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हिमा दास को ‘चने की झाड़’ पर चढ़ाने से किसी का फायदा नहीं होगा: जीएस रंधावा

गुरुबचन सिंह रंधावा ने कहा कि रियो ओलंपिक के बाद बैडमिंटन, टेनिस, निशानेबाजी ऐसे खेल हैं जिन्होंने अच्छी प्रगति दिखाई है. 

हिमा दास को ‘चने की झाड़’ पर चढ़ाने से किसी का फायदा नहीं होगा: जीएस रंधावा
गुरुबचन सिंह रंधावा 1961 में अर्जुन अवॉर्ड जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे. (फोटो: IANS)

नई दिल्ली: भारतीय एथलीट हिमा दास ने हाल ही में यूरोप में पांच गोल्ड मेडल जीते हैं और देशवासियों के दिल पर छा गई हैं. हर कोई उन्हें और मेडल जीतते देखना चाहता है, खासकर ओलंपिक मेडल. लेकिन एशियन गेम्स के मेडलिस्ट और अर्जुन अवॉर्डी गुरबचन सिंह रंधावा का कहना कुछ और ही है. उन्होंने कहा कि हिमा दास को ‘चने की झाड़’ पर चढ़ाया जा रहा है. गुरुबचन सिंह रंधावा ने 1962 में एशियन गेम्स में पदक जीता था. वे 1961 में अर्जुन अवॉर्ड जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे.

गुरबचन सिंह रंधावा ने अपने समय और मौजूदा समय की तुलना करते हुए कहा, ‘मैं जब प्रतियोगिताओं में जाता था तब मुझे अपने सभी खर्चे को देखना होता था. मैं इसके लिए किसी को दोष नहीं देता. उस समय हमारे पास इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था. तब तो खेल मंत्रालय भी नहीं हुआ करता था.’ उन्होंने मौजूदा स्थिति को सकारात्मक बताया. साथ ही सावधानी बरतने को कहा है. उन्होंने कहा, ‘अब चीजें काफी हद बेहतर हुई हैं, लेकिन अभी भी हमें विश्व स्तर तक पहुंचने के लिए काफी कुछ करना है.’

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जीएस रंधावा ने कहा कि जीत पर एथलीट की सराहना करना सही है. लेकिन कम महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में जीत हासिल करने पर खिलाड़ियों को चने के झाड़ पर चढ़ा देने से सभी को बचना चाहिए. ऐसा मामला एथलीट हिमा दास को लेकर हुआ था. जिन्होंने बीते महीने यूरोप में पांच पदक अपने नाम किए थे और सोशल मीडिया पर राजनेता, सेलिब्रिटी, सभी वर्ग के लोगों ने उनकी सराहना की थी.

सच्चाई हालांकि यह है कि वे सभी बहुत निचले स्तर के टूर्नामेंट्स थे. उन टूर्नामेंट्स में हिमा ने इसलिए हिस्सा लिया था ताकि वे एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में लगी चोट के बाद अपनी लय हासिल कर सकें. रंधावा ने कहा, ‘इन टूर्नामेंट का कोई खास स्तर नहीं था. इस तरह की गैरजरूरी हाइप खिलाड़ियों के लिए अच्छी नहीं है.’

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80 साल के रंधावा ने कहा कि टोक्यो ओलम्पिक को लेकर अधिकारियों ने इस मामले में काफी कुछ किया है. उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ियों को सुविधाएं दी गई हैं. इसमें कोई शक नहीं है. उनके पास अच्छे कोच भी हैं और किसी भी तरह के पेमेंट में देरी नहीं हो रही है. सही दिशा में कई तरह के निवेश किए गए हैं.’ रंधावा को हालांकि लगता है कि भारत को ट्रैक एंड फील्ड में बड़ी सफलता हासिल करने के लिए काफी कुछ करना है.

रंधावा ने कहा, ‘रियो ओलंपिक के बाद बैडमिंटन, टेनिस, निशानेबाजी ऐसे खेल हैं जिन्होंने अच्छी प्रगति दिखाई है. एथलीट में अब हम देख सकते हैं कि अलग-अलग स्पर्धाओं में खिलाड़ियों को अच्छी तरह से बांटा गया है. पहले यह होता था कि कुछ स्पर्धाओं के लिए हमारे पास अच्छे खिलाड़ी नहीं होते थे, लेकिन अब ऐसा मामला नहीं है. हालांकि मुझे नहीं लगता कि अभी तक हमारे पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं.’