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दीपक पूनिया; चोट के साथ खेलता रहा यह रेसलर और जीत लाया ओलंपिक कोटा

दीपक पूनिया (Deepak Punia) ने एक महीने के भीतर जूनियर और सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में क्रमश: गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते.

दीपक पूनिया; चोट के साथ खेलता रहा यह रेसलर और जीत लाया ओलंपिक कोटा
दीपक पूनिया. (फोटो: IANS)

नई दिल्ली: भारतीय पहलवान दीपक पूनिया (Deepak Punia) ने अगस्त में जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीता. वे पिछले 18 साल में ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने. इसके बाद उन्होंने हाल ही में सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (World Wrestling Championship) के फाइनल में जगह बनाई. इसके साथ ही अगले साल होने वाले ओलंपिक (Tokyo Olympics) के लिए देश को एक कोटा भी दिला दिया. हालांकि, देश की खुशी तब थोड़ी कम हो गई, जब यह पहलवान फाइनल में नहीं उतरा. इस कारण उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. 

दीपक ने इस बारे में बताया कि वे नूर-सुल्तान में खेली गई ही सीनियर विश्व चैंपियनशिप में टखने की चोट के बावजूद खेलते रहे थे. दीपक ने सेमीफाइनल में स्विट्जरलैंड के स्टेफान रेइचमथ को 8-2 से मात दी थी. इस मुकाबले के आखिरी में उन्हें चोट लगी थी. अगले दिन पता चला कि दीपक इसी चोट के कारण फाइनल नहीं खेल पाएंगे. 

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दीपक पूनिया ने कहा, ‘मुझे पहले ही मुकाबले में चोट लगी थी. जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ता चला गया, चोट और खराब होती चली गई. मौसम ठंडा था तो अगले दिन मेरा पैर सूज गया. मैं मुश्किल से खड़ा हो पा रहा था. मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था.’

दीपक ने कहा, ‘मैं चोट के बाद भी ओलंपिक क्वालिफिकेशन दौर में जाने के लिए प्रतिबद्ध था. इसीलिए खेलता रहा.’ चोट हालांकि गंभीर नहीं है. उन्हें उम्मीद है कि वे कुछ दिनों में ठीक हो जाएंगे. दीपक ने कहा, ‘इसे पूरी तरह से ठीक होने में 15-20 दिन लगेंगे. मैं दिवाली के बाद से सिर्फ एक या दो बार ही घर गया हूं, इसलिए अब मैं अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहता हूं.’

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दीपक ने कहा कि जूनियर विश्व चैंपियिनशिप में पदक जीतने के बाद उन्हें सीनियर टूर्नामेंट में खेलने का आत्मविश्वास मिल गया था. दीपक ने कहा, ‘मैंने हालांकि रजत पदक की उम्मीद नहीं की थी. मैं जब जीता वह काफी खुशनुमा पल था. विश्व चैंपियनशिप बड़ा मुश्किल टूर्नामेंट है. यहां हर कोने से खिलाड़ी आते हैं और यहां खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है.’

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दीपक ने माना कि उनके पास अनुभव की कमी है लेकिन इसमें वो कुछ नहीं कर सकते. वे जो कर सकते हैं वह अपने खेल में सुधार लाना है. इस युवा ने कहा, ‘मुझे अपनी तकनीक पर काम करने की जरूरत है. मैं दूसरे पहलवान को देख उनसे सीखने की कोशिश करता हूं और देखता हूं कि मैं कहां खड़ा हूं.’