IPL 2020: संघर्ष से भरी रही है SRH के इस यॉर्कर किंग की जिंदगी

सनराइजर्स हैदराबाद टीम के क्रिकेटर टी नटराजन का परिवार बेहद गरीब था, लेकिन क्रिकेट के जरिए उन्होंने अपने परिजनों की जिंदगी बेहतर बनाई लेकिन वो अपनी मां को सड़क के किनारे चिकन बेचना छोड़ने से नहीं मना पाए.

IPL 2020: संघर्ष से भरी रही है SRH के इस यॉर्कर किंग की जिंदगी
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ गेंदबाजी करते हए टी नटराजन (BCCI/IPL)

चेन्नई: अपनी खूबसूरत यॉर्कर की वजह से क्रिकेट में अपनी खास पहचान बनाने वाले टी नटराजन (T Natarajan) ने अपने परिवार के लिए वो सब कुछ किया जो वह कर सकते थे लेकिन वह अपनी मां को सड़क के किनारे चिकन बेचना छोड़ने से नहीं मना पाया. नटराजन के मेंटॉर जयप्रकाश ने कहा कि इस तेज गेंदबाज की मां को लगता है कि जब उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी तब उनके इस काम से परिवार को बहुत मदद मिली थी.

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नटराजन की डेथ ओवर्स के एक्सपर्ट गेंदबाज के रूप में पहचान मौजूदा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से कुछ साल पहले हुई थी जब उन्होंने अपनी यॉर्कर से लगातार बेस्ट बल्लेबाजों को आउट किया. इस दौरान उन्होंने अपने माता पिता के लिए घर बनाया, अपनी बहनों की पढ़ाई की व्यवस्था की, तमिलनाडु के सलेम जिला स्थित अपने गांव चिन्नापामपट्टी में अकादमी शुरू की और अपने साथियों को खेल नहीं छोड़ने के लिये प्रेरित किया. यह सब उन्होंने तमिलनाडु की गेंदबाजी विभाग की जिम्मेदारियों को संभालते हुए किया. 

जयप्रकाश ने कहा, ‘मैं उसके प्रदर्शन से हैरान नहीं हूं क्योंकि उसने कड़ी मेहनत की है. वो काफी परेशानियों से जूझते हुए आगे बढ़ा है. उसने चोट से उबरकर वापसी की और राज्य टीम में जगह बनायी और अब सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से मौका मिलने पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है.’ नटराजन को पहले किंग्स इलेवन पंजाब ने 2017 में 3 करोड़ रुपये में खरीदा था लेकिन वह अपने खेल से प्रभावित नहीं कर पाए थे. उन्हें 2018 में सनराइजर्स ने चुना था लेकिन उन्हें इस सत्र में जाकर अपना पहला मैच खेलने का मिला.

दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की जीत में उन्होंने अपनी भूमिका निभाई. उन्होंने 14वें और 18वें ओवर में कई यॉर्कर करके बल्लेबाजों को परेशानी में रखा. उन्होंने 4 ओवर में 21 रन दिए और आस्ट्रेलिया के मार्कस स्टोइनिस का विकेट लिया. नटराजन के पिता दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते थे लेकिन इस खिलाड़ी ने यह सुनिश्चित किया कि उनके माता पिता का आगे कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़े और उनकी बहनों को उचित शिक्षा मिले.
(इनपुट-भाषा)