रियो ओलंपिक के लिए टेनिस में कोई वाइल्ड कार्ड नहीं

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) इस साल रियो ओलंपिक में टेनिस प्रतियोगिता के लिये कोई वाइल्ड कार्ड नहीं देगी जिसका मतलब है कि भारतीय खिलाड़ियों को अपनी रैंकिंग के आधार पर ही मुख्य ड्रॉ में जगह बनानी होगी। 

नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) इस साल रियो ओलंपिक में टेनिस प्रतियोगिता के लिये कोई वाइल्ड कार्ड नहीं देगी जिसका मतलब है कि भारतीय खिलाड़ियों को अपनी रैंकिंग के आधार पर ही मुख्य ड्रॉ में जगह बनानी होगी। 

आईटीएफ महासचिव जुआन मार्गेट ने स्पष्ट किया कि कोई भी राष्ट्रीय संघ वाइल्ड कार्ड के लिये आवेदन नहीं कर सकता है। इसका मतलब है कि अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के अध्यक्ष अनिल खन्ना जो आईटीएफ के उपाध्यक्ष भी हैं, भारतीय खिलाड़ियों विशेषकर लिएंडर पेस और महेश भूपति की कोई मदद नहीं कर पाएंगे। पेस अब भी शीर्ष 50 में शामिल हो सकते हैं लेकिन भूपति की रैंकिंग 200 से भी कम है। 

मार्गेट ने बयान में कहा, ‘ओलंपिक टेनिस प्रतियोगिता के लिये ‘वाइल्ड कार्ड’ का आवेदन करने के संबंध में कई संघों ने जानना चाहा है और मैं फिर से स्पष्ट करना चाहता हूं कि ओलंपिक टेनिस प्रतियोगिता में ‘वाइल्ड कार्ड’ नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले ओलंपिक खेलों में आईटीएफ के पास आवंटन के लिये कुछ स्थान होते थे। इसे उसी तरह से माना जाता था जैसे कि अन्य प्रतियोगिताओं वाइल्ड कार्ड होता है। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की जरूरतों के हिसाब से रियो 2016 के लिये बदल दिया गया है। फाइनल क्वालीफिकेशन स्थान अब भी हैं लेकिन उन्हें क्वालीफिकेशन प्रणाली के लिये तय किये गये मानदंडों के अनुसार ही दिया जाएगा।’ 

मार्गेट ने कहा, ‘आईटीएफ के पास फाइनल क्वालीफिकेशन स्थान आवंटित करने का अधिकार नहीं है और इस तरह से राष्ट्रीय खेल संघ फाइनल क्वालीफिकेशन स्थान या वाइल्ड कार्ड के लिये आवेदन नहीं कर सकते हैं।’ इन दोनों के बाद साकेत मयनेनी (113), पुरव राजा (115) और जीवन नेदुचेझियन (140) शीर्ष पांच में शामिल अन्य भारतीय खिलाड़ी हैं। अपने जमाने के दिग्गज खिलाड़ी महेश भूपति अभी विश्व में 214वें नंबर पर है और उनके पास छह जून तक अपनी विश्व रैकिंग में सुधार करने का मौका है। उस दिन की रैकिंग के आधार पर रियो ओलंपिक के लिये प्रवेश दिया जाएगा। 

पुरूष और महिलाओं के एकल वर्ग में 56 खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश मिलेगा। छह स्थान फाइनल क्वालीफिकेशन (आईटीएफ) के होंगे जबकि दो त्रिपक्षीय आयोग के निमंत्रण पर दिये जाएंगे। युगल में 24 टीमों को सीधे प्रवेश मिलेगा जबकि आठ फाइनल क्वालीफिकेशन स्थान (आईटीएफ) है। शीर्ष दस में शामिल किसी भी युगल खिलाड़ी को सीधे प्रवेश मिलेगा और उसके पास अपना जोड़ीदार चुनने का अधिकार भी होगा।