विराट कोहली के मुरीद हैं इयान बॉथम, तारीफ में कही ये बात

विराट कोहली लगातार सफलता की मिसाल कायम करते जा रहे हैं, यही वजह है कि इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज इयान बॉथम ने भी उनकी जमकर तारीफ की है.

विराट कोहली के मुरीद हैं इयान बॉथम, तारीफ में कही ये बात

नई दिल्ली: 1980 के दशक में रिचर्ड हैडली (Richard Hadlee), कपिल देव (Kapil Dev) और इमरान खान (Imran Khan) के साथ महान ऑलराउंडर्स की लिस्ट में शामिल इयान बॉथम (Ian Botham) ने टीम इंडिया के कैप्टन विराट कोहली (Virat Kohli) की जमकर तारीफ की है. इंग्लैंड के इस महान खिलाड़ी ने विराट के जुनून, उनकी रन बनाने की भूख और मैदान पर उनकी चपलता की प्रशंसा की है. साथ ही साथ बॉथम ने विराट को आज के समय का जबरदस्त बल्लेबाज और बेहतरीन कप्तान बताया है.

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बॉथम ने न सिर्फ विराट की बल्लेबाजी और कप्तानी की तारीफ की, इसके साथ ही उन्होनें भारतीय कप्तान के एटीट्यूड और उनके एग्रेसिव नेचर को उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बताया है. इतना ही नहीं बॉथम को विराट इतने पसंद हैं कि अगर उन्हें मौका मिले तो वो विराट के खिलाफ खेलना पसंद करेंगे. बॉथम ने अपने एक इंटरव्यू में इस बारे में बात की और कहा, 'विराट कोहली विरोधियों से गेम खींच लाते हैं, वह अपने खिलाड़ियों के लिए हमेशा खड़े रहते हैं. अगर मैं खेल पाता तो उनके खिलाफ खेलना पसंद करता. वह भारतीय क्रिकेट को आगे की तरफ ले जाने के लिए एकदम सही शख्स हैं.'

विराट कोहली के बाद बॉथम से जब ये पूछा गया कि आज क्रिकेट की दुनिया में ऑलराउंडर्स इतने कम क्यों होते जा रहे हैं, तो उन्होनें कुछ यूं जवाब दिया. बॉथम ने कहा कि ऑलराउंडर्स पेड़ पर नहीं लगते, क्रिकेट में इनका काम दोगुना होता है क्योंकि ये बैट और बॉल दोनों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, अपनी टीम को बैलेंस देते हैं और जरूरत पड़ने पर मैदान के किसी भी कोने पर फिल्डिंग करने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. आज के दौर में जब टेस्ट, वनडे और टी-20 क्रिकेट खेला जाता है, ऑलराउंडर्स का काम और भी बढ़ गया है और ऐसे में इनकी गिनती कम होती जा रही है.

बॉथम ने कहा, 'ऑल राउंडर्स का निर्माण नहीं किया जा सकता है, वे पेड़ों पर नहीं उगते हैं. ऑल राउंडर्स का कार्यभार दोगुना होता है और वास्तव में इसका असर आपके शरीर पर पड़ता है. जरा सोचिए कपिल देव. उन्होंने उन भारतीय पिचों पर जितनी गेंदबाजी की, इसका उन्हें कितना कम नतीजा मिला. वह भी चेन्नई और दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी में. मैं वर्तमान पीढ़ी में किसी को भी ऐसा करने में सक्षम नहीं देख सकता हूं.'