बैडमिंटन कोर्ट की कमी के कारण सिंगल्स नहीं खेल पाए रैंकीरेड्डी, अब हैं देश के सबसे महंगे डबल्स खिलाड़ी

आंध्र प्रदेश के सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी अपने गृहनगर में वुडन कोर्ट बनाना चाहते हैं, लेकिन उनकी फाइल तीन साल से खेल विभाग में अटकी हुई है. 

बैडमिंटन कोर्ट की कमी के कारण सिंगल्स नहीं खेल पाए रैंकीरेड्डी, अब हैं देश के सबसे महंगे डबल्स खिलाड़ी
अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स ने पीबीएल के चौथे सीजन के लिए सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी से 52 लाख रुपए में करार किया है. (फोटो: PTI)

नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी भारत के सबसे सफल डबल्स बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक हैं. वे शुरू में सिंगल्स में अपना करियर बनाना चाहते थे. लेकिन उन्हें अपने शहर में कोर्ट की कमी के कारण मजबूरन डबल्स में आना पड़ा. अब वे अपने शहर में वुडन कोर्ट बनाना चाहते हैं, ताकि किसी खिलाड़ी को मजबूरी में सिंगल्स से डबल्स का विकल्प ना चुनना पड़े. उनकी यह इच्छा पिछले तीन साल से खेल विभाग की फाइलों में दबी पड़ी है. 

कोर्ट बनाने के लिए 3 साल से प्रयासरत हैं सात्विक 
सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी आंध्र प्रदेश के अमलापुरम जिले के निवासी हैं. सात्विक ने कहा, ‘हमारे गृहनगर में बैडमिंटन के कई अच्छे खिलाड़ी हैं. हमारे पास एक वुडन बैडमिंटन कोर्ट है. उसमें अधिक सुविधाएं नहीं है. मैं अधिक सुविधाओं वाला वुडन कोर्ट बनाने की कोशिश में हूं. लेकिन पिछले तीन साल से मेरा यह प्रयास सफल नहीं हो पा रहा है क्योंकि खेल विभाग इसमें रुचि नहीं दिखा रहा है.’ 

वुडन कोर्ट के लिए अर्जी दी, पर जवाब नहीं मिला 
सात्विक ने कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश खेल प्रशासन में वुडन कोर्ट के लिए अर्जी दी है, लेकिन अभी तक उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है. इसके अलावा वे कई नेताओं से भी मिल चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद स्थानीय नेताओं से बात की थी. उनसे कोई पक्की प्रतिक्रिया नहीं मिली. कई नेताओं ने कहा कि हम बनवा देंगे. आप चिंता मत कीजिए. जब भी अगली बार आएंगे, हम उसे तैयार रखेंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.’

सात साल की उम्र खेल रहे हैं बैडमिंटन 
अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स ने सात्विक को प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के चौथे सीजन के लिए 52 लाख रुपए में खरीदा है. वे डबल्स वर्ग में भारत के सबसे महंगे खिलाड़ी हैं. सात साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रहे सात्विक पीबीएल में बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिलने से हैरान भी हैं और खुश भी. उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत खुश हुआ. मैंने इतने की उम्मीद नहीं की थी. मुझे 30 लाख तक की उम्मीद थी. मैं इस राशि को अपने पिता को दूंगा. अगर मुझे कुछ चाहिए होगा, तो मैं उनसे मांग लूंगा.’

...लेकिन सिंगल्स खेलने का मौका नहीं मिलता था
डबल्स में खेलने की रुचि के बारे में सात्विक ने कहा, ‘मेरे गृहनगर में दो कोर्ट थे और हम खेलने वालसे 16-17 खिलाड़ी थे. इसमें मुझे सिंगल्स में खेलने का मौका नहीं मिलता था. इसलिए, मैं डबल्स खेलने लगा. इससे मेरा स्मैश बेहतर हुआ और मैंने पूरे कोर्ट के बजाए आधे कोर्ट में भागने में अभ्यास अच्छा किया.’
 


सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी (दाएं) और चिराग शेट्टी डेनमार्क ओपन के दौरान. (फोटो: PTI)

टीवी पर मैच नहीं दिखाने से नहीं बनी पहचान 
भारत में डबल्स वर्ग के खिलाड़ियों से लोग अनजान हैं. इस पर सात्विक ने कहा, ‘हमें कोई भी नहीं जानता है. हमारे मैचों को टीवी पर बहुत कम दिखाया जाता है. इस कारण लोग भी डबल्स के खिलाड़ियों के बारे में नहीं जानते. हमें खुद को साबित करने के लिए दो-तीन सुपर सीरीज खिताब जीतने होंगे और तभी लोगों को खिलाड़ियों के बारे में पता होगा और सभी इसी की कोशिश कर रहे हैं.’ सात्विक ने कहा कि उनका लक्ष्य ओलंपिक ही है. वे इसी का ध्यान रखकर तैयारी कर रहे हैं. 

सांसद ने कहा- मैं उनकी पूरी मदद करूंगा 
अमलापुरम के सांसद रवींद्र बाबू पांडुला ने सात्विक के प्रयासों से जुड़े सवाल पर कहा, ‘अगर वे हमारे क्षेत्र के खिलाड़ी हैं, तो उनकी हर तरह से मदद होनी चाहिए. मैं निश्चित तौर पर उनकी मदद करूंगा. यह हमारी प्रथम जिम्मेदारी है कि हम उनकी जरूरतों को पूरा करें. उन्होंने मुझसे संपर्क नहीं किया है. मैं चाहता हूं कि वह मुझसे बात कर पूरी जानकारी दें.’