सिर पर नहीं था पिता का साया फिर भी हिम्मत नहीं हारा यह खिलाड़ी, पाकिस्तान को हरा अपने नाम किया गोल्ड

पानीपत के गांव उग्राखेड़ी के अमन ने अंतर्राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ अपने राज्य का बल्कि देश का भी नाम रोशन किया है.

सिर पर नहीं था पिता का साया फिर भी हिम्मत नहीं हारा यह खिलाड़ी, पाकिस्तान को हरा अपने नाम किया गोल्ड
गांव में बाइक रैली निकालकर अमन का स्वागत किया गया.
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राकेश भयाना, पानीपत: ​कहते हैं इंसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किलें भी घुटना टेक देती हैं. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हरियाणा के खिलाड़ी अमन मलिक ने. दरअसल, पानीपत के गांव उग्राखेड़ी के अमन ने अंतर्राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ अपने राज्य का बल्कि देश का भी नाम रोशन किया है. सोमवार को गोल्ड लेकर गांव पहुंचे अमन का गांव में जोरदार स्वागत किया. गांव वालों ने बाइक रैली निकालकर खिलाड़ी का जोरदार स्वागत किया.  

फाइनल मैच में पाकिस्तान से था मुकाबला
अमन ने बताया कि पाकिस्तान के फैसलाबाद में साउथ एशियन गेम्स में साउथ ईस्ट एशिया के 8 देशों ने हिस्सा लिया था. प्रतियोगिता में मालदीव, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान के साथ 4 अन्य देश के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. उन्होंने बताया कि फाइनल में उनका मुकाबला पाकिस्तान से था. पाकिस्तानी खिलाड़ी को मात देकर उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया. 

सर पर नहीं पिता का साया
अपनी जीत पर हैंडबॉल खिलाड़ी ने कहा कि अगर इंसान किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाह ले तो उसे पाकर ही उसको सुकून मिलता है. वो बताते हैं कि हैंडबॉल खिलाड़ी के तौर पर उनका सफर आसान नहीं रहा. दरअसल, अमन के सिर से पिता का साया बहुत पहले ही उठ गया था, लेकिन अपने दादा और मां के संरक्षण में रहकर उन्होंने कड़ी मेहनत की और एक सफल हैंडबॉल खिलाड़ी का मुकाम हासिल किया.
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कोच को किया धन्यवाद
खिलाड़ी ने कहा कि वह इस जीत के लिए अपने कोच एस के अरोड़ा का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया. अमन चाहते हैं कि सरकार अन्य खेल और खिलाड़ियों की तरह हैंडबॉल के खिलाड़ियों को भी सहायता प्रदान करे ताकि आगे चलकर खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा गोल्ड मेडल जीत सकें. 
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प्रैक्टिस के लिए रोज पानीपत ले दिल्ली जाता था
कोच एस के अरोड़ा बताते हैं कि अमन एक अच्छा खिलाड़ी है और वह पानीपत से दिल्ली ​हर रोज ​प्रैक्टिस के लिए ​आता था और उन्हें अमन की इस जीत पर बेहद खुशी है. वह चाहते हैं कि अमन इंडियन कॉन्टिनेंटल में गोल्ड मेडल हासिल करे.

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नहीं थम रहे मां के आंसू
​वहीं, बेटे की जीत से खुश मां कौशल्या के आंसू नहीं थम रहे. उन्होंने कहा कि बहुत कठिनाइयों के ​साथ ​बेटे को तैयार किया. उसने गोल्ड मेडल जीतकर देश का और ​अपने गांव का नाम रोशन किया है.

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