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बाढ़ राहत के लिए सैलरी दान कर चुकीं हिमा दास ने जीता चौथा गोल्ड, की यह अपील

असम की हिमा दास ने यूरोपीय दौरे में 15 दिनों के भीतर जीता चौथा गोल्ड मेडल जीत लिया है. 

बाढ़ राहत के लिए सैलरी दान कर चुकीं हिमा दास ने जीता चौथा गोल्ड, की यह अपील
हिमा दास ने चेक गणराज्य में 200 मीटर रेस में गोल्ड जीता. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: भारत की युवा स्प्रिंटर हिमा दास (Hima Das) ने यूरोप दौरे पर अपना शानदार प्रदर्शन को जारी रखा है. उन्होंने तीन हफ्ते के भीतर चौथा गोल्ड मेडल जीत लिया है. इस बार हिमा ने चेक गणराज्य में चल रहे टाबोर एथलेटिक्स मीट (Tabor Athletics Meet) में 200 मीटर में गोल्ड मेडल अपने नाम किया. उन्होंने बुधवार को हुई यह रेस 23.25 सेकंड में पूरी की. भारत की ही वीके विस्मया (VK Vismaya) 23.43 सेकंड का समय निकालते हुए दूसरे पायदान पर रही. 

19 साल की हिमा इन दिनों यूरोप दौरे पर हैं. उन्होंने बुधवार को जीत के बाद ट्वीट किया, ‘आज 200 मीटर में फिर एक स्वर्ण जीता और टाबोर में अपना समय बेहतर करके 23.25 सेकंड किया.’ हिमा ने इससे पहले दो जुलाई को साल की अपनी पहली प्रतिस्पर्धा 200 मीटर रेस में 23.65 सेकंड का समय निकालर गोल्ड जीता था. यह रेस पोलैंड में हुई पोजनान एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स की थी. इसके बाद, उन्होंने आठ जुलाई को पोलैंड में हुए कुंटो एथलेटिक्स टूर्नामेंट और फिर चेक गणराज्य में क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर की ही रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किया. 

हिमा दास (Hima Das) भले ही यूरोप में गोल्ड बरसा रही हों, लेकिन उनका ध्यान असम में हो रही बारिश पर है. असम इन दिनों बाढ़ से प्रभावित है. हिमा ने बाढ़ की चपेट में आए अपने प्रदेश को बचाने के लिए लोगों से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने की अपील भी की. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘हमारे प्रदेश असम में बाढ़ से स्थिति काफी खराब है. 33 में से 30 जिले इससे प्रभावित हैं. इसलिए मैं बड़े कॉरपोरेट घरानों और लोगों से यह अपील करना चाहती हूं कि वे हमारे राज्य की इस मुश्किल स्थिति में मदद करें.’

 

आधी सैलरी मदद के लिए दी 
कभी फुटबॉलर बनने का सपना देखने वालीं हिमा दास ने बताया कि उन्होंने खुद ने मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है. खबरों के मुताबिक, हिमा ने इंडियन ऑइल फाउंडेशन से मिलने वाली अपनी आधी तनख्वाह राहत कोष में दी है. हिमा दास जूनियर वर्ल्ड चैंपियन हैं. उन्होंने इसी साल एशियन गेम्स में एक गोल्ड और दो सिल्वर मेडल भी जीते थे. 

फुटबॉलर बनने की चाह थी लेकिन... 
असम की हिमा दास का बचपन बेहद गरीबी में बीता है. उके पिता किसान हैं. पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हिमा बचपन में फुटबॉल खेलती थीं. वे स्कूली दिनों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं. उनका सपना भी कामयाब फुटबॉलर बनना था. लेकिन उन्हें जल्दी ही अहसास हो गया कि भारत में महिला फुटबॉल की स्थिति अच्छी नहीं है और इसमें उनका करियर कभी संवर नहीं पाएगा. इसके बाद उन्होंने स्कूल के फिजिकल ट्रेनर शम्सुल हक की सलाह पर रनिंग को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया.