सत्यरूप सिद्धांत अब गिनीज रिकॉर्ड बनाने की राह पर, सबसे ऊंचे ज्वालामुखी की करेंगे चढ़ाई

 बचपन में कभी अस्थमा से पीड़ित रहे सत्यरूप अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की कगार पर है.

सत्यरूप सिद्धांत अब गिनीज रिकॉर्ड बनाने की राह पर, सबसे ऊंचे ज्वालामुखी की करेंगे चढ़ाई
सत्यरूप सिद्धांत बचपन में कभी अस्थमा से पीड़ित रहे थे (PIC : IANS)

नई दिल्ली: पर्वतारोही सत्यरूप सिद्धांत अगले साल जनवरी में सातों महाद्वीपों की सात चोटियों और सात ज्वालामुखी पर्वतों पर तिरंगा फहराने वाले दुनिया में सबसे कम उम्र के व्यक्ति बन जाएंगे. बचपन में कभी अस्थमा से पीड़ित रहे सत्यरूप अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की कगार पर है. सत्यरूप जब जनवरी में अंटाकर्टिका के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी माउंट सिडले की चढ़ाई शुरू करेंगे तो उनकी उम्र 35 साल 9 महीने होगी. मौजूदा समय में सातों महाद्वीपों की सात चोटियों और सात ज्वालामुखी पर्वतों को फतेह करने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पर्वतारोही डेनियल बुल के नाम पर है. बुल ने 36 साल 157 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी. 

उन्होंने अर्जेंटीना के चाइल बॉर्डर पर स्थित सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत ओजोस डेल सालाडो पर चढ़ाई पूरी कर 27 अप्रैल 2017 को गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराया था. 

पश्चिम बंगाल निवासी सत्यरूप अब तक सात में से पांच ज्वालामुखी शिखरों की सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर चुके हैं. दुनिया के सातों महाद्वीपों में सात चोटियों पर तिरंगा फहराकर वाले वह पांचवें भारतीय बने थे. 

सत्यरूप 30 नवंबर को सत्यरूप उत्तरी अमेरिका के ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत माउंट पीको डि ओरिजाबा पर चढ़ाई करने के लिए मैक्सिको का सफर शुरू कर चुके हैं. वह दिसंबर के पहले हफ्ते से चढ़ाई शुरू करेगे. इसमें सफल होने पर 18 जनवरी से माउंट सिडले पर चढ़ने का प्रयास शुरू करेंगे.

इससे पहले, सत्यरूप पापुआ न्यू गिनी में दूसरे सबसे ऊंचे पर्वतशिखर माउंट गिलुवे की चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय बने थे. वह 11 नवंबर को पापुआ न्यू गिनी में 4,367 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचे थे. वह अब तक सात में से पांच ज्वालामुखी शिखरों की सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुके हैं और वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. 

अगर वह माउंट सिडले की चढ़ाई जनवरी में पूरी करने में कामयाब हो जाते हैं तो वह सात पर्वत शिखरों और सात ज्वालामुखी पर्वतों की चढ़ाई वाले पहले भारतीय होंगे. साथ ही सत्यरूप सफल रहे तो वह सात ज्वालामुखी पर्वतों पर तिरंगा फहराने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति होंगे. माउंट सिडले, माउंट गिलुवे, माउंट दमावंद, पिको डि ओरिजाबा, माउंट एल्बुरस, माउंट किलिमंजारो, ओजोस डेल सलाडो यह सात ज्वालामुखी पर्वत है. 

सत्यरूप ने न केवल माउंट एवरेस्ट को फतह किया, बल्कि वह दक्षिणी ध्रुव के अंतिम छोर तक भी पहुंचे. उन्होंने 50 किलो का स्लेज लेकर छह दिन में 111 किमी की यात्रा पूरी की. सत्यरूप और मौसमी खाटुआ इस साल सितंबर में एशिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत माउंट दामावंद पर तिरंगा फहराने में कामयाब रहे हैं. वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले बंगाली हैं. माउंट दामावंद ईरान में सबसे ऊंचा ज्वालामुखी पर्वत है और संभावित रूप से सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है.

बता दें कि जनवरी 2019 में वह माउंट सिडले की चढ़ाई करेंगे. इसी के साथ उनका सात ज्वालामुखी पर्वतों पर तिरंगा फहराने का सपना पूरा होगा. सिद्धांत के आगामी पर्वतारोहण अभियानों में माउंट गिलुवे (ओशनिया) माउंट पिको डि ओरिजाबा (मैक्सिको) और माउंट सिडले, अंटाकर्टिकाद् शामिल हैं.