विराट-सचिन नहीं, टीम इंडिया के ये 4 सितारे बने हैं इस खास वर्ल्ड रिकॉर्ड के गवाह

केवल चार ऐसे भारतीय खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने आईसीसी के ये सभी तीनों टूर्नामेंट अपने देश के लिए जीते. 

विराट-सचिन नहीं, टीम इंडिया के ये 4 सितारे बने हैं इस खास वर्ल्ड रिकॉर्ड के गवाह
विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर भी इस रिकॉर्ड को नहीं बना पाए (File Photo)

नई दिल्ली : अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह उपलब्धि हर किसी के भाग्य में नहीं होती. क्रिकेट में आईसीसी वर्ल्ड कप 1987 से पहले तक 60 ओवरों का हुआ करता था. 1987 में इसे 50 ओवरों का कर दिया गया. वर्ल्ड कप के अलावा वर्ल्ड टी-20 और मिनी वर्ल्ड कप यानी चैंपियंस ट्रॉफी क्रिकेट के महत्वपूर्ण टूर्नामेंट हैं. किसी भी क्रिकेटर के लिए ये तीनों टूर्नामेंट जीतना किसी सपने के साकार होने जैसा है. हालांकि, बहुत से ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो इनमें से एक भी टूर्नामेंट नहीं जीत पाए. सचिन तेंदुलकर, रोहित शर्मा, सनथ जयसूर्या, पीयूष चावला, रिकी पोंटिंग, एडम गिलक्रिस्ट, ग्लेन मैकग्राथ, क्रिस गेल जैसे कुछ खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इन तीन में से दो टूर्नामेंट देश के लिए जीते. 

केवल चार ऐसे भारतीय खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने सभी तीनों टूर्नामेंट देश के लिए जीते. आइए देखते हैं किन खिलाड़ियों को यह गौरव प्राप्त हैः 

वीरेंद्र सहवाग: 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी ने में सहवाग ने पांच पारियों में 271 रन बनाए. उनका औसत 91 और स्ट्राइक रेट 120 था. इनमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था. साथ ही सहवाग ने 3 विकेट भी लिए. 2007 वर्ल्ड टी-20 के इस पूरे टूर्नामेंट में सहवाग ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई. उन्होंने परिस्थितियों और गेंदबाजों की परवाह किए बिना टीम को हर मैच में शानदार शुरुआत दिलवाई. इसकी की बदौलत भारत टूर्नामेंट में अपना दबदबा बना पाया. दुर्भाग्य से चोट की वजह से सहवाग फाइनल नहीं खेल पाए. 

Virender Sehwag

2011 वर्ल्ड कप में सहवाग ने पहली ही गेंद पर चौका लगाने की एक नई रवायत को जन्म दिया. उन्होंने लगभग हर मैच में पहली गेंद को सीमा पार पहुंचाया. उन्होंने टूर्नामेंट में 47.5 की औसत से 380 रन बनाए. उनका स्ट्राइक रेट 122 रहा. 

युवराज सिंह: 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में युवराज को बल्लेबाजी करने का ज्यादा अवसर नहीं मिला, क्योंकि टॉप क्रम शानदार बल्लेबाजी कर रहा था. उन्होंने दो बार बल्लेबाजी करते हुए केवल 65 रन बनाए. इनमें एक अर्धशतक भी शामिल है. लेकिन उन्होंने शानदार फील्डिंग करते हुए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ स्मिथ और जोंटी रोड्स को कैच आउट किया. इसकी वजह से भारत दक्षिण अफ्रीका को पराजित कर पाया. 2007 वर्ल्ड टी-20 कप में युवराज ने केवल दो बढ़िया पारियां खेलीं, लेकिन इन्हीं की बदौलत भारत फाइनल में पहुंच पाया. पहले उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 16 गेंदों में 58 रनों की पारी खेली. उन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्के लगाने का करिश्मा इसी मैच में किया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ युवराज ने 30 गेंदों पर शानदार 70 रन की पारी खेली और भारत को फाइनल में पहुंचाया. 

Yuvraj singh

2011 वर्ल्ड कप के लिए युवराज सिंह को खासतौर पर याद किया जाता है. इस ऑल राउंडर ने गेंद और बल्ले दोनों से करिश्माई प्रदर्शन किया. युवराज ने आठ पारियों में 362रन बनाए इनमें चार अर्धशतक और एक शतक शामिल हैं. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 15विकेट लिये. यही वजह थी कि वह 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे. 

हरभजन सिंह: 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में हरभजन ने पांच मैचों में 6 विकेट लिए. उनकी इकोनॉमी 3.7 रही जिसकी वजह से बल्लबाज रन बनाने में संघर्ष करते नजर आए. 2007 वर्ल्ड टी-20 कप में आरपी सिंह और इरफान पठान के साथ हरभजन ने कहर बरपाती गेंदबाजी की. उन्होंने छह मैचों में 7 विकेट लिए, लेकिन उन्होंने मिडिल ओवरों में बल्लेबाजों को रन बनाने से लगातार रोके रखा. 

Harbhajan singh

2011 वर्ल्ड कप में एक बार फिर से हरभजन सिंह ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया. उन्होंने 43 की औसत से पूरे टूर्नामेंट में 9 विकेट लिए. उनकी इकोनॉमी 4.48 रही, जो किसी भी अन्य भारतीय गेंदबाज से बेहतर थी. हरभजन की गेंदों पर बल्लेबाजों के लिए रन बनाना कठिन हो रहा था. 

महेंद्र सिंह धोनी: 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में धोनी को केवल दो बार बल्लेबाजी करने का मौका मिला. एक बार उन्होंने 27 रन बनाए और दूसरी बार शून्य पर आउट हो गए, लेकिन विकेट के पीछे और कप्तान के रूप में उन्होंने टीम को गजब का लीड किया. जिसकी बदौलत भारत चैंपियंस ट्रॉफी जीत सका. 2007 टी-20 वर्ल्ड कप में यह पहला मौका था जब धोनी टीम इंडिया को लीड कर रहे थे. इस टूर्नामेंट में धोनी दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी थे. उन्होंने छह पारियों में 31 की औसत से 154 रन बनाए. फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम ओवर जोगिंदर शर्मा से डलवाने का उनका साहसिक फैसला मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ और भारत पहला टी 20 कप जीत गया. 

MS Dhoni

2011 वर्ल्ड कप में धोनी ने इस टूर्नामेंट के शुरुआती सात मैचों में केवल 150 रन बनाए थे. उनका औसत 30 था. लेकिन फाइनल मैच में धोनी युवराज से पहले आए और 91 नाबाद की मैच विनिंग पारी खेली. धोनी पूरे टूर्नामेंट में शानदार विकेटकीपिंग और कप्तानी करते रहे.