हरमन की कामयाबी पर पिता ने कहा, बेटियों को मौका दीजिए, वह आसमान छू लेंगीं'

भारत को महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचाने वाली हरमनप्रीत कौर की चर्चे इस वक्त हर तरफ हैं. लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे लंबा संघर्ष रहा है. मोगा से लॉर्ड्स तक का उनका सफर कई पढ़ावों से होकर गुजरा है. हरमन के माता-पिता उनकी कामयाबी पर बहुत खुश हैं. 

हरमन की कामयाबी पर पिता ने कहा, बेटियों को मौका दीजिए, वह आसमान छू लेंगीं'
हरमनप्रीत कौर की मां सतविंदर कौर का कहना है, 'जो लोग गर्भ में ही बेटियों को मार देते हैं उन्हें समझना चाहिए कि बेटियां कितनी प्यारी होती हैं.' (file)

नई दिल्ली : भारत को महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचाने वाली हरमनप्रीत कौर की चर्चे इस वक्त हर तरफ हैं. लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे लंबा संघर्ष रहा है. मोगा से लॉर्ड्स तक का उनका सफर कई पढ़ावों से होकर गुजरा है. हरमन के माता-पिता उनकी कामयाबी पर बहुत खुश हैं. 

पंजाब के मोगा से शुरू हुआ हरमन का सफर 

पंजाब के मोगा शहर से उनका सफर शुरू होता है. हरमन के पिता हरमिंदर भुल्लर को बॉस्केटबॉल का शौक था लेकिन वह इसे अपना करियर नहीं बना पाए. उन्होंने एक बड़े वकील के यहां मुंशी की नौकरी कर ली. उनकी शादी सतंविदर से हो गई. जब हरमन का जन्म हुआ तो दोनों को कोई भी बधाई देने नहीं आया. क्योंकि उस वक्त लड़के के होने पर बधाई दी जाती थी. 

स्कूल के दिनों में जगी क्रिकेट में दिलचस्पी

स्कूल के दिनों में ही हरमन में क्रिकेट को लेकर दिलचस्पी जाग गई. हरमन ने जब दसवीं क्लास पास की तो पिता ने फैसला किया कि वह बेटी को क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलवाएंगे. हरमन की ट्रेनिंग कोच कुलदीप सिंह के नेतृत्व में शुरू हो गई. हरमन का क्रिकेट सीखना उन दिनों बहुत अलग बात थी क्योंकि उस वक्त लड़कियां क्रिकेट नहीं खेलती थीं जबकि हरमन लड़कों की तरह के कपड़े पहन बैट-बॉल लेकर ट्रेनिंग पर जाती थी. 

ट्रेनिंग के दौरान सामने आईं कई दिक्कतें

ट्रेनिंग के दौरान हरमन के सामने कई बार असहज स्थिति पैदा हो जाती थी. मैदान में महिला खिलाड़ी को देखर साथी पुरुष खिलाड़ी गाली-गलौज की भाषा में बात करते जिसे सुनकर हरमन को बहुत बुरा लगता था. लेकिन उन सबको नजरअंदाज कर ट्रेनिंग पर ही फोकस करने का फैसला किया. उन्हें पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन की तरफ से जिला फिरोजपुर टीमके लिए खेलने का मौका मिला. 

2009 में खेला पहला वन-डे

हरमन को 2009 में पहला वन डे खेलने का मौका मिला. उनके क्रिकेट करियर का पहला बड़ा पड़ाव 2013 में आया. उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप मैच शतक जड़ दिया. दूसरा बड़ी उपलब्धी 2016 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ हासिल की. इस मैच में टीम इंडिया ने टी-20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत दर्ज की. इसमें हरमनप्रीत ने 31 गेंदों पर 46 रन बनाकर अहम भूमिका निभाई. हरमन क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को अपना रोल मॉडल मानती हैं और उनके फॉर्मूले - गेंद देखो और हिट करो के फार्मूले को फॉलो करती है. 

'यह जागने का वक्त है'

मां सतविंदर कौर का कहना है, 'अब यह जागने का वक्त है, जो लोग गर्भ में ही बेटियों को मार देते हैं उन्हें समझना चाहिए कि बेटियां कितनी प्यारी होती हैं. मैं चाहती हूं कि देश की लड़कियो को आगे बढ़ने का मौका मिले.' हरमन के पिता कहत हैं कि बेटी की कामयाबी से बहुत खुश हूं. अब लोगों को यह मान लेना चाहिए कि बेटियां किसी मायने में बेटों से कम नहीं. उन्हें मौका दीजिए, वह आसमान छू लेंगीं.