आती हैं लेकिन जूनियर लेवल पर इस तरह के आरोप लगना एक आम बात है.

कोहली ने खोली क्रिकेट टीम में चयन को लेकर पक्षपात की पोल, जानिए क्या कहा
विराट कोहली | फाइल फोटो

नई दिल्ली: क्रिकेट की दुनिया में टीम में चयन के लिए पक्षपात और रिश्वतखोरी के आरोप हमेशा ही लगते रहते हैं. कई बार सीनियर लेवल पर भी इस तरह की बातें सुनने को आती हैं लेकिन जूनियर लेवल पर इस तरह के आरोप लगना एक आम बात है. लेकिन यदि भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली के स्तर का क्रिकेटर यह बात कहे तो निश्चित तौर पर इसे गंभीर मुद्दा समझा जाना चाहिए. कोहली ने एक इंटरव्यू में दिल्ली की जूनियर क्रिकेट में चयन के लिए पर्दे के पीछे चलने वाली गड़बड़ी की तरफ इशारा किया है. हालांकि उन्होंने साफतौर पर तो यह आरोप नहीं लगाया लेकिन अपने बचपन का एक किस्सा बताते हुए ये जरूर मान लिया कि इस तरह की गड़बड़ होती ही है.

भारतीय फुटबॉल कप्तान छेत्री से लाइव इंटरव्यू में बताया
दरअसल विराट कोहली रविवार शाम को भारतीय फुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री को इंस्टाग्राम लाइव में इंटरव्यू दे रहे थे. उन्होंने छेत्री से इस दौरान अपने जीवन के तमाम पहलुओं पर बात की. खासतौर पर दिल्ली की लाइफ और अपने शुरुआती स्ट्रगल के बारे में उन्होंने इस दौरान खुलकर बताया. इसी दौरान उन्होंने चयन को लेकर हुए इस कड़वे अनुभव को भी शेयर किया.

बताया कि पापा को किया था कुछ 'इशारा'
विराट कोहली इंटरव्यू के दौरान अपने पापा प्रेम कोहली के बारे में बहुत सारी बातें की. उन्होंने इसी दौरान उस बात की तरफ इशारा किया, जो चयन को लेकर हुई थी. उन्होंने कहा, मैंने पहले भी इशारा किया है कि चीजें ठीक नहीं थी. दरअसल एक समय था कि स्टेट क्रिकेट में 'लेफ्ट राइट' बहुत तरह की बातें होती थीं. मेरे पापा से भी एक व्यक्ति ने कहा कि चयन के लिए विराट की मेरिट की तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आपको 'अलग' से कुछ करना होगा. विराट ने कहा, मेरे पापा उस परिवार से आते थे, जहां उन्हें स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ना पड़ा. वहां से वे मेहनत करके वकील बने, उससे पहले मर्चेंट नेवी में भी काम किया था. अब जो मेहनत करके कुछ बना हो तो उसे ये 'गड़बड़ी' समझ नहीं आती. उन्होंने सीधे मेरे कोच से कहा कि मेरिट से चयन होगा तो ठीक, नहीं तो हमें नहीं खिलाना है. मेरा चयन नहीं हुआ. मैं बहुत रोया, लेकिन इससे मुझे सीख मिली कि दुनिया ऐसे ही चलती है. आपको कुछ करके दिखाना होगा. ये वे बातें थीं, जो मेरे पापा ने मुझे सिखाई.

जब भारत के लिए खेला तो याद आए पापा
सुनील छेत्री ने विराट से पूछा, क्या कभी आप सोचते हैं कि आपके पापा होते तो आप उनके लिए क्या कर सकते थे? विराट ने कहा, जब उनका निधन हुआ तो मैं सिर्फ 18 साल का था, वो ऐसी उम्न ही नहीं थी कि मैं रोज बैठकर सोच सकता कि ये क्या हो गया. मुझे बस एक बात समझ आई कि अब अपने भाई, मां को संभालना है और इसके लिए मुझे कुछ करना ही होगा. हां, जब मैं भारत के लिए खेला, तब सोचा कि वे होते तो मैं उन्हें एक आरामदेह जिंदगी दे सकता था. वो पूरी जिंदगी वे काम करते रहे. ऐसे में मैं उन्हें ऐसी जिंदगी दे सकता था.

जिंदगी के इस पीरियड को मिस करते हैं विराट
छेत्री और विराट के बीच 90 के दशक की भारतीय जिंदगी के बारे में चर्चा चली. कई टीवी सीरियलों को दोनों ने याद किया. खासतौर पर विक्रम-बेताल को याद करके दोनों बेहद हंसे. इसी दौरान विराट ने कहा कि जिंदगी के उस दौर को मैं सबसे ज्यादा मिस करता हूं. वो नटराज पैंसिल की एड, सिप्सी पीनी एक रुपये वाली. संडे को मैच खेलने जाना और बाद में एकेडमी के बाहर निकलकर छोले-भटूरे खाना. ये सब अब वापस नहीं आ सकता, मैं इन सब चीजों को बेहद मिस करता हूं.

आज भी दिल्ली स्टाइल में शॉवर जेल की बोतल का करते हैं उपयोग
छेत्री ने विराट को याद दिलाया कि दिल्ली में मध्य वर्ग परिवारों की जिंदगी में कैसे छोटी-छोटी चीजों की अहमियत होती थी. उन्होंने कहा, दो दिन पहले मेरे घर में टूथपेस्ट खत्म हो गया तो मैं उसे फेंकने जा रहा था. मेरी पत्नी बोली कि रूको और उसने उस पेस्ट की ट्यूब लेकर उसे फोल्ड किया और दबाकर पेस्ट निकाल दिया. इस पर कोहली बोले, आप फेंक कैसे सकते हो साहब, ये हो ही नहीं सकता. हम आज भी शॉवर जेल में नीचे थोड़ा सा जेल रह जाने पर उसमें पानी डालकर हिलाकर यूज करते हैं. पूरी बोतल आरपार दिखनी चाहिए. इसके बाद विराट और छेत्री इस बात को लेकर बहुत हंसे.

1996 वर्ल्ड कप में सोहेल को वेंकटेश के आउट करने की होती थी नकल
छेत्री ने पूछा कि तब आप कहां थे, जब 1996 वर्ल्ड कप में पाकिस्तानी बल्लेबाज आमिर सोहेल को वेंकटेश प्रसाद ने बोल्ड किया? विराट ने कहा, मैं अपने घर पर था और मैंने ठीक वैसे ही उस मूमेंट को सेलीब्रेट किया था जैसे मैं आज करता हूं. वो जो बोल्ड है ना, उससे ज्यादा आइकानिक बोल्ड हमारे लिए तो हिस्ट्री ऑफ क्रिकेट में कोई नहीं है. इस पर छेत्री ने भी बताया कि हमने भी कई दिन तक उसकी नकल की. एक सोहेल बनता था और एक प्रसाद और उसी तरह बोल्ड करके हम खूब मजा लेते थे. कोहली ने कहा, ये सब हमारी गोल्डन मेमोरीज हैं. वो शारजाह का मैच जो हम देखते थे. वो फुटबॉल के मैच देखना, बेकहम आदि को देखना. आप बास्केटबॉल जानते हैं या नहीं, लेकिन उस समय के सभी स्टार प्लेयर्स को जानना. सुबह उठकर मैच देखना.