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कभी मुंबई में गोलगप्पे बेचता था यह बल्लेबाज, विजय हजारे ट्रॉफी में जड़ा दोहरा शतक

मुंबई के युवा बल्लेबाज यशसवी जैसवाल बुधवार को प्रतिष्ठित विजय हजारे ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए.

कभी मुंबई में गोलगप्पे बेचता था यह बल्लेबाज, विजय हजारे ट्रॉफी में जड़ा दोहरा शतक
जैसवाल ने झारखंड के खिलाफ जारी विजय हजारे ट्रॉफी के ग्रुप-ए के मैच में 203 रनों की दमदार पारी खेली

बेंगलुरू: मुंबई के युवा बल्लेबाज यशसवी जैसवाल बुधवार को प्रतिष्ठित विजय हजारे ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए. जैसवाल ने झारखंड के खिलाफ जारी विजय हजारे ट्रॉफी के ग्रुप-ए के मैच में 203 रनों की दमदार पारी खेली और यह कीर्तिमान स्थापित किया. मौजूदा टूर्नामेंट में दोहरा शतक लगाने वाले जैसवाल दूसरे बल्लेबाज हैं. इससे पहले, विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने केरल के लिए खेलते हुए गोवा के खिलाफ नाबाद 212 रन बनाकर इतिहास रच दिया था. वह विजय हजारे टूर्नामेंट के एक मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं.

इस पारी के साथ 17 वर्षीय जैसवाल लिस्ट-ए क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ने वाले नौवें भारतीय बल्लेबाज भी बन गए हैं. भारतीय बल्लेबाजों द्वारा लिस्ट-ए में लगाए गए नौ दोहरे शतकों में से पांच वनडे में बनाए गए हैं. लिस्ट-ए वनडे मैच में रोहित शर्मा के नाम तीन और वीरेंद्र सहवाग एवं सचिन तेंदुलकर के नाम एक-एक दोहरा शतक हैं. विजय हजारे ट्रॉफी में सबसे पहला दोहरा शतक पिछले सीजन उत्तराखंड के कर्णवीर कौशल ने जड़ा था. उन्होंने सिक्किम के खिलाफ 202 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी.

क्रिकेटर बनने के लिए यूपी से मुंबई पहुंचे यशस्वी
यूपी के यशस्वी जायसवाल की कहानी संघर्ष से भरी पड़ी है. वे क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन भदोही में छोटी सी दुकान चलाने वाले पिता के पास कोचिंग कराने के पैसे नहीं थे. इसके बाद यशस्वी 10-11 साल की उम्र में मुंबई आ गए, जहां उनके चाचा रहते थे. चाचा की माली हालत भी ऐसी ना थी कि वे उसे कोचिंग करवा पाते. चाचा के कहने पर मुस्लिम यूनाइटेड क्लब ने यशस्वी को अपने टेंट में रहने की अनुमति दे दी, जहां कुछ और बच्चे रहते थे. 

कभी पानी पूरी भी बेचते थे यशस्वी 
यशस्वी मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के टेंट में रहने लगे. पिता घर से बेटे यशस्वी को कुछ पैसे भेजते रहते, लेकिन यह कभी भी पर्याप्त नहीं होते थे. इस पर इस छोटे से बालक ने दूसरा रास्ता निकाला. यशस्वी क्रिकेट खेलते और खेल से बचे समय में कुछ काम भी करते. वे खेल से वक्त बचाकर पानी पूरी बेचने लगे. कभी-कभी फल भी बेच लेते थे. इससे उनका गुजारा होने लगा.