वर्ल्ड चैंपियन का 7वां खिताब जीतना चाहती हैं मैरीकॉम, ओलंपिक में गोल्ड पर नजर

36 साल की दिग्गज भारतीय बॉक्सर मैरीकॉम  ने संन्यास की खबरों को खंडन करते हुए कहा, ''मैं अभी कम से कम 1-2 वर्षों तक खेलना जारी रखूंगी.'' 

वर्ल्ड चैंपियन का 7वां खिताब जीतना चाहती हैं मैरीकॉम, ओलंपिक में गोल्ड पर नजर

नई दिल्ली: अपना रिकॉर्ड छठा वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली दिग्गज भारतीय मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम का कहना है कि उनकी नजरें वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब को सातवीं बार जीतने के साथ-साथ 2020 में होने वाले ओलंपिक पदक पर है. मणिपुर की इस खिलाड़ी ने आठ साल में छह खिताब अपने नाम किए हैं, वह भी तब जब उनके पास खेल के अलावा अन्य जिम्मेदारियां भी है. तीन बच्चों की मां मेरी ने कहा कि वह अपना सातवां खिताब जीतने के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहीं है. 

जनजातीय मामलों के मंत्रालय और टीआरआईएफईडी के सम्मान समारोह में उन्होंने कहा, ''मेरा सपना है कि मैं फिर से वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतूं. मैं इसके लिए काफी कड़ी मेहनत कर रही हूं. मैं तीन बच्चों की मां हूं और कई जिम्मेदारियां भी है.'' 

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उन्होंने कहा, ''सरकार ने मुझे संसद सदस्य बनाकर अतिरिक्त जिम्मेदारी दी थी, लेकिन मैंने कभी अभ्यास करना नहीं छोड़ा.'' मैरी ने कहा, ''मैंने अपना छठा खिताब जीता है और मेरा लक्ष्य सातवां खिताब जीतने का है. मैं ओलंपिक में स्वर्ण भी जीतना चाहती हूं.'' 

36 साल की इस खिलाड़ी ने संन्यास की खबरों को खंडन करते हुए कहा, ''मैं अभी कम से कम 1-2 वर्षों तक खेलना जारी रखूंगी.'' मेरी 48 किलोग्राम भार वर्ग में खेलती है लेकिन 2020 ओलंपिक क्वालीफायर्स में उन्होंने 51 किलोग्राम में चुनौती पेश करनी होगी क्योंकि ओलंपिक में 48 किग्रा भारवर्ग नहीं है. उन्होंने 2012 में लंदन ओलंपिक में 51 किग्रा भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था.

मैरीकॉम का कहना है कि अब वह उस मुकाम पर पहुंच गई है कि एक भी पंच गंवाए बिना जीत दर्ज करना चाहती है. छठा वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब जीतने के साथ ही वह इस टूर्नामेंट के 10 सीजन के इतिहास की सबसे सफल मुक्केबाज बन गई.

Mary Kom

मणिपुर की इस मुक्केबाज का अमेरिका में 17 साल पहले सिल्वर मेडल के साथ इसका आगाज हुआ था और यहां घरेलू दर्शकों के सामने बीते सप्ताह उसने छठा गोल्ड जीता. मैरीकॉम ने कहा, ''2001 में मैं युवा और अनुभवहीन थी. कहा जा सकता है कि कोई कौशल नहीं था और सिर्फ दमखम पर निर्भर थी.'' 

उन्होंने कहा, ''लेकिन 2018 में मेरे पास इतना अनुभव था कि मैने खुद पर दबाव नहीं बनने दिया. मैं अब पंच खाना नहीं चाहती और उसके बिना ही मुकाबले जीतना चाहती हूं. इस बार वही करने में कामयाब रही. मैं अब सोच समझकर खेलती हूं.'' 

इससे पहले 2006 में भी मैरीकॉम ने दिल्ली में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी लेकिन उस समय उनके आंसू नहीं छलके थे. उस समय वह जमकर मुस्कुराती नजर आई थी, लेकिन इस बार तिरंगा लहराते समय और राष्ट्रगीत गाते समय उनके आंसू सभी ने देखे. 

Mary Kom

मैरीकॉम ने कहा, ''आखिरी दिन लोगों में इतना उत्साह था जिसने मुझे भावनाओं से भर दिया और यही वजह है कि मैं रो पड़ी.'' टोक्यो ओलंपिक में उन्हें एक बार फिर क्वालीफायर में 51 किलो में खेलना होगा. उन्होंने कहा, ''यह आसान नहीं है क्योंकि मैं भी इंसान हूं. इसमें अधिक परिश्रम लगता है लेकिन मैं अपनी ओर से पूरा प्रयास करुंगी.'' 

अपनी उपलब्धियों के बारे में मैरीकॉम ने कहा, ''यह सब हासिल करने वाली पहली महिला मुक्केबाज बनकर मैं बहुत खुश हूं. हर किसी के सपने होते हैं और मुझे खुशी है कि मैं अपने सपने पूरे कर सकी.''